— सनसनीखेज वारदात: श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के कीतासर निवासी सुंदरलाल और राजलदेसर के बंडूआ की रहने वाली कालीदेवी ने दी जान; दोनों ही थे विवाहित।
— 60 किमी दूर आकर आत्मघाती कदम: मौके पर खड़ी मिली बोलेरो गाड़ी, मोबाइल और शराब की बोतल; प्रथमदृष्टया प्रेम-प्रसंग का माना जा रहा है मामला।
— शवों को लटका देख सहमे श्रद्धालु: घटनास्थल के ठीक सामने स्थित गौशाला में चल रही भागवत कथा; सुबह परिक्रमा करने आए महिलाओं और बच्चों में फैला खौफ।
— पुलिस की असंवेदनशीलता पर सवाल: सुबह 5 बजे सूचना मिलने के बावजूद 4.5 घंटे देरी से पहुंचे थाना प्रभारी; 5 घंटे तक धूप में लटके रहे शव, ग्रामीणों ने पुलिस को कोसा।
बीकानेर/श्रीडूंगरगढ़, 10 जुलाई (शुक्रवार)। बीकानेर जिले के सेरूणा थाना इलाके के लिखमीसर दिखनादा गांव की रोही में शुक्रवार सुबह एक हृदयविदारक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां सड़क किनारे एक खेजड़ी के पेड़ से एक युवक और महिला के शव लटके हुए मिले। दोनों ने एक ही चुन्नी का फंदा बनाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना की सूचना के बाद मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। हालांकि, इस बेहद संवेदनशील मामले में सेरूणा थाना पुलिस की गंभीर लेटलतीफी और असंवेदनशीलता भी सामने आई है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
मृतकों की हुई पहचान; महिला थी 4 बच्चों की मां
सेरूणा थाना पुलिस और ग्रामीण सूत्रों के अनुसार, मृतकों की शिनाख्त कर ली गई है। मृतक युवक की पहचान सुरेंद्र उर्फ सुंदरलाल (50 वर्ष) पुत्र धन्नाराम मेघवाल (निवासी— कीतासर बिदावतान, श्रीडूंगरगढ़) के रूप में हुई है। वहीं, मृतका की पहचान कालीदेवी पत्नी कोजूराम मेघवाल (निवासी— बंडूआ, थाना राजलदेसर, चूरू) के रूप में हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों मृतक विवाहित थे और महिला चार बच्चों की मां थी। बताया जा रहा है कि महिला का परिवार मृतक युवक सुंदरलाल के खेत में ही काश्तकारी (खेतीबाड़ी) का काम करता था, जिसके चलते दोनों एक-दूसरे के संपर्क में आए थे।
बोलेरो गाड़ी में पहुंचे थे घटनास्थल, रात 2 से 4 बजे के बीच हुआ हादसा
प्रारंभिक जांच और साक्ष्यों के अनुसार, दोनों मृतक अपने निवास स्थान से करीब 60 किलोमीटर दूर एक बोलेरो गाड़ी में सवार होकर लिखमीसर दिखनादा की रोही पहुंचे थे। उन्होंने सड़क किनारे गाड़ी खड़ी की और सामने स्थित खेजड़ी के पेड़ पर फंदा लगा लिया। मौके पर खड़ी बोलेरो गाड़ी से पुलिस को दोनों के मोबाइल फोन, शराब की एक खाली बोतल और करीब 20 लीटर का डीजल से भरा एक जरीकन बरामद हुआ है।
घटनास्थल के ठीक सामने एक गौशाला स्थित है, जहां बीती रात धार्मिक सत्संग होने के कारण देर रात तक लोगों की चहल-पहल थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों रात करीब 2 बजे से 4 बजे के बीच मौके पर पहुंचे और सन्नाटा देखकर यह आत्मघाती कदम उठा लिया। प्रथमदृष्टया पुलिस और ग्रामीण इसे प्रेम-प्रसंग का मामला मान रहे हैं।
सूचना के 5 घंटे बाद पहुंचे अधिकारी, धूप में लटके रहे शव; ग्रामीणों ने कोसा
इस दुखद घटना के बीच पुलिस प्रशासन की बड़ी लापरवाही और असंवेदनशीलता उजागर हुई है। सुबह करीब 5:00 बजे एक खेत काश्तकार ने दोनों शवों को लटके हुए देखा और तुरंत गौशाला के सेवादारों, ग्रामीणों सहित पुलिस को सूचना दी। बीट कांस्टेबल तो मौके पर तुरंत पहुंच गए, लेकिन वे सेरूणा थाने के उच्चाधिकारियों और थाना प्रभारी के आने के इंतजार में शवों को बिना उतारे खड़े रहे।
घटनास्थल से सेरूणा थाने की दूरी महज 25 किलोमीटर है, लेकिन इस दूरी को तय करने में सेरूणा थाना प्रभारी संध्या बिश्नोई और सक्षम अधिकारियों को 4 घंटे से अधिक का समय लग गया। पुलिस अधिकारी सुबह करीब 9:30 बजे मौके पर पहुंचे। तब तक भीषण धूप के बीच करीब 5 घंटे तक दोनों शव पेड़ से ही लटके रहे। पुलिस की इस कदर लेटलतीफी को देखकर मौके पर मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने पुलिस तंत्र को जमकर कोसा।
श्रद्धालु और बच्चे हुए भयाक्रांत
ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि घटनास्थल के ठीक सामने स्थित गौशाला में इन दिनों पवित्र श्रीमद्भागवत कथा चल रही है। इसके चलते रोजाना सुबह-सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और बच्चे वहां सुबह की प्रार्थना और मंदिर की परिक्रमा करने आते हैं। सुबह आए श्रद्धालुओं और छोटे बच्चों ने जब अचानक पेड़ से लटके दो शवों को देखा, तो वे बुरी तरह सहम और भयाक्रांत हो गए। इस दौरान राहगीरों द्वारा शवों के फोटो-वीडियो बनाने से भी माहौल खराब होता रहा, जिसे पुलिस समय पर आकर रोक सकती थी। फिलहाल पुलिस ने शवों को नीचे उतरवाकर मोर्चरी भिजवाया है और मामले की जांच शुरू की है।

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