— सिस्टम पर उठे बड़े सवाल: संदिग्ध ड्रग रिएक्शन से किडनी फेल होने के मामले में दूसरी प्रसूता की मौत; 20 दिनों से वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी शारदा।
— लगातार गिर रही थीं प्लेटलेट्स: शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर शनिवार को डॉक्टरों ने गले में नली डालकर दिया था अतिरिक्त सपोर्ट, रविवार शाम करीब 6 बजे थमीं सांसें।
— आंकड़े बयां कर रहे खौफनाक हकीकत: बीकानेर जिले में पिछले 5 साल में 254 प्रसूताओं ने प्रसव के बाद गंवाई जान; इस साल अब तक 14 मौतें दर्ज।
बीकानेर, 21 जून (रविवार)। बीकानेर संभाग के सबसे बड़े पीबीएम राजकीय अस्पताल के गायनी वॉर्ड और आईसीयू से इस वक्त की बेहद दुखद और पूरे चिकित्सा सिस्टम को हिला देने वाली बड़ी खबर सामने आई है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद संदिग्ध दवा के प्रभाव (ड्रग रिएक्शन) से एक-एक कर 6 प्रसूताओं की किडनी फेल होने के बहुचर्चित मामले में रविवार शाम को एक और गंभीर प्रसूता ने दम तोड़ दिया।
अस्पताल के पोस्ट कोविड आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर पिछले कई दिनों से जिंदगी और मौत के बीच झूल रही 26 वर्षीय प्रसूता शारदा की रविवार शाम करीब 6:00 बजे इलाज के दौरान मौत हो गई। इससे पहले इसी प्रकरण में सूरतगढ़ निवासी 20 वर्षीय प्रसूता प्रीति नायक की मौत हो चुकी है। शारदा की मौत के बाद इस पूरे मामले में जान गंवाने वाली प्रसूताओं की संख्या बढ़कर अब दो हो गई है, जिससे पीड़ित परिवारों में कोहराम मच गया है।
ऑक्सीजन का स्तर गिरा और प्लेटलेट्स हुईं कम, डॉक्टरों के प्रयास रहे बेअसर
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, प्रसव (डिलीवरी) के बाद से ही शारदा की हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी और उसे आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया था।
- तबीयत बिगड़ने पर दी थी नली: डॉक्टरों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से शारदा की प्लेटलेट्स लगातार गिर रही थीं और उसके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर भी खतरनाक स्तर तक कम हो गया था। शनिवार को जब उसकी स्थिति बेहद नाजुक हुई, तो डॉक्टरों ने आपातकालीन कदम उठाते हुए उसके गले में नली (ट्रैकीओस्टॉमी ट्यूब) डालकर अतिरिक्त ऑक्सीजन सपोर्ट दिया था।
- शाम को थमीं सांसें: इन तमाम विशेषज्ञ प्रयासों के बावजूद शारदा के शरीर में कोई अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और रविवार शाम को आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। इस मौत के बाद मृतका के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और अस्पताल परिसर में सुरक्षा को देखते हुए मुस्तैदी बढ़ा दी गई है।
बाजार से मंगवाए इंजेक्शन पर सुई, परिजनों ने मांगी निष्पक्ष जांच
गौरतलब है कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों से पीबीएम अस्पताल रेफर की गईं इन 6 प्रसूताओं की किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंग प्रभावित होने को लेकर राज्य सरकार द्वारा गठित कमेटियां पहले से ही जांच कर रही हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई थी कि डिलीवरी के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग रोकने के लिए बाजार से मंगवाए गए 'ऑक्सीटोसिन' इंजेक्शन के रिएक्शन के कारण इन महिलाओं का यूरिन आउटपुट शून्य हो गया था।
पहली मृतका प्रीति भी करीब 20 दिनों तक वेंटिलेटर पर रही थी और उसके लिवर व किडनी पूरी तरह डैमेज हो गए थे। अब शारदा की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन के दावों पर सवाल और गहरे हो गए हैं। जहां एक ओर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों की जान बचाने के लिए हरसंभव क्लिनिकल प्रयास किए गए, वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिजन इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।
फैक्ट फाइल: बीकानेर में प्रसूता मौतों का चौंकाने वाला सरकारी आंकड़ा
पीबीएम अस्पताल में हुआ यह हादसा कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़े बीकानेर संभाग में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality) की बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं:
- 5 साल का रिकॉर्ड: बीकानेर जिले में पिछले 5 वर्षों के दौरान प्रसव के बाद विभिन्न जटिलताओं के कारण कुल 254 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है।
- पिछले वर्ष का आंकड़ा: अकेले पिछले साल जिले में 39 प्रसूताओं ने इलाज या प्रसव के दौरान दम तोड़ा था।
- इस साल की स्थिति: साल 2026 के शुरुआती साढ़े पांच महीनों के भीतर ही अब तक 14 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है, जो ग्रामीण इलाकों में समय पर इलाज न मिलने और रैफरल सिस्टम की खामियों को उजागर करता है।

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