– हुनर को तकनीक का साथ: खुर्जा केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया- कैसे बनाएं टेराकोटा के बेहतर उत्पाद; समस्याओं का किया समाधान
– लाइव डेमो: तकनीकी सहायकों ने मौके पर बनाकर दिखाईं वस्तुएं; उद्यमियों और कारीगरों ने उत्साह से लिया भाग
बीकानेर/गंगाशहर, 8 जनवरी (गुरुवार)।बीकानेर में पॉटरी और टेराकोटा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सीएसआईआर-केंद्रीय कांच एवं सिरामिक अनुसंधान संस्थान (CSIR-CGCRI), खुर्जा केंद्र ने एक सराहनीय पहल की है। गंगाशहर स्थित चोपड़ा बाड़ी के सामुदायिक भवन (रामदेव जी मंदिर) में संस्थान द्वारा "टेराकोटा प्रसंस्करण और लक्षण वर्णन पर प्रशिक्षण और प्रदर्शन" विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत 6 जनवरी से हुई।
इस शिविर में टेराकोटा और पॉटरी उद्योग से जुड़े स्थानीय उद्यमियों और कारीगरों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और नई तकनीकें सीखीं।
वैज्ञानिक डॉ. सावन कुमार ने दी बारीकियों की जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम में CSIR-CGCRI, खुर्जा केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सावन कुमार शर्मा ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
- प्रक्रिया: उन्होंने टेराकोटा वस्तुओं को बनाने की वैज्ञानिक प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया।
- समाधान: उत्पादों को बनाने में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं (जैसे टूटना, फिनिशिंग आदि) को बहुत ही बारीकी से समझाया और उनके समाधान बताए।
प्रैक्टिकल: मौके पर बनाकर दिखाईं वस्तुएं
सिर्फ थ्योरी ही नहीं, बल्कि कारीगरों को प्रैक्टिकल नॉलेज भी दी गई।
- संस्थान के तकनीकी सहायक श्री पिन्टू कुमार और वरिष्ठ तकनीशियन श्री अनुराग सिंह ने प्रशिक्षणार्थियों के सामने खुद टेराकोटा की वस्तुएं बनाकर दिखाईं और लाइव डेमो दिया।
स्थानीय सहयोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में स्थानीय संयोजकों की अहम भूमिका रही। श्री विश्वनाथ जाजड़ा, श्री अशोक कुमार छींपा और श्री अजय कुमार ओझा ने कार्यक्रम संयोजक के रूप में कार्य किया और व्यवस्थाएं संभालीं।
गौरतलब है कि CSIR-CGCRI समय-समय पर पॉटरी उद्योगों (टेराकोटा, व्हाइट वेयर, बोन चाइना) के उत्थान के लिए ऐसे प्रशिक्षण आयोजित करता रहता है।



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