— बाल-बाल बची जान: कलेक्ट्रेट पर थाली-कटोरा हंगामे के बाद पीबीएम मोर्चरी पहुंचे मृतका के पति मुकेश नायक ने आत्मदाह का किया प्रयास; लोगों ने हाथ से छीनी बोतल।
— पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप: मुकेश का आरोप— "माता-पिता को पुलिस ने हिरासत में लिया; पोस्टमार्टम के लिए साइन कराने का बनाया जा रहा दबाव।"
— गतिरोध का चौथा दिन: 21 जून को हुई शारदा की मौत के बाद से मोर्चरी में बंद है शव; मुआवजे और डॉक्टरों पर एफआईआर की मांग को लेकर अड़ा परिवार।
— राजनीतिक पारा हाई: कलेक्ट्रेट की सीढ़ियों पर कटोरे छोड़ लौटे कांग्रेसी; देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग बोले— "अगर बहनों के लिए लड़ना राजनीति है, तो हम कर रहे हैं राजनीति।"
बीकानेर, 23 जून (मंगलवार)। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में दो प्रसूता बहनों की मौत के बाद उपजा विवाद मंगलवार देर शाम एक बेहद खौफनाक और आत्मघाती मोड़ पर पहुंच गया। कलेक्ट्रेट के बाहर हुए 'थाली-कटोरा भीख मार्च' के बाद, पीबीएम अस्पताल की मोर्चरी के बाहर मृतका शारदा नायक के पति मुकेश नायक ने न्याय न मिलने और प्रशासनिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए अपने ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह (आग लगाने) का प्रयास किया।
वहां मौजूद लोगों और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों ने मुस्तैदी दिखाते हुए ऐन वक्त पर मुकेश के हाथ से पेट्रोल की बोतल छीन ली, जिससे मोर्चरी के बाहर एक बहुत बड़ा और भयावह हादसा होने से टल गया। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर छावनी में तब्दील हो गया है।
"माता-पिता को उठा ले गई पुलिस, मुझ पर बना रहे दबाव" — पीड़ित का दर्द
पेट्रोल छिड़कने के बाद बदहवास हालत में मृतका के पति मुकेश नायक ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर बेहद गंभीर और संगीन आरोप मढ़े। मुकेश का आरोप है कि:
- परिजनों को हिरासत में लिया: आंदोलन को कुचलने और शव का जबरन पोस्टमार्टम करवाने के लिए पुलिस उसके निर्दोष माता-पिता को जबरन उठाकर थाने ले गई है।
- जबरन हस्ताक्षर का प्रयास: मुकेश ने रोते हुए बताया कि पुलिस के आला अधिकारियों और एक प्रशासनिक अधिकारी ने मोर्चरी के पास उस पर दबाव बनाया कि वह पोस्टमार्टम की अनुमति के कागजातों पर हस्ताक्षर (साइन) कर दे, ताकि प्रशासन शव का पोस्टमार्टम करवाकर पल्ला झाड़ सके।
दोपहर में कलेक्ट्रेट की सीढ़ियों पर छूटे थे 'भीख के कटोरे'
इससे पूर्व मंगलवार दोपहर को इस दोहरे प्रसूता कांड को लेकर बीकानेर की सड़कों पर जबरदस्त जन-आक्रोश देखने को मिला था। देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग, शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल और यूथ कांग्रेस अध्यक्ष भंवर कूकणा के नेतृत्व में पीड़ित परिवार पीबीएम से 2 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचा था।
- कलेक्टर भीख दो: प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर था जिस पर लिखा था— "शारदा के न्याय के लिए जिला कलेक्टर भीख दो"। प्रदर्शन में शारदा के बुजुर्ग पिता हीरालाल नायक और उनकी 3 साल की मासूम बेटी बिंदिया भी हाथ में कटोरा थामे न्याय मांगती दिखी।
- प्रवेश पर रोक: पुलिस ने कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर ही सभी को रोक दिया। अधिकारियों ने शर्त रखी कि 'भीख के कटोरे' बाहर रखने पर ही कलेक्टर से मिलने दिया जाएगा। इस पर कांग्रेस नेताओं ने इनकार कर दिया और कलेक्ट्रेट की सीढ़ियों पर ही धरने पर बैठ गए। अंत में वे विरोध के प्रतीक के रूप में अपने कटोरे सीढ़ियों पर ही छोड़कर वापस लौट गए।
