— बदली का सीजन, मंत्रियों को टेंशन: विधायकों की लंबी सूचियों से मंत्रियों के छूटे पसीने; जयपुर में बीकानेर के संघनिष्ठ विधायक और मंत्री के बीच 'कोल्ड वार'।
— BDA से कुलराज की विदाई का संस्पेंस: सांसद सेवा केंद्र के चहेते अफसर का किसने निकाला कांटा? नगर विधायक के नाम पर चर्चाएं तेज, विधायक जी ने झाड़ा पल्ला।
— पीबीएम में 'भ्रष्टाचार के बाबू': एसपी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की मलाईदार सीटों पर सालों से जमे कार्मिकों पर अकूत काली कमाई के आरोप; उच्च स्तर तक पहुंची शिकायतें।
— भीड़ में 'बैड टच' से भड़कीं महिला नेता: प्रसूता आंदोलन के धरने-प्रदर्शन में धक्का-मुक्की से अपसेट हुईं नई नवेली नेत्री; सीनियर ने समझाया— "राजनीति में यह सब चलता है।"
बीकानेर, 25 जून (गुरुवार)। बीकानेर के राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों में इन दिनों तबादलों के ताजा सीजन और हालिया आंदोलनों को लेकर भीतर ही भीतर भारी उथल-पुथल मची हुई है। वरिष्ठ पत्रकार मुकेश पूनिया के विशेष इनपुट और खोजी डायरी के विश्लेषण से शहर की चार ऐसी बड़ी और चटपटी खबरें सामने आई हैं, जो सत्तापक्ष से लेकर विपक्ष तक के अंतर्विरोधों को उजागर करती हैं।
1. तबादलों का ताजा सीजन: विधायकों की लिस्टों ने बढ़ाई मंत्रियों की टेंशन
प्रदेश में चल रहे तबादलों के दौर में मंत्रियों और विधायकों के बीच तनातनी लगातार गहराती जा रही है। सचिवालय और गलियारों से छनकर आ रही खबरों के अनुसार, ज्यादातर मंत्रियों को अपने विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों के तबादलों में किसी भी बाहरी नेता या विधायक की दखलंदाजी कतई पसंद नहीं है। दूसरी ओर, अपनी साख बचाने के लिए विधायकों ने भी सिफारिशी लिस्टों की लंबाई बढ़ा रखी है, जिसने मंत्रियों का सिरदर्द बढ़ा दिया है।
इस गुपचुप खींचतान का एक दिलचस्प नजारा दो दिन पहले जयपुर में एक कैबिनेट मंत्री के सरकारी आवास पर देखने को मिला। बीकानेर क्षेत्र के एक संघनिष्ठ और रसूखदार विधायक अपने चहेते कर्मचारियों की लंबी ट्रांसफर लिस्ट लेकर मंत्री जी के बंगले पर पहुंचे थे। लेकिन मुलाकात के बाद जब वे बाहर निकले, तो उनके तेवर बेहद तल्ख और गर्माए हुए थे। हालांकि, मर्यादा के चलते उन्होंने मीडिया या सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके चेहरे के हाव-भाव और गुस्से ने साफ बता दिया कि मंत्री जी ने उन्हें तवज्जो (लिफ्ट) नहीं दी है। मजे की बात यह है कि इस सियासी एपिसोड के सूत्रधार मंत्री खुद भी पक्के संघनिष्ठ हैं, इसलिए मामला ज्यादा तूल नहीं पकड़ सका और फिलहाल सब खैरियत है।
2. बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA): कुलराज की विदाई को लेकर संस्पेंस बरकरार
बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) में कार्यरत प्रशासनिक अधिकारी कुलराज की अचानक हुई विदाई इन दिनों शहर के राजनेताओं के बीच चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है। कुलराज लंबे समय से बीकानेर के 'सांसद सेवा केंद्र' की गुड बुक (चहेतों की सूची) में शामिल थे और उनकी यहां मजबूत पकड़ मानी जाती थी। लेकिन पिछले दिनों राज्य सरकार द्वारा जारी की गई आरएएस (RAS) अधिकारियों की तबादला सूची में उनका नाम शामिल कर उन्हें बीकानेर से विबाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
