— गंगाशहर पुलिस पर लापरवाही के गंभीर आरोप: 16 जून से लापता विवाहिता को लखनऊ में ढूंढकर भी वहीं छोड़ आई पुलिस; कोर्ट की शरण में पहुंचे पीड़ित परिजन।
— गाजियाबाद की 'मायरा खान' के खतरनाक नेक्सस का शक: परिजनों का दावा— "दिल्ली में पति को झूठे केस में जेल भिजवा चुकी है गुलबहार; अब युवतियों को फंसाकर धर्म परिवर्तन कराने वाले गिरोह से जुड़ी।"
— एसपी मृदुल कच्छावा का बड़ा बयान: "मामला बेहद गंभीर और जांच का विषय; परिजनों के आरोपों के बाद एसडीएम (SDM) कोर्ट से वारंट जारी करवाकर दोनों को लाया जाएगा बीकानेर।"
बीकानेर/गंगाशहर, 24 जून (बुधवार)। बीकानेर के गंगाशहर थाना क्षेत्र से अपनी 5 वर्षीय मासूम बेटी को लेकर अचानक लापता हुई 32 वर्षीय एक विवाहिता के मामले ने अब एक बेहद संवेदनशील, सनसनीखेज और गंभीर मोड़ ले लिया है। पीड़ित परिवार और समाज ने इस पूरे प्रकरण के पीछे सोशल मीडिया के जरिए धर्मांतरण (धर्म परिवर्तन) कराने वाले एक अंतरराज्यीय शातिर गिरोह का हाथ होने की आशंका जताई है।
परिजनों का आरोप है कि गंगाशहर थाना पुलिस ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को समझे बिना बेहद ढीला रवैया अपनाया और लखनऊ में विवाहिता व बच्ची को ट्रेस करने के बावजूद उन्हें वहीं अपराधियों के संरक्षण में छोड़कर बीकानेर लौट आई। इस कथित पुलिसिया लापरवाही के खिलाफ अब पीड़ित परिवार ने उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) की अदालत में इस्तगासा (सर्च वारंट हेतु परिवाद) दायर कर न्याय की गुहार लगाई है।
सोशल मीडिया पर दोस्ती, 7 दिन बीकानेर में रुकी गाजियाबाद की गुलबहार
पीड़ित परिवार द्वारा दर्ज करवाई गई गुमशुदगी और अदालत में पेश इस्तगासे के अनुसार, पीड़ित विवाहिता की कुछ समय पूर्व सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम/फेसबुक) के माध्यम से गाजियाबाद की रहने वाली गुलबहार उर्फ मायरा खान नाम की युवती से पहचान हुई थी।
- 7 दिन बीकानेर में डाला डेरा: आरोप है कि सोची-समझी साजिश के तहत गुलबहार उर्फ मायरा खान जून महीने की शुरुआत में बीकानेर आई और यहां करीब 7 दिन तक रुककर विवाहिता को लगातार अपनी बातों के जाल में फंसाती रही।
- 16 जून को घर से गायब: गुलबहार ने विवाहिता को उसकी 5 साल की मासूम बेटी सहित घर छोड़ने के लिए पूरी तरह ब्रेनवाश कर तैयार किया। गत 16 जून को विवाहिता चुपके से अपनी बेटी को लेकर घर से निकल गई।
- लखनऊ का टिकट: पुलिस और ट्रेवल्स एजेंसी की पड़ताल में सामने आया कि दोनों को बीकानेर से सीधे गाजियाबाद ले जाने की बजाय बस से लखनऊ भेजा गया था, और इस बस का ऑनलाइन टिकट गाजियाबाद निवासी इसी गुलबहार उर्फ मायरा खान ने अपने मोबाइल नंबर से बुक करवाया था।
दिल्ली में पति को जेल भिजवाने और मर्डर के झूठे केस का चौंकाने वाला ट्रैक रिकॉर्ड
परिजनों द्वारा कोर्ट में पेश किए गए इस्तगासे में गुलबहार उर्फ मायरा खान के आपराधिक और संदिग्ध इतिहास को लेकर बेहद चौंकाने वाले दावे किए गए हैं:
- सर्च वारंट है जारी: परिजनों का आरोप है कि गुलबहार के खिलाफ दिल्ली के एक थाने से पहले ही सर्च वारंट जारी है।
