– तीसरा दिन: मुंह पर अंगुली रखकर निकाला मौन जुलूस, कलेक्ट्रेट की ओर कूच; संतों के सानिध्य में खेजड़ी पूजन
– मेडिकल अलर्ट: अनशनकारी सुभाष विश्नोई का BP बढ़ा, अस्पताल जाने से किया इनकार; CMHO ने तैनात की 4 डॉक्टरों की टीम
बीकानेर/कलेक्ट्रेट, 4 फरवरी (बुधवार)।
बीकानेर में 'मरुस्थल के कल्पवृक्ष' खेजड़ी को बचाने के लिए चल रहा महापड़ाव अब 'करो या मरो' की स्थिति में पहुंच गया है। आंदोलन के तीसरे दिन (बुधवार) को जोश और आक्रोश दोनों चरम पर दिखाई दिए।
विश्नोई धर्मशाला के सामने चल रहे महापड़ाव में 450 से अधिक लोग आमरण अनशन (Hunger Strike) पर बैठ गए हैं। सुबह कड़ाके की ठंड में पर्यावरण प्रेमियों ने संतों के सानिध्य में मुंह पर अंगुली रखकर 'मौन प्रभात फेरी' निकाली और कलेक्ट्रेट की तरफ कूच किया। उनका संदेश साफ है— "बातें बहुत हो चुकीं, अब लिखित आश्वासन चाहिए।"
"सिर साटे रूंख रहे, तो भी सस्तो जाण"
आंदोलन में विश्नोई समाज की महिलाओं का जज्बा देखते ही बन रहा है। अनशन पर बैठी महिलाओं ने भावुक होते हुए ऐतिहासिक 'खेजड़ली बलिदान' की याद दिलाई।
- चेतावनी: महिलाओं ने कहा, "हमारे समाज का इतिहास पेड़ों के लिए बलिदान देने का रहा है। हमारे पूर्वजों ने खेजड़ी के लिए जोधपुर के खेजड़ली में सिर कटवा दिए थे। आज भी वही खून हमारी रगों में है। हम जान दे देंगे, लेकिन खेजड़ी पर आरी नहीं चलने देंगे।"
अनशनकारी की तबीयत बिगड़ी, उपचार के बाद फिर डटे
तीन दिन से भूखे-प्यासे बैठे आंदोलनकारियों की सेहत अब जवाब देने लगी है।इमरजेंसी: अनशन पर बैठे सुभाष विश्नोई की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उनका ब्लड प्रेशर (BP) काफी बढ़ गया था। मौके पर मौजूद मेडिकल टीम ने तुरंत उपचार शुरू किया। डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल ले जाने की सलाह दी, लेकिन सुभाष ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, "शरीर कमजोर हो सकता है, संकल्प नहीं। जब तक ठोस फैसला नहीं होता, मैं नहीं हटूंगा।"
363 अनशनकारियों पर मेडिकल टीम की नजर
प्रशासन भी अब अलर्ट मोड पर है। अनशनकारियों की बिगड़ती हालत को देखते हुए सीएमएचओ (CMHO) डॉ. पुखराज साध खुद अनशन स्थल पर पहुंचे।स्वास्थ्य विभाग ने मौके पर 4 डॉक्टरों सहित 10 मेडिकल कर्मियों की टीम तैनात कर दी है। विशेष रूप से उन 363 अनशनकारियों की लगातार स्क्रीनिंग की जा रही है, जिन्होंने अन्न-जल त्याग रखा है। एम्बुलेंस को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है।
सरकार को दो टूक: लिखित आश्वासन लाओ
आंदोलनकारियों और पर्यावरण संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि उन्हें अब मौखिक आश्वासन नहीं चाहिए। जब तक सरकार खेजड़ी कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध का कानून या लिखित आदेश जारी नहीं करती, महापड़ाव जारी रहेगा। कलेक्ट्रेट के बाहर जुटी भीड़ ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।

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