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RGHS घोटाला 'सेहत' के नाम पर महा-फर्जीवाड़ा; बीकानेर की बोथरा लैब और भरतपुर के अस्पताल पर FIR, 7 डॉक्टर सस्पेंड

India-1stNews



– काली कमाई का नेटवर्क: पीबीएम के डॉक्टरों के नाम पर काटीं फर्जी पर्चियां; बिना जांच के उठाए क्लेम, अब तक 39 करोड़ की रिकवरी

– सख्त एक्शन: प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ और सीईओ हरजीलाल अटल के निर्देश पर कार्रवाई; 64 कार्मिक सस्पेंड, 19 एफआईआर दर्ज

बीकानेर/सीकर/भरतपुर, 15 फरवरी (रविवार)। राजस्थान की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना RGHS में राजकोष को चूना लगाने वाले गिरोह के खिलाफ सरकार ने अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई की है। बीकानेर की प्रसिद्ध बोथरा लैब और भरतपुर के भरतपुर नर्सिंग होम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। वहीं, ऑडिट में गंभीर अनियमितताएं मिलने पर सीकर जिले के 7 डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है।

बीकानेर: बोथरा लैब ने डॉक्टरों के 'फर्जी' हस्ताक्षर कर लूटा राजकोष

​बीकानेर की डॉ. बोथरा डायग्नोस्टिक एंड इमेजिंग सेंटर में जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं: लैब ने पीबीएम अस्पताल के कई वरिष्ठ चिकित्सकों के नाम, सील और फर्जी हस्ताक्षरों का उपयोग कर क्लेम उठाए।जब पीबीएम के डॉक्टरों से सत्यापन कराया गया, तो उन्होंने साफ पल्ला झाड़ लिया। डॉक्टरों ने बताया कि जिस दिन की पर्चियां दिखाई गईं, उस दिन वे या तो अवकाश पर थे या उनकी ड्यूटी ही नहीं थी। लैब ने मरीजों के नाम पर HbA1c, RA Factor और Procalcitonin जैसी महंगी जांचें दर्शाईं, जिनका न तो कोई चिकित्सीय आधार था और न ही कोई रिपोर्ट उपलब्ध थी।

सीकर: ये 7 डॉक्टर हुए सस्पेंड

​प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के अनुसार, ऑडिट में गड़बड़ी पाए जाने पर सीकर के इन डॉक्टरों पर गाज गिरी है:

  1. डॉ. कमल कुमार अग्रवाल (सह आचार्य, अस्थि रोग विभाग, मेडिकल कॉलेज)
  2. डॉ. सुनील कुमार ढाका (सह आचार्य, अस्थि रोग विभाग, मेडिकल कॉलेज)
  3. डॉ. मुकेश वर्मा (सह आचार्य, जनरल मेडिसिन, मेडिकल कॉलेज)
  4. डॉ. राकेश कुमार (सीएचसी किरवा)
  5. डॉ. गजराज सिंह (एसके अस्पताल)
  6. डॉ. एसएस राठौड़ (एसके अस्पताल)
  7. डॉ. सुनील शर्मा (एसके अस्पताल)

भरतपुर: अस्पताल और फार्मेसी की 'जुगलबंदी' से ठगी

​भरतपुर नर्सिंग होम और कशिश फार्मेसी ने मिलकर सरकारी पैसे की बंदरबांट की। डॉक्टर संगीता अग्रवाल ने अस्पताल के आरजीएचएस में अनुमोदित (Approved) न होने के बावजूद बोर्ड लगाकर मरीजों को प्रलोभन दिया। लाभार्थियों के इलाज के नाम पर उनकी SSO ID और पासवर्ड ले लिए गए और अपनी ही फार्मेसी के माध्यम से फर्जी बिल बनाकर भुगतान उठा लिया गया। इस अस्पताल को पहले ही डी-एम्पेनल किया जा चुका है।

RGHS फर्जीवाड़े का अब तक का 'रिपोर्ट कार्ड'

​राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के सीईओ हरजीलाल अटल ने बताया कि अब तक हुई कार्रवाई में: कुल 39 करोड़ रुपये की रिकवरी निकाली गई है (अस्पतालों से 32 करोड़ और फार्मेसी से 5 करोड़)। 64 कार्मिकों को सस्पेंड किया गया है। अब तक कुल 19 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। कार्ड का दुरुपयोग करने पर 500 लाभार्थियों के कार्ड ब्लॉक कर उनसे 2 करोड़ वसूले गए हैं।

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