कलेक्टर और कांग्रेस नेताओं के बीच बयानों का दौर
इस पूरे गतिरोध पर जिला कलेक्टर निशांत जैन ने कहा, "मैं उस समय चिकित्सा विभाग की प्रिंसिपल सेक्रेटरी गायत्री राठौड़ के साथ इसी प्रसूता मामले की उच्च स्तरीय बैठक में व्यस्त था। प्रदर्शनकारी चाहते तो कलेक्ट्रेट में मौजूद एडीएम (ADM) को अपना ज्ञापन सौंप सकते थे, प्रशासन की ओर से ज्ञापन लेने की कोई मनाही नहीं थी।"
वहीं, देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने तीखा पलटवार करते हुए कहा, "हम यहां अस्पताल की लापरवाही से दम तोड़ने वाली दो गरीब बहनों के लिए न्याय मांग रहे हैं। अगर यह राजनीति है, तो हम यह राजनीति कर रहे हैं। जो लोग इसे राजनीति कह रहे हैं, वे खुद आएं और इन रोते-बिलखते परिवारों को न्याय दिला दें, हम इसी वक्त यहां से चले जाएंगे।"
शारदा की मौत के 3 दिन बाद भी शव उठाने से इनकार; प्रीति का हुआ अंतिम संस्कार
गौरतलब है कि पीबीएम अस्पताल के जच्चा-बच्चा केंद्र की बदइंतजामी के चलते 18 जून को प्रसूता प्रीति नायक और 21 जून को शारदा नायक की मौत हो गई थी। प्रीति के परिजन पोस्टमार्टम के बाद शव को सूरतगढ़ ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया।
लेकिन शारदा के परिजनों ने 3 दिन बीत जाने के बाद भी शव उठाने से साफ मना कर दिया है। सोमवार को संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा की मौजूदगी में हुई प्रशासनिक वार्ता विफल होने के बाद मंगलवार को भी कोई निर्णय नहीं हो सका। अब मृतका के पति द्वारा आत्मदाह के प्रयास के बाद बीकानेर संभाग में नायक समाज और विपक्ष का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है, जिससे कानून व्यवस्था बिगड़ने का अंदेशा गहरा गया है।
प्रसूता कांड के बीच पीबीएम पहुंचीं प्रमुख शासन सचिव; अधिकारियों को लगाई फटकार
एक तरफ कलेक्ट्रेट पर हंगामा चल रहा था, वहीं दूसरी तरफ इन दो मौतों के बाद राज्य सरकार के निर्देश पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव (Principal Secretary) गायत्री राठौड़ खुद पीबीएम अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लेने बीकानेर पहुंच गईं।
संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा, जिला कलेक्टर निशांत जैन, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा और पीबीएम अधीक्षक डॉ. बीसी घिया की मौजूदगी में प्रमुख शासन सचिव ने अस्पताल का सघन और औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उनका बेहद सख्त और कड़ा रुख देखने को मिला:
- दवा केंद्र पर नाराजगी: गायत्री राठौड़ जब दवा वितरण केंद्र (DDC) पहुंचीं, तो वहां काउंटर और आवश्यक दवाओं के बॉक्स पर धूल-मिट्टी जमी देख वे बेहद नाराज हुईं।
- बदबू और अव्यवस्था पर फटकार: अस्पताल के वार्डों और गलियारों में फैली गंदगी व तीव्र बदबू को लेकर उन्होंने मौके पर मौजूद चिकित्सा अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और साफ-सफाई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए।
- अव्यवस्थाओं की गहन समीक्षा: उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रसूता प्रकरण के सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और अस्पताल की क्लीनिकल व प्रशासनिक व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार न दिखने पर संबंधित प्रभारियों के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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