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गंगाशहर: यश ओझा हत्याकांड में अदालत का ऐतिहासिक फैसला: 2 आरोपियों को सुनाई उम्रकैद; गर्लफ्रेंड विवाद में चाय की दुकान पर सरेराह मारा था चाकू

India-1stNews



​— इंसाफ की जीत: बीकानेर के बहुचर्चित मर्डर केस में कोर्ट ने माना आरोपियों का जुर्म; आजीवन कारावास के साथ भारी जुर्माने से किया दंडित।

पवनपुरी चाय की दुकान पर हुआ था खून: नाबालिग दोस्त की गर्लफ्रेंड को मैसेज करने के विवाद में बुलाई थी पंचायत; कहासुनी के बाद गर्दन पर किए थे ताबड़तोड़ वार।

CCTV और गवाहों ने दिलाई सजा: अधिवक्ता सुरेंद्रपाल शर्मा और भैरूमल शर्मा की मजबूत पैरवी से मुकाम तक पहुंची यश की लड़ाई; एक नाबालिग आरोपी का मामला बाल न्याय बोर्ड में लंबित।

बीकानेर, 7 जून (रविवार)। बीकानेर के सबसे सनसनीखेज और चर्चित यश ओझा हत्याकांड में आखिरकार पीड़ित परिवार को न्याय मिल गया है। बीकानेर की प्रतिष्ठित अदालत के न्यायाधीश अश्वनी विज ने मामले की अंतिम विधिक सुनवाई पूरी करते हुए दो मुख्य आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया है। अदालत ने सरेराह चाकू मारकर एक उभरती जिंदगी को खत्म करने वाले दोनों अपराधियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) तथा भारी आर्थिक जुर्माने की सजा से दंडित किया है।

​इस बहुप्रतीक्षित फैसले के बाद मृतक के परिजनों ने न्यायपालिका के प्रति आभार जताया है।

क्या था पूरा मामला? गर्लफ्रेंड को मैसेज करने पर बढ़ा था विवाद

​अभियोजन पक्ष और पुलिस चार्जशीट के अनुसार, यह पूरा खूनी खेल एक लड़की (गर्लफ्रैंड) को लगातार मैसेज भेजने और मानसिक रूप से परेशान करने के उपजे विवाद के बाद शुरू हुआ था।

  • तनाव की शुरुआत: गंगाशहर निवासी मृतक यश ओझा की गर्लफ्रेंड को एक नाबालिग युवक पिछले काफी समय से लगातार सोशल मीडिया और मोबाइल पर मैसेज भेज रहा था। इस बात को लेकर यश और उस गुट के बीच पिछले कई दिनों से भारी तनाव और मनमुटाव चल रहा था।
  • चाय की दुकान पर बुलाई पंचायत: गत दिनों इसी आपसी विवाद को पूरी तरह सुलझाने और आपस में समझौता करने के उद्देश्य से दोनों पक्षों ने पवनपुरी (पंडरपुरी) क्षेत्र में स्थित एक प्रसिद्ध चाय की थड़ी/दुकान पर एक-दूसरे को मिलने के लिए बुलाया था।

कहासुनी के बाद निकाला चाकू, गर्दन पर वार कर मौके पर ही ले ली जान

​चाय की दुकान पर दोनों पक्षों के युवक आमने-सामने बैठे। बातचीत के दौरान ही दोनों पक्षों में तकरार बढ़ गई और गाली-गलौज शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना हिंसक हो गया कि आरोपियों ने कानून को ताक पर रखकर अपने पास छिपाकर रखे धारदार चाकू निकाल लिए।

​आरोपियों ने निहत्थे यश ओझा पर पूरी ताकत से ताबड़तोड़ वार करना शुरू कर दिया। हमले के दौरान एक गहरा और कातिलाना वार यश की गर्दन (Throat) पर लगा, जिससे उसकी श्वास नली कट गई और अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसकी मौके पर ही तड़प-तड़प कर दर्दनाक मौत हो गई। इस सरेराह मर्डर से पूरे पवनपुरी और गंगाशहर इलाके में सनसनी फैल गई थी।

तीसरी आंख और गवाहों ने खोला राज, वकीलों की मजबूत पैरवी

​वारदात के बाद बीकानेर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चाय की दुकान और आस-पास के मार्गों पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज को अपने कब्जे में लिया था। फुटेज में आरोपियों की साफ शिनाख्त हुई। पुलिस ने चश्मदीद गवाहों के विधिक बयानों और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट में पुख्ता चालान पेश किया। इस मामले में शामिल एक नाबालिग आरोपी की पत्रावली को अलग कर उसे बाल न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां उसकी प्रक्रिया चल रही है।

​अदालत में लंबी और विस्तृत कानूनी बहस के दौरान मृतक यश ओझा के पक्ष से प्रसिद्ध अधिवक्ता सुरेंद्रपाल शर्मा एवं भैरूमल शर्मा ने मजबूत पैरवी की। उन्होंने आरोपियों के क्रूर कृत्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत के सामने इतनी सुदृढ़ता से रखा कि बचाव पक्ष के तमाम तर्क धरे के धरे रह गए। न्यायाधीश अश्वनी विज ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को न्यायसंगत और साक्ष्यों को पूरी तरह पर्याप्त मानते हुए दोनों बालिग आरोपियों को भादंसं की धारा 302 (हत्या) का दोषी ठहराते हुए ताउम्र जेल की सलाखों के पीछे रहने का विधिक फरमान सुना दिया।

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