- पति को भिजवाया जेल: इसी साल मार्च महीने में गुलबहार की शादी दिल्ली में करवाई गई थी। शादी के कुछ दिनों बाद ही इस सिंडिकेट के लोगों ने गुलबहार को अचानक गायब कर दिया और उसके पति व ससुराल वालों के खिलाफ हत्या (मर्डर) का झूठा मुकदमा दर्ज करवा दिया, जिसमें दिल्ली पुलिस ने उसके पति को जेल तक भेज दिया था।
- धर्मांतरण गिरोह से कनेक्शन: जेल भिजवाने के खेल के बाद वह युवतियों को प्रेमजाल और सोशल मीडिया के झांसे में फंसाकर उनका जबरन धर्म परिवर्तन करवाने वाले एक बड़े संगठित गिरोह से जुड़ गई। हालांकि, बीकानेर की स्थानीय पुलिस ने अब तक इन गंभीर इनपुट्स पर कोई जांच शुरू नहीं की है।
"मेरी पत्नी-बच्ची को चंगुल से निकालो, उनके साथ अनहोनी हो सकती है" — रो पड़ा पति
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पीड़ित विवाहिता का पति और पूरा कुनबा सदमे में है। विवाहिता के पति ने 'इण्डिया फर्स्ट न्यूज़' को रोते हुए बताया, "मेरी पत्नी और 5 साल की मासूम बेटी एक ऐसे खतरनाक गिरोह के चंगुल में फंस चुकी हैं, जिसका सीधा रास्ता जबरन धर्मांतरण की ओर जाता है। जब बीकानेर पुलिस की टीम उन्हें ढूंढने लखनऊ गई, तो मेरी पत्नी बेहद डरी और सहमी हुई थी। उसने गिरोह के खौफ के कारण पुलिस के सामने कहा कि वह वापस बीकानेर नहीं जाना चाहती। अगर मेरी मासूम बेटी और पत्नी को तुरंत इस दलदल से नहीं निकाला गया, तो वे लोग उनके साथ कोई भी बड़ी आपराधिक वारदात या अनहोनी कर सकते हैं।"
प्रथमदृष्टया पुलिस की भारी लापरवाही: कानूनी विशेषज्ञों की राय
"इस पूरे प्रकरण में गंगाशहर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट पहले से दर्ज थी। ऐसे मामलों में कानूनन पुलिस की यह अनिवार्य जिम्मेदारी बनती है कि वह विवाहिता और उसकी 5 वर्षीय नाबालिग बेटी को बीकानेर लेकर आती और यहां सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 के तहत स्वतंत्र बयान करवाती। लड़की स्पष्ट रूप से किसी के प्रभाव और गहरे मानसिक दबाव में दिखाई दे रही थी, ऐसे में उसे और बच्ची को लखनऊ में ही संदिग्धों के भरोसे छोड़कर आ जाना प्रथमदृष्टया बीकानेर पुलिस की गंभीर लापरवाही और कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है।"
— शैलेष गुप्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता, बीकानेर।
मामले की होगी गहन जांच, हम वारंट जारी करवा रहे हैं: एसपी मृदुल कच्छावा
इस बेहद संवेदनशील और धर्मांतरण गिरोह के आरोपों से जुड़े मामले पर बीकानेर पुलिस अधीक्षक श्री मृदुल कच्छावा (IPS) ने न्यूज़ पोर्टल से बातचीत में कहा:
"विवाहिता के परिजनों और पति द्वारा जो भी आरोप लगाए गए हैं, वे बेहद गंभीर हैं और पूरी तरह से गहन जांच का विषय हैं। पुलिस अनुसंधान में हर एक पहलू को स्पष्ट किया जाएगा। फिलहाल मामले की संवेदनशीलता और बच्ची की सुरक्षा को देखते हुए हम उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) को आधिकारिक पत्र लिखकर 'सर्च वारंट' जारी करवा रहे हैं, ताकि विधिक रूप से विवाहिता और उसकी 5 साल की बेटी को दस्तयाब कर सुरक्षित बीकानेर लाया जा सके और कोर्ट के समक्ष उनके बयान दर्ज करवाए जा सकें।"
— मृदुल कच्छावा, जिला पुलिस अधीक्षक, बीकानेर।

0 Comments