– कोर्ट की सख्त टिप्पणी: प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में विरोधाभास, नहीं करवाई गई पहचान परेड; बैलिस्टिक रिपोर्ट भी नहीं दे पाई साथ
– चर्चित मामला: 2016 में बजरंग सोनी को मारी गई थी गोली; सेशन कोर्ट के न्यायाधीश विनोद कुमार गुप्ता ने सुनाया निर्णय
बीकानेर, 7 फरवरी (शनिवार)। बीकानेर के नयाशहर थाना क्षेत्र में वर्ष 2016 में हुए चर्चित बजरंग सोनी फायरिंग मामले में सेशन कोर्ट ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायाधीश विनोद कुमार गुप्ता ने मामले के मुख्य आरोपितों मेघराज, जितेंद्र, प्रेमचंद उर्फ बबलू और विक्रम सिंह उर्फ विकसा को सभी आरोपों से दोषमुक्त (बरी) कर दिया है।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
क्या था मामला?
घटना 10 सितंबर 2016 की रात की है, जब जस्सूसर गेट के पास बजरंग सोनी पर जानलेवा हमला कर फायरिंग की गई थी। घायल बजरंग ने पर्चा बयान में कुछ लोगों पर साजिश के तहत गोली मारने का आरोप लगाया था। पुलिस ने इस मामले में मेघराज, जितेंद्र और प्रेमचंद पर हत्या के प्रयास, साजिश और धोखाधड़ी का केस बनाया था। विक्रम सिंह उर्फ विकसा पर अवैध हथियार सप्लाई करने का आरोप लगाते हुए चालान पेश किया था।
इन 5 वजहों से बरी हुए आरोपित
न्यायाधीश ने फैसले में पुलिस जांच की उन कमियों को उजागर किया जिसके कारण आरोपितों को संदेह का लाभ मिला:
- गवाहों में विरोधाभास: प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों में काफी अंतर था। किसी ने भी साफ तौर पर फायरिंग होते हुए नहीं देखा।
- पहचान परेड की कमी: पुलिस ने आरोपितों की शिनाख्त के लिए आवश्यक पहचान परेड नहीं करवाई।
- हथियारों का मिलान नहीं: बरामद हथियारों को बैलिस्टिक जांच के जरिए यह साबित नहीं किया जा सका कि गोली उन्हीं से चली थी।
- मेडिकल दस्तावेज गायब: घायल के इलाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण मेडिकल दस्तावेज कोर्ट में पेश ही नहीं किए गए।
- रंजिश साबित नहीं: आरोपितों और परिवादी के बीच किसी पुरानी रंजिश या विवाद के पर्याप्त सबूत नहीं मिले।
अधिवक्ताओं की दलीलें रहीं हावी
आरोपितों की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता संजय रामावत और नरेंद्र स्वामी ने की। उन्होंने कोर्ट के सामने पुलिस द्वारा की गई हथियारों की जब्ती प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए, जिसे कोर्ट ने सही माना। कोर्ट ने आदेश दिया कि साक्ष्यों के अभाव में आरोपितों को सजा नहीं दी जा सकती।

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