— पूरा सिस्टम कटघरे में: पीबीएम अस्पताल के जनाना विंग में सी-सेक्शन के बाद एक-एक कर 6 महिलाओं की हालत बिगड़ी; यूरिन रुकने और मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन के बाद सभी ICU में शिफ्ट।
— कोटा जैसी घोर लापरवाही की आशंका: ब्लीडिंग रोकने वाले 'ऑक्सीटोसिन' इंजेक्शन पर घूमी सुई; अस्पताल ने पुराना स्टॉक हटाकर नागौर से सरकारी सप्लाई के इंजेक्शन मंगवाए, एम्स दिल्ली ने कोटा मामले में अमृतसर की कंपनी का लाइसेंस किया था रद्द।
— जोधपुर AIIMS का धावा: शाम 4 बजे बीकानेर पहुंची विशेष विंग की टीम; इलाज के प्रोसेस, टेक्निकल चार्ट और ड्रग्स सैंपल्स की जांच शुरू, जयपुर भेजी जाएगी विधिक रिपोर्ट।
— इन्फेक्शन डिटेक्टर लगाने की कवायद: एसपी मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा बोले— "ओटी (OT) में इन्फेक्शन की संभावना से इनकार नहीं, 90 सेकंड में वायरस पकड़ने वाली मशीन लगाएंगे।"
बीकानेर, 9 जून (मंगलवार)। कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत और घटिया इंजेक्शनों के विधिक कोहराम के बाद अब बीकानेर संभाग का सबसे बड़ा पीबीएम (PBM) अस्पताल एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाले मेडिकल स्कैम की जद में आ गया है। पीबीएम अस्पताल के जनाना विंग (मातृत्व विभाग) में सिजेरियन डिलीवरी (सी-सेक्शन सर्जरी) के बाद एक-एक कर 6 नवविवाहिता माताओं की किडनी फेल हो गई है।
सभी पीड़ित महिलाओं की उम्र महज 19 से 27 वर्ष के बीच है और वे जीवन और मौत के बीच पीबीएम के आईसीयू (ICU) में वेंटिलेटर और डायलिसिस सपोर्ट पर जंग लड़ रही हैं। शुरुआती स्तर पर अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों की विंग इस पूरे मामले को दबाने और छिपाने के प्रयास में जुटी रही, लेकिन जब पीड़ित महिलाओं की स्थिति अत्यधिक संदेहास्पद और नाजुक हो गई, तो पूरे चिकित्सा तंत्र की विधिक पोल खुलकर सामने आ गई।
तबीयत बिगड़ने का क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर और एम्स दिल्ली की कोटा रिपोर्ट का 'कनेक्शन'
प्राप्त विधिक इनपुट के अनुसार, करीब 10 से 15 दिन पहले पीबीएम के लेबर वॉर्ड और ऑपरेशन थिएटर (OT) में इन प्रसूताओं के सिजेरियन ऑपरेशन किए गए थे। ऑपरेशन के तुरंत बाद महिलाओं का पेशाब (यूरिन आउटपुट) पूरी तरह रुक गया, शरीर में खून के थक्के जमना बंद हो गए और प्लेटलेट्स का स्तर तेजी से नीचे गिर गया।
इस पूरी खौफनाक चेन के पीछे कोटा मेडिकल कॉलेज जैसी ही खतरनाक लापरवाही सामने आ रही है। दरअसल, कोटा में प्रसूताओं की मौत के बाद जब एम्स दिल्ली (AIIMS Delhi) की टीम ने जांच की थी, तो पता चला था कि डिलीवरी के समय ब्लीडिंग रोकने के लिए जो 'ऑक्सीटोसिन' (Oxytocin Injection) दिए गए थे, उनमें आवश्यक विधिक केमिकल (Essential Components) ही गायब थे। बीकानेर पीबीएम में भी ठीक वही लक्षण सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में पीबीएम में चल रहे ऑक्सीटोसिन इंजेक्शनों के पूरे पुराने स्टॉक को आधी रात को विधिक रूप से हटवा दिया है और आपातकालीन स्थिति में नागौर जिले से सरकारी सप्लाई के नए सुरक्षित इंजेक्शन मंगवाए हैं।
जोधपुर AIIMS की टीम ने पीबीएम में डाला डेरा, खंगाले जा रहे हैं पर्चे
मामले की गंभीरता को देखते हुए जोधपुर एम्स (AIIMS Jodhpur) की एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ डॉक्टर्स की टीम मंगलवार शाम 4:00 बजे विशेष वाहन से बीकानेर पीबीएम अस्पताल पहुंची। इस केंद्रीय टीम ने आते ही आईसीयू का चार्ज लिया और पीड़ित महिलाओं के विधिक मेडिकल रिकॉर्ड्स, प्री-ऑपरेटिव चार्ट्स और केस शीट्स को अपने कब्जे में ले लिया। टीम मुख्य रूप से इन पहलुओं पर तकनीकी अनुसंधान कर रही है:
- डिलीवरी के दौरान और बाद में डॉक्टरों द्वारा कौन सा विधिक प्रोसेस अपनाया गया?
- प्रसूताओं को किस कंपनी के, किस बैच नंबर के और कौन से एनेस्थीसिया व ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन दिए गए थे?
- क्या ऑपरेशन थिएटर के भीतर सर्जिकल उपकरणों के स्टरलाइजेशन (Infection Matrix) में कोई बड़ी चूक हुई थी?
एसपी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. बी.एस. जोधा ने बताया कि इस जांच टीम में नामचीन माइक्रोबायोलॉजिस्ट, सीनियर फिजिशियन, नेफ्रोलॉजिस्ट, पीएसएम और गायनी डॉक्टर्स को शामिल किया गया है। यह टीम क्लिनिकल असेसमेंट के बाद विधिक सैंपल्स लेकर अपनी अंतिम रिपोर्ट जयपुर (चिकित्सा निदेशालय) को प्