– सनसनीखेज खुलासा: बेटी के साथ 'आपत्तिजनक' हालत में देखने पर भड़का था चचेरा भाई जगदीश; छोटे भाई रामकुमार के साथ मिलकर रची साजिश।
– शातिर कातिल: वारदात के बाद सबूत मिटाने की कोशिश की और गांव में ही रहे; पुलिस को गुमराह करने के लिए मृतक की अंतिम यात्रा में भी हुए शरीक।
– वैज्ञानिक साक्ष्य: FSL और MOB टीम ने मौके से जुटाए थे अहम सुराग; नोखा सर्किल के चारों थानों की संयुक्त टीम को मिली बड़ी सफलता।
बीकानेर, 28 मार्च (शनिवार)।नोखा पुलिस ने रासीसर गांव के बहुचर्चित अनिल विश्नोई हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। रिश्ते में मृतक के चचेरे भाई लगने वाले इन आरोपियों ने 'ऑनर किलिंग' के चलते इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया था। शनिवार सुबह दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा।
क्यों और कैसे दी वारदात को अंजाम?
सीआई नोखा अरविन्द भारद्वाज ने बताया कि मुख्य आरोपी जगदीश विश्नोई ने कुछ समय पहले अनिल को अपनी बेटी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। इसी बात का बदला लेने के लिए उसने अपने भाई रामकुमार के साथ मिलकर अनिल को ठिकाने लगाने का प्लान बनाया। सोमवार की दोपहर, जब अनिल घर में अकेला था, दोनों चुपचाप अंदर घुसे और कस्सी (फावड़ा) से अंधाधुंध वार कर उसकी हत्या कर दी।
सबूत मिटाने और गुमराह करने की कोशिश
हत्या के बाद आरोपियों ने मौके से खून साफ करने और साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। शातिर इतने थे कि वारदात के बाद कहीं भागे नहीं, बल्कि गांव में ही रहे ताकि किसी को शक न हो। हद तो तब हो गई जब दोनों आरोपी मृतक अनिल के अंतिम संस्कार में भी शामिल हुए और शोक जताते रहे।
पुलिस की पैनी नजर और तकनीकी जांच
मामला 'ब्लाइंड मर्डर' होने के कारण पुलिस के लिए बड़ी चुनौती था। एसपी मृदुल कच्छावा के निर्देश पर नोखा, जसरासर, देशनोक और पांचू थाने की टीमों ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया। एफएसएल (FSL) की टीम ने घटनास्थल से कुछ ऐसे सूक्ष्म साक्ष्य जुटाए जिससे शक की सुई चचेरे भाइयों पर टिक गई। कड़ी पूछताछ में दोनों टूट गए और अपना जुर्म कबूल कर लिया।

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