कुलराज की इस विदाई का संस्पेंस अभी तक बना हुआ है क्योंकि वे सत्तारूढ़ पार्टी (भाजपा) के ही कई स्थानीय धड़ों और नेताओं को काफी समय से अखर रहे थे। बीकाणा की राजनीतिक शतरंज में यह कांटा चुपके से कौन निकाल गया, इसका पता बड़े-बड़े सूरमाओं को भी नहीं चला। राजनैतिक जानकारों का कहना है कि कुलराज की विदाई निश्चित रूप से किसी बेहद तगड़े और रसूखदार सियासी नेता की गुप्त सिफारिश पर ही हुई है, लेकिन उस बड़े नेता का नाम अभी तक पूरी तरह गोपनीय रखा गया है। इस सस्पेंस के बीच कई भाजपाई अंदर ही अंदर हमारे 'नगर विधायक' का नाम उछाल रहे हैं, जबकि विधायक जी इस पूरे मामले से साफ तौर पर पल्ला झाड़ रहे हैं। पर्दे के पीछे शह-मात का खेल जारी है, इसलिए फिलहाल सब खैरियत है।
3. मेडिकल कॉलेज और पीबीएम: मलाईदार पदों पर जमे ‘भ्रष्टाचार के बाबू’
बीकानेर के सरदार पटेल (SP) मेडिकल कॉलेज और पीबीएम अस्पताल के प्रशासनिक विंग में सालों से भ्रष्टाचार का एक मजबूत नेटवर्क पैर पसारे हुए है। अस्पताल और कॉलेज की मलाईदार सीटों और काउंटरों पर सालों से एक ही जगह जमे कुछ 'बाबू' इस पूरे कथित भ्रष्टाचार की मुख्य कड़ी बने हुए हैं। ठेकेदारों और दलालों के चहेते बन चुके इन बाबूओं के भ्रष्टाचारी रवैये, कमिशनखोरी और अनियमिताओं को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों और सतर्कता विभाग तक लिखित शिकायतें भेजी जा चुकी हैं।
हैरानी की बात यह है कि इतनी शिकायतों के बावजूद न तो आज तक इन रसूखदार बाबूओं का पटल (सीट) बदला गया, न इनका ट्रांसफर हुआ और न ही कोई विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई। अस्पताल के सूत्रों और जानकारों का कहना है कि अगर इन बाबुओं की संपत्तियों की जांच कर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा ‘आय से अधिक कमाई’ (DA Case) का शिकंजा कसा जाए, तो इनके गुप्त ठिकानों से काली कमाई की ‘अकूत धन संपदा’ और बेनामी संपत्ति बरामद हो सकती है। लेकिन रसूख की फाइलें भारी हैं, इसलिए फिलहाल सब खैरियत है।
4. आंदोलन की भीड़: 'बैड टच' से अपसेट हुईं नई महिला नेता!
पीबीएम अस्पताल में हाल ही में प्रसूताओं की मौत के मामले को लेकर सत्ता विरोधी पार्टी (विपक्ष) द्वारा किए जा रहे तीखे धरने-प्रदर्शनों और कलेक्ट्रेट मार्च की भीड़ के दौरान एक बेहद असहज कर देने वाला वाकया सामने आया है। आंदोलन की भारी भीड़ और नारेबाजी के बीच 'बैड टच' (गलत तरीके से धक्का-मुक्की) की वजह से विपक्ष की एक उभरती हुई महिला नेता जबरदस्त रूप से अपसेट (परेशान) हो गईं।
दरअसल, हाल ही में बीकानेर के सियासी अखाड़े और सार्वजनिक जीवन में उतरीं इस युवा महिला नेता को बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि राजनैतिक धरने-प्रदर्शनों और रैलियों की अनियंत्रित भीड़ में ऐसी अभद्रता या असहज स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं। ऐसे में उनका गुस्सा होना और रोना लाजमी था। वाकये के बाद पार्टी की एक बेहद अनुभवी और वरिष्ठ महिला नेत्री ने उन्हें एकांत में ले जाकर संभाला और ढांढस बंधाते हुए राजनैतिक गुरुमंत्र दिया। सीनियर लीडर ने समझाया कि— "यह राजनीति है, यहाँ सियासी आंदोलनों और रैलियों में ऐसी छोटी-मोटी धक्का-मुक्की और असहज स्थितियां चलती रहती हैं, इन्हें दिल से लगाने के बजाय मजबूत बनना पड़ता है।" अनुभवी नेता की इस व्यावहारिक बात को समझने के बाद युवा महिला नेता का मिजाज शांत हुआ और वे दोबारा आंदोलन में सक्रिय हुईं, इसलिए फिलहाल सब खैरियत है।

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