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बीकानेर खेजड़ी आंदोलन में 'गैंगस्टर' की एंट्री? रोहित गोदारा के नाम से पोस्ट वायरल; सरकार को दी चेतावनी— 'मांगें नहीं मानी तो लगा देंगे प्रदेश में कर्फ्यू'

India-1stNews



– सनसनीखेज मोड: सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट ने बढ़ाई प्रशासन की धड़कनें; आंदोलनकारियों को समर्थन के साथ सरकार को सीधी चुनौती

– पोस्ट का मजमून: 'मिट्टी की लाज बचाने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे'; संतों और मातृशक्ति के संघर्ष को बताया अपना संघर्ष

बीकानेर, 11 फरवरी (बुधवार)। बीकानेर में पिछले दस दिनों से जारी खेजड़ी बचाओ आंदोलन अब केवल पर्यावरण प्रेमियों के महापड़ाव तक सीमित नहीं रहा है। सोशल मीडिया पर एक कथित पोस्ट ने पूरे प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। गैंगस्टर रोहित गोदारा के नाम से वायरल हो रही एक पोस्ट में न केवल आंदोलन का समर्थन किया गया है, बल्कि राजस्थान सरकार को बेहद तीखे लहजे में चेतावनी भी दी गई है।

सरकार को 'कर्फ्यू' जैसी स्थिति की चेतावनी

​वायरल पोस्ट में रोहित गोदारा के हवाले से लिखा गया है कि वह बीकानेर में खेजड़ी कटाई रोकने के लिए धरने पर बैठे विश्नोई समाज के संतों, मातृशक्ति और युवाओं के साथ पूरी तरह खड़ा है। पोस्ट में सबसे गंभीर बात सरकार को दी गई चेतावनी है। इसमें लिखा गया है कि यदि सरकार ने समाज की मांगें नहीं मानीं, तो वे प्रदेश में कर्फ्यू जैसी स्थिति पैदा कर देंगे। गोदारा ने लिखा कि वह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं है, लेकिन उसका पूर्ण समर्थन आंदोलनकारियों के साथ है और देश की मिट्टी व पर्यावरण की रक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

प्रशासन सतर्क, पोस्ट की प्रमाणिकता पर सवाल

​सोशल मीडिया पर यह पोस्ट जंगल की आग की तरह फैल रही है। हालांकि, 'India First News' वायरल हो रही इस पोस्ट की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। पोस्ट सामने आने के बाद बीकानेर पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। यह जांच की जा रही है कि क्या यह पोस्ट वास्तव में गोदारा के हैंडल से की गई है या किसी ने माहौल बिगाड़ने के लिए फर्जी आईडी का इस्तेमाल किया है।

आंदोलन को मिल रहा है भारी जनसमर्थन

​गौरतलब है कि विश्नोई समाज खेजड़ी कटाई को रोकने के लिए कड़े कानून की मांग को लेकर लगातार महापड़ाव पर है। आज ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संतों से मुलाकात कर कानून बनाने का भरोसा दिलाया है। ऐसे में इस तरह की पोस्ट का सामने आना आंदोलन के स्वरूप को और अधिक चर्चाओं में ले आया है।


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