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BTU महा-घोटाला: बीकानेर तकनीकी विवि में करोड़ों का खेल! अपात्रों को 'पदोन्नति' देने के लिए नियमों की धज्जियाँ; हाईकोर्ट ने थमाया नोटिस

India-1stNews



– वीसी और रजिस्ट्रार आमने-सामने: संविदा अवधि खत्म होने के बावजूद चेहेतों को लाभ पहुँचाने की तैयारी; 'टेबल एजेंडा' के जरिए बोम (BoM) में पास कराने की साजिश

– भ्रष्टाचार का आरोप: एसीबी में दर्ज FIR और अभियोजन स्वीकृति के बावजूद शिक्षकों को प्रमोशन; सरकार को करोड़ों का चूना लगाने का आरोप

बीकानेर, 21 फरवरी (शनिवार)। 'भ्रष्टाचार मुक्त शासन' के दावों के बीच बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय (BTU) में एक बड़ा घोटाला सामने आ रहा है। आरोप है कि विवि प्रशासन राजनेताओं के दबाव में आकर उन सहायक आचार्यों (Assistant Professors) को कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) का लाभ देने की तैयारी कर रहा है, जिनकी नियुक्तियां ही कानूनी विवादों के घेरे में हैं। इस प्रकरण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता मुकुल कृष्ण व्यास की ओर से तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को कानूनी नोटिस जारी किया गया है।

क्या है पूरा मामला? (2004 से अब तक का घटनाक्रम)

  1. अनुबंध आधारित नियुक्तियां: साल 2004 में सरकार के निर्देशानुसार इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर (ECB) ने 3 साल के अनुबंध (Contract) पर शैक्षणिक स्टाफ रखा था। 2005-06 में विज्ञापन के जरिए करीब 35 लोगों की नियुक्ति हुई।
  2. स्वतः खारिज अनुबंध: नियमानुसार यह अनुबंध 2009 में समाप्त हो चुका था। सरकार ने इसे आगे नहीं बढ़ाया, फिर भी ये कार्मिक आज तक नियमित कर्मचारियों की तरह पूर्ण वेतन और वित्तीय लाभ ले रहे हैं।
  3. करोड़ों का वित्तीय भार: विवि प्रशासन इन अपात्र कार्मिकों को पदोन्नति देकर सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ डालने की तैयारी में है।

बोम (BoM) बैठक में नियमों की अनदेखी

​विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार, किसी भी प्रमुख एजेंडे की जानकारी सदस्यों को 7 दिन पहले देनी होती है।

  • साजिश: जनवरी में हुई 'बोम' की बैठक में इस विवादास्पद मुद्दे को मुख्य एजेंडे में शामिल नहीं किया गया, बल्कि इसे 'टेबल एजेंडा' के रूप में आखिरी समय पर रखा गया।
  • रजिस्ट्रार की आपत्ति: रजिस्ट्रार ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए तर्क दिया कि संविदा कर्मियों और कानूनी प्रक्रिया झेल रहे लोगों को यह लाभ देना असंवैधानिक है। इसी कारण मामला अटक गया, लेकिन अब रजिस्ट्रार पर भारी दबाव बनाया जा रहा है।
  • मिनट्स में देरी: बैठक को तीन सप्ताह बीतने के बाद भी 'मिनट्स' (Minuts) तैयार नहीं होना विवि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।

ACB की जांच और अभियोजन स्वीकृति के बावजूद 'मेहरबानी'

​हैरानी की बात यह है कि जिन शिक्षकों को पदोन्नति देने की जल्दबाजी की जा रही है, उनमें से कई के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) बीकानेर में मुकदमे दर्ज हैं (FIR 32/2014, 35/2014)। तकनीकी शिक्षा विभाग ने इनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) भी जारी कर दी है। स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग ने इन पर 'रिकवरी' के आदेश दिए थे, जिन्हें विवि प्रशासन ने ठंडे बस्ते में डाल रखा है।

अशैक्षणिक कर्मचारियों की अनदेखी

​एक तरफ जहाँ अपात्रों पर विवि मेहरबान है, वहीं दूसरी ओर संविदा पर लगे अशैक्षणिक कर्मचारियों को उनके वाजिब हक पीपीएफ (PF) से भी वंचित रखा जा रहा है। कर्मचारी कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।

कुलगुरु और कुलाधिपति तक पहुँचा मामला

​इस पूरे प्रकरण को लेकर सुरेश किराडू ने कुलगुरु और कुलाधिपति (राज्यपाल) के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपकर आगाह किया है। वहीं, राजीव नगर निवासी राजूराम चौधरी ने हाईकोर्ट में वाद दायर कर इस प्रक्रिया को चुनौती दी है।


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