– आधिकारिक मुहर: 17 मार्च 2026 से प्रभावी हुई योजना; सचिव कुलराज मीणा के हस्ताक्षर से राजपत्र में प्रकाशन।
– गोचर पर बड़ा फैसला: नाथानियां, सूजासर, भीनासर और उदयरामसर की चारागाह भूमि 'स्पेशल पेरिफेरी जोन' में; अब सरकार की अनुमति बिना नहीं होगा कोई बदलाव।
– जनता की भागीदारी: 227 आपत्तियों में से 26 को मिली पूर्ण स्वीकृति; शोभासर और गंगाशहर जैसे क्षेत्र पहली बार मास्टर प्लान के दायरे में।
बीकानेर, 19 मार्च (गुरुवार)। बीकानेर शहर के अगले दो दशकों के विकास का रोडमैप अब पूरी तरह तैयार है। मास्टर विकास योजना-2043 को राज्य सरकार ने गजट नोटिफिकेशन के साथ लागू कर दिया है। बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) बोर्ड द्वारा 9 मार्च को दी गई मंजूरी के बाद अब इसे राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है।
गोचर भूमि का 'कवच' बरकरार
इस मास्टर प्लान की सबसे बड़ी विशेषता गोचर (चारागाह) भूमि का संरक्षण है।
स्पेशल पेरिफेरी जोन: नगरीकरण क्षेत्र में आने वाली गोचर भूमि को विशिष्ट क्षेत्र में ही रखा गया है। अब इस जमीन की खरीद-फरोख्त या उपयोग परिवर्तन केवल राज्य सरकार के स्तर पर ही संभव होगा। प्राधिकरण यहाँ अपने स्तर पर कोई आवासीय कॉलोनी नहीं काट सकेगा।
आपत्तियों का निस्तारण और संशोधन
27 अगस्त 2025 को मास्टर प्लान सार्वजनिक होने के बाद जनता से 227 आपत्तियां प्राप्त हुई थीं जिसमें से 26 आपत्तियों को पूरी तरह और 25 को आंशिक रूप से स्वीकार कर योजना में संशोधन किया गया। 40 आपत्तियां मापदंडों पर खरी नहीं उतरने के कारण खारिज कर दी गईं।
शहर विकास के मुख्य आकर्षण
- नई सड़क और व्यापार: रेलवे स्टेशन से रेलवे ग्राउंड तक 60 फीट चौड़ी सड़क प्रस्तावित की गई है, जिसके दोनों ओर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो सकेंगी।
- लॉजिस्टिक हब: शहर के बढ़ते व्यापार को देखते हुए विशेष लॉजिस्टिक हब और ट्रांसपोर्ट नगर के लिए स्थान चिन्हित किए गए हैं।
- विरासत संरक्षण: बीकानेर के ऐतिहासिक भवनों और हवेलियों के संरक्षण के लिए विशेष विधिक प्रावधान किए गए हैं।
- क्षेत्र विस्तार: शोभासर, भीनासर, उदयरामसर और गंगाशहर के कई आबादी क्षेत्रों को पहली बार विधिवत मास्टर प्लान का हिस्सा बनाया गया है।
भविष्य का बीकानेर
प्राधिकरण सचिव कुलराज मीणा के अनुसार, यह योजना बीकानेर के सुनियोजित विकास और आबादी विस्तार को ध्यान में रखकर बनाई गई है। 17 मार्च से प्रभावी होने के बाद अब शहर का कोई भी नया निर्माण या प्रोजेक्ट इसी मास्टर प्लान के मापदंडों के अनुसार ही स्वीकृत किया जाएगा।

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