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बीकानेर की अनूठी 'वसीयत': 132 साल से निभा रहे रीत; सावे में जरूरतमंद बेटियों का 'मामेरा' भरता है ये परिवार

India-1stNews



– दादा का आदेश, पिता की सीख: वसीयत में लिखा था- 'बेटियों की मदद करना'; रामगोपाल बिन्नाणी निभा रहे पीढ़ियों पुराना वचन

– सर्वसमाज की सेवा: 31 जनवरी और 1 फरवरी को दिया जाएगा सामान; "देने वाला भी राम, लेने वाला भी राम" के भाव से होती है सेवा

बीकानेर, 18 जनवरी (रविवार)।अक्सर आपने सुना होगा कि वसीयत (Will) जायदाद और पैसों के बंटवारे के लिए लिखी जाती है ताकि परिवार में विवाद न हो। लेकिन, बीकानेर के बिन्नाणी चौक निवासी एक परिवार ने वसीयत की परिभाषा ही बदल दी है। यहाँ बुजुर्गों ने अपनी वसीयत में दौलत नहीं, बल्कि 'जरूरतमंद कन्याओं की सेवा' की जिम्मेदारी बांटी है।

​हम बात कर रहे हैं रामगोपाल बिन्नाणी के परिवार की, जो पिछले 132 वर्षों से पुष्करणा सावे और विवाह समारोहों के दौरान जरूरतमंद बेटियों को सामान देकर एक अनोखी परंपरा निभा रहे हैं।

दादा का आदेश, पिता की वसीयत

​रामगोपाल बिन्नाणी बताते हैं कि यह परंपरा उनके दादा स्व. मेघराज बिन्नाणी ने शुरू की थी।

  • विरासत: दादा के आदेश पर पिता स्व. बुलाकी दास बिन्नाणी ने अपनी वसीयत में अपने तीन पुत्रों को अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक कार्य सौंपे।
  • जिम्मेदारी: इसमें पुत्र रामगोपाल को विशेष रूप से जिम्मेदारी दी गई कि वे पुष्करणा सामूहिक विवाह समारोह (सावे) के दौरान जरूरतमंद कन्याओं को घर-गृहस्थी का सामान देकर मदद करेंगे। आज रामगोपाल अपने परिजनों के साथ पूरी शिद्दत से इस वचन को निभा रहे हैं।

सिर्फ एक समाज नहीं, 'सर्वसमाज' की बेटियां

​बिन्नाणी का कहना है कि वे "देने वाले श्रीभगवान-लेने वाले श्रीभगवान" के भाव से सेवा करते हैं।

  • क्या मिलता है: कन्याओं को आभूषण, खाद्य सामग्री और बर्तन सहित गृहस्थी का जरूरी सामान दिया जाता है।
  • दायरा: यह मदद केवल पुष्करणा समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि सर्वसमाज की जरूरतमंद कन्याओं को यह सामग्री दी जाती है। इसके अलावा सालभर भी अगर कोई जरूरतमंद परिवार आता है, तो उसे खाली हाथ नहीं लौटाया जाता।

31 जनवरी और 1 फरवरी को बंटेगा सामान

​आगामी सावे को देखते हुए तैयारियां शुरू हो गई हैं।

  • तारीख: इस बार 31 जनवरी और 1 फरवरी को सामान वितरित किया जाएगा।
  • रजिस्ट्रेशन: इसके लिए एक रजिस्टर में पंजीयन किया जा रहा है। मदद पाने के लिए विवाह का कार्ड (कुंकु पत्री) और कन्या व उसके माता-पिता के आधार कार्ड पहले जमा करवाने होंगे। सामान विवाह से करीब 10 दिन पहले दिया जाता है।

मित्र मंडली बनी संबल

​इस पुनीत कार्य में रामगोपाल बिन्नाणी अकेले नहीं हैं। उनकी एक पूरी टीम दिन-रात सेवा में जुटी है।

  • सेवादार: किशन लोहिया, रामजी व्यास, गट्टू राठी, श्याम सुन्दर राठी, भरत मोहता, किशन सिंघी, शिवकुमार चांडक, केदार आचार्य, गोविन्द बिन्नाणी, निर्मल दम्माणी, हरिकिशन चांडक, देवकिशन लखोटिया, दर्श, विधि व किरण बिन्नाणी, भवानी शंकर पुरोहित और दिलीप जोशी का इस महायज्ञ में बड़ा सहयोग रहता है।

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