– सातवां दिन: क्रमिक अनशन पर बैठे 150 नए पर्यावरण प्रेमी; जयपुर में देर रात तक चली 11 सदस्यीय संत मंडल और मुख्यमंत्री की बैठक
– आक्रोश बरकरार: राज्य मंत्री के आश्वासन के बाद भी नहीं रुकी खेजड़ी की कटाई; संयोजक परसराम बिश्नोई बोले- 'संतों के आने पर तय होगी आगे की रणनीति'
बीकानेर, 9 फरवरी (सोमवार)। बीकानेर में खेजड़ी संरक्षण को लेकर चल रहा महापड़ाव सातवें दिन और अधिक प्रखर हो गया है। सोमवार को महापड़ाव स्थल से भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में बुजुर्ग महिलाओं ने मंगल गीत गाते हुए शिरकत की। इसी बीच, जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ संतों की महत्वपूर्ण वार्ता संपन्न हुई है, जिसके बाद आज संतों का दल बीकानेर पहुंचेगा।
कलश यात्रा में दिखा समाज का अटूट विश्वास
कलश यात्रा के दौरान बीकानेर की सड़कों पर आस्था और संकल्प का अनूठा संगम दिखा।
- चर्चा का विषय: यात्रा में शामिल एक महिला करीब 35 तोला सोना (52 लाख रुपये की ज्वेलरी) पहनकर पहुंची। जब उनसे सुरक्षा को लेकर पूछा गया तो उन्होंने बड़े गर्व से कहा— "जब पूरा समाज और संत हमारे साथ हैं, तो हमें किस बात का डर?" यह बयान आंदोलन के प्रति समाज के अटूट भरोसे को दर्शाता है।
जयपुर में गतिरोध टूटने की उम्मीद
आंदोलनकारियों और सरकार के बीच बनी खाई को पाटने के लिए मुख्यमंत्री ने 11 सदस्यीय संत मंडल को जयपुर बुलाया था। मुकाम पीठाधीश्वर स्वामी रामानंद महाराज सहित 11 प्रमुख संतों ने देर रात तक मुख्यमंत्री से संवाद किया। मुख्यमंत्री ने खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून बनाने और संतों की मंशा के अनुरूप कार्य करने का भरोसा दिया है। संतों के आज बीकानेर पहुँचने के बाद महापड़ाव की आगामी दिशा तय होगी।
कटाई जारी रहने से नाराजगी, 150 लोग अनशन पर
आंदोलन के संयोजक परसराम बिश्नोई ने बताया कि प्रशासन की सुस्ती के कारण गांवों में अभी भी खेजड़ी कटाई के मामले सामने आ रहे हैं। सरकार पर दबाव बनाए रखने के लिए सोमवार को भी 150 पर्यावरण प्रेमी क्रमिक अनशन पर बैठ गए हैं। बिश्नोई ने कहा कि राज्य मंत्री केके बिश्नोई के आश्वासन के बावजूद अगर कटाई नहीं रुक रही है, तो यह प्रशासन की विफलता है। इसी कारण महापड़ाव तब तक जारी रहेगा जब तक धरातल पर बदलाव न दिखे।

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