— नियामक के निशाने पर दिग्गज कंपनियां: रेड बुल, पेप्सिको (स्टिंग, एड्रेनालिन रश), रिलायंस (कैंपा एनर्जी) और कोका-कोला (मॉन्स्टर) को नोटिस।
— 'एनर्जी ड्रिंक' नाम की कोई श्रेणी ही नहीं: FSSAI का बड़ा खुलासा— नियमों के तहत ऐसी कोई खाद्य श्रेणी निर्धारित नहीं, पैकेजिंग पर इस शब्द का इस्तेमाल भ्रामक।
— दावों पर कानूनी आपत्ति: 'दिमाग सक्रिय बनाने' और 'फोकस बढ़ाने' जैसे विज्ञापनों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2006 का सीधा उल्लंघन माना।
— सोशल मीडिया पर किया सार्वजनिक: इंस्टाग्राम और एक्स (ट्विटर) के जरिए FSSAI ने उपभोक्ताओं को किया जागरूक; कंपनियों की प्रतिक्रिया का इंतजार।
FSSAI has issued notices to several beverage brands claiming to be ‘energy drinks’ for misbranding and misleading claims.#FSSAINotice #MisleadingClaims pic.twitter.com/CdbMMcf8KH
— FSSAI (@fssaiindia) July 3, 2026
नई दिल्ली/बीकानेर, 6 जुलाई (सोमवार)। देश के खाद्य सुरक्षा नियामक, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बाजार में 'एनर्जी ड्रिंक' के नाम से बेचे जा रहे पेय पदार्थों और उनके भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ एक बहुत बड़ी और सख्त कार्रवाई शुरू की है। FSSAI ने देश में सबसे ज्यादा बिकने वाले छह प्रमुख ब्रांड्स को उनके पैकेट, लेबलिंग और भ्रामक प्रचार दावों को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नियामक का साफ कहना है कि ये कंपनियां ऐसे दावे कर रही हैं जो मौजूदा खाद्य सुरक्षा नियमों के दायरे में पूरी तरह अवैध हैं।
इन 6 बड़े वैश्विक और भारतीय ब्रांड्स को मिला नोटिस
FSSAI ने जिन छह प्रमुख कंपनियों और उनके ब्रांड्स को कटघरे में खड़ा करते हुए नोटिस थमाया है, उनकी सूची इस प्रकार है:
- रेड बुल (Red Bull) एनर्जी ड्रिंक
- स्टिंग (Sting) एनर्जी ड्रिंक (पेप्सिको)
- एड्रेनालिन रश (Adrenaline Rush) एनर्जी ड्रिंक (पेप्सिको)
- कैंपा एनर्जी ड्रिंक गोल्ड बूस्ट (Campa Energy) (रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स)
- मॉन्स्टर एनर्जी (Monster Energy) (कोका-कोला समर्थित)
- हेल एनर्जी (Hell Energy)
नियमों में 'एनर्जी ड्रिंक' जैसा कोई शब्द ही नहीं, लेबलिंग पर आपत्ति
FSSAI ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया हैंडल पर इस कार्रवाई को सार्वजनिक करते हुए एक बेहद चौंकाने वाला तकनीकी बिंदु स्पष्ट किया है। नियामक के अनुसार, मौजूदा भारतीय खाद्य नियमों के तहत 'एनर्जी ड्रिंक' (Energy Drink) नाम की कोई अलग या विशेष खाद्य श्रेणी (Food Category) निर्धारित ही नहीं की गई है।
इसके बावजूद ये छह कंपनियां अपने प्रॉडक्ट्स की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मुख्य लेबल पर धड़ल्ले से 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द का इस्तेमाल कर रही हैं। FSSAI का कहना है कि फूड कैटिगरी सिस्टम का उद्देश्य केवल सरकारी स्तर पर उत्पादों का वर्गीकरण करना है, कंपनियां इसका उपयोग व्यावसायिक लाभ के लिए ग्राहकों को भ्रमित करने वाले नामकरण या ब्रांडिंग के रूप में नहीं कर सकती हैं।
'दिमाग सक्रिय करने' और 'फोकस बढ़ाने' जैसे दावों पर कानूनी डंडा
नियामक ने इन पेय पदार्थों के विज्ञापनों और टीवी-सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को पूरी तरह भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना माना है। FSSAI ने विशेष रूप से निम्नलिखित दावों को रेखांकित करते हुए आपत्ति जताई है:
- "यह पेय शरीर और दिमाग को तुरंत सक्रिय बनाता है।"
- "काम या पढ़ाई में फोकस और एकाग्रता बढ़ाता है।"
- "शरीर में ऊर्जा (Energy Level) का स्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ाता है।"
- "सामान्य शारीरिक कमजोरी को दूर करने में मदद करता है।"
नियामक के अनुसार, किसी भी सामान्य खाद्य या पेय उत्पाद के लिए ऐसे औषधीय या चमत्कारी दावे करना खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और विज्ञापनों से जुड़े कड़े नियमों का सीधा उल्लंघन है। इसके लिए कंपनियों पर भारी वित्तीय जुर्माना और भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाई जा सकती है। हालांकि, इस नोटिस के सार्वजनिक होने के बाद भी समाचार लिखे जाने तक इन छह दिग्गज कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सोशल मीडिया पर FSSAI ने तेज किया 'नेम एंड शेम' अभियान
पिछले कुछ महीनों से FSSAI ने भ्रामक विज्ञापनों, गलत लेबलिंग और पैकेजिंग के पीछे सच छिपाने वाली कंपनियों के खिलाफ अपनी जांच और प्रवर्तन (Enforcement) की कार्रवाई को बेहद आक्रामक कर दिया है। उपभोक्ताओं की ओर से लगातार मिल रही ऑनलाइन शिकायतों के बाद नियामक अब ऐसी कॉर्पोरेट कार्यवाहियों को सीधे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (विशेषकर इंस्टाग्राम और एक्स) पर साझा कर रहा है। FSSAI का मुख्य उद्देश्य खाद्य कारोबार से जुड़े बड़े घरानों को भारतीय कानूनों का सम्मान करने के लिए मजबूर करना और देश के आम उपभोक्ताओं तक शुद्ध व सही जानकारी पहुंचाना है।

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