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“आठ करोड़ राजस्थानियों की जुबान को मिला सम्मान, राजस्थानी भाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय”

​— ऐतिहासिक जीत: सुप्रीम कोर्ट ने प्राथमिक शिक्षा में राजस्थानी भाषा को चरणबद्ध तरीके से लागू करने हेतु राज्य सरकार को दिए निर्देश।

संस्कृति का संरक्षण: नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत मातृभाषा में शिक्षा का मार्ग प्रशस्त; युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए द्वार।

जश्न का माहौल: राजस्थानी मोट्यार परिषद ने बीकानेर के कोटगेट पर मनाया जीत का उत्सव।

बीकानेर, 12 मई (मंगलवार)। राजस्थान की मातृभाषा राजस्थानी के लिए आज का दिन इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजस्थानी भाषा को लेकर सुनाया गया निर्णय प्रदेश के आठ करोड़ राजस्थानियों के सांस्कृतिक स्वाभिमान की जीत है। न्यायालय ने नई शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा को अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए राजस्थान सरकार को ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

30 वर्षों के संघर्ष का सुखद परिणाम

​यह ऐतिहासिक निर्णय पदम मेहता एवं कल्याण सिंह शेखावत द्वारा दायर याचिका पर आया है। राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए पिछले 30 वर्षों से संघर्षरत राजस्थानी मोट्यार परिषद के डॉ. गौरीशंकर प्रजापत, डॉ. नमामीशंकर आचार्य एवं डॉ. हरिराम बिश्नोई ने इसे शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि अब नई पीढ़ी अपनी जड़ों, लोक-संस्कृति और साहित्य से सीधे जुड़ सकेगी।

रोजगार और अस्मिता की नई राह

​राजस्थानी मोट्यार परिषद के पदाधिकारियों ने इस निर्णय के बहुआयामी लाभों पर प्रकाश डाला:

  • रोजगार के अवसर: वरिष्ठ सदस्य विनोद सारस्वत के अनुसार, इस निर्णय से शिक्षा, अनुवाद, अध्यापन और प्रतियोगी परीक्षाओं के क्षेत्र में लाखों नए अवसर पैदा होंगे।
  • REET में शामिल होने का मार्ग: परिषद के राजेश चौधरी ने कहा कि अब रीट (REET) सहित अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं में राजस्थानी भाषा को शामिल करने का रास्ता साफ हो गया है।
  • संवैधानिक दबाव: इस फैसले से राजस्थानी को राज्य की 'राजभाषा' घोषित करने और संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करवाने हेतु केंद्र व राज्य सरकार पर सकारात्मक दबाव बनेगा।

बीकानेर के कोटगेट पर मनाया जश्न

​सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की खुशी में राजस्थानी मोट्यार परिषद, बीकानेर के जिलाध्यक्ष हिमांशु टाक के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने आज ऐतिहासिक कोटगेट पर जश्न मनाया। इस दौरान आमजन को इस निर्णय के सामाजिक और शैक्षणिक महत्व की जानकारी दी गई।

​इस अवसर पर रामावतार उपाध्याय, प्रशांत जैन, सुनील सांखला, सरजीत सिंह, मुकेश रामावत, मनोज फौजी सहित बड़ी संख्या में भाषा प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह राजस्थान की अस्मिता और 'मायड़ भाषा' के सम्मान की सामूहिक जीत है।