– खौफनाक साजिश: मुंबई साइबर सेल का अधिकारी बन रिटायर्ड VLDA को डराया; आतंकी फंडिंग का भय दिखाकर 4 दिन में हड़पे लाखों रुपये
– बीकानेर से गिरफ्तारी: आरोपी वेदप्रकाश छगानी को पुलिस ने धरदबोचा; कोर्ट ने भेजा जेल, दो साथी पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार
बीकानेर/फतेहाबाद, 13 फरवरी (शुक्रवार)।आजकल देश भर में पैर पसार रहे 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए ठगी करने वाले गिरोह के तार बीकानेर से जुड़े मिले हैं। हरियाणा की फतेहाबाद साइबर थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बीकानेर के लाखोटियों का चौक निवासी वेदप्रकाश छगानी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर एक रिटायर्ड अधिकारी को पुलिस और सीबीआई का डर दिखाकर लाखों रुपये ऐंठने का संगीन आरोप है।
खुद को बताया मुंबई साइबर सेल का अधिकारी
साइबर थाना प्रभारी राहुल देव ने बताया कि हरियाणा के भूना (वार्ड 10) निवासी लेखराज, जो वीएलडीए (VLDA) पद से सेवानिवृत्त हैं, ने इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई थी। 6 नवंबर 2025 को लेखराज के पास एक वॉट्सऐप कॉल आई। कॉलर ने खुद को मुंबई साइबर सेल का अधिकारी बताया।ठग ने पीड़ित को डराया कि उनके आधार कार्ड पर एक फर्जी खाता खुला है, जिसका इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में किया जा रहा है। आरोपियों ने आरबीआई (RBI) के नाम से फर्जी लेटर भी भेजे ताकि पीड़ित को पूरी बात सच लगे।
13 लाख रुपये कराए ट्रांसफर
पुलिस कार्रवाई और जेल जाने के डर से पीड़ित लेखराज पूरी तरह घबरा गए। बदमाशों ने 'केस रफा-दफा' करने और जांच के नाम पर पैसे की मांग की।
आरटीजीएस/एनईएफटी: पीड़ित ने 7 से 11 नवंबर के बीच अलग-अलग खातों में कुल 13 लाख 5 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब आरोपी और पैसों की मांग करने लगे, तब लेखराज को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई।
बीकानेर में दबिश और गिरफ्तारी
फतेहाबाद साइबर पुलिस ने ट्रांजेक्शन ट्रेल और तकनीकी जांच के आधार पर बीकानेर में दबिश दी। पुलिस ने यहाँ से मुख्य आरोपी वेदप्रकाश छगानी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, इस मामले में दो आरोपी पहले ही पकड़े जा चुके हैं। बीकानेर से गिरफ्तार वेदप्रकाश को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया गया है।
सावधान रहें: 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि पुलिस, सीबीआई या आरबीआई कभी भी वॉट्सऐप कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। यदि कोई आपको आतंकी गतिविधियों या फर्जी खातों के नाम पर डराए, तो तुरंत नजदीकी थाने या 1930 साइबर हेल्पलाइन पर सूचना दें।

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