बीकानेर। शहर की डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था को लेकर नगर निगम ने नई व्यवस्था तैयार की है। पहले नगर निगम की ओर से 140 नए टिपर शहर में उतारने की तैयारी की जानकारी सामने आई थी, लेकिन अब राज्य स्तर पर भेजे गए 185 ऑटो टिपरों में बीकानेर नगर निगम के टिपर भी शामिल हैं। बीकानेर में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम के बाद विधायक सुश्री सिद्धि कुमारी, विधायक जेठानंद व्यास, जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़ और संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा सहित अन्य अतिथियों ने नगर निगम क्षेत्र में घर-घर कचरा संग्रहण के लिए ऑटो टिपर्स को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
नई व्यवस्था का उद्देश्य शहर में घर-घर कचरा संग्रहण को मजबूत करना और सफाई व्यवस्था को बाधित होने से बचाना है।
पुराने टिपरों की जगह नई व्यवस्था
नगर निगम की डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था पुराने टिपरों को लेकर लंबे समय से सवालों में रही है। पहले उपलब्ध कराए गए कई टिपर लंबे समय तक उपयोग में नहीं आए और रखरखाव के अभाव में खराब स्थिति में पहुंच गए। संबंधित फर्म का अनुबंध भी 15 सितंबर को समाप्त हो चुका है।
ऐसे में निगम ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नए टिपर उपलब्ध कराने की दिशा में काम शुरू किया। पहले 50 नए टिपर बीकानेर पहुंचने और कुल 140 नए टिपर शहर में उतारने की तैयारी की जानकारी सामने आई थी।
अब 3 अक्टूबर को राज्य स्तर पर करीब 185 ऑटो टिपरों को रवाना किया गया, जिनमें बीकानेर नगर निगम के टिपर भी शामिल हैं।
हर वार्ड तक पहुंचाने की तैयारी
पहले की योजना के अनुसार नई व्यवस्था में अमूमन प्रत्येक वार्ड में दो टिपर कचरा संग्रहण के लिए लगाए जाने थे। पूर्व विधानसभा क्षेत्र में 75 बड़े टिपर तथा पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में 65 बड़े और 15 छोटे वाहनों के जरिए कचरा संग्रहण की योजना बताई गई थी।
इसके अलावा नगर निगम के पास 55 ट्रैक्टर भी उपलब्ध हैं, जिनसे कई वार्डों में कचरा संग्रहण का काम शुरू किया जा चुका है।
अब कचरा गाड़ी में सुनाई देगा मारवाड़ी संदेश
नई व्यवस्था में बीकानेर का स्थानीय रंग जोड़ने की तैयारी भी की जा रही है। कचरा संग्रहण करने वाले वाहनों में बजने वाले संदेशों और संगीत में मारवाड़ी भाषा और स्थानीय लोक शैली को शामिल करने की योजना अमल में लाई गई है।
इसका उद्देश्य शहरवासियों को स्थानीय भाषा में स्वच्छता का संदेश देकर डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण से जोड़ना है। यानी आने वाले समय में गलियों में कचरा लेने पहुंचने वाली गाड़ियों से “गाड़ी वाला आया...” की आवाज खास मारवाड़ी अंदाज में सुनाई दे सकती है।
एक साथ उतारने की थी रणनीति
नगर निगम की पहले सामने आई योजना के मुताबिक नए टिपरों को चरणबद्ध तरीके से उतारने के बजाय शहर के सभी वार्डों में एक साथ चलाने पर विचार किया गया था। इसके पीछे तर्क था कि किसी क्षेत्र में वाहन पहले और किसी दूसरे क्षेत्र में बाद में पहुंचने से स्थानीय स्तर पर नाराजगी पैदा हो सकती है।
अब नए ऑटो टिपरों के रवाना होने के बाद शहर की डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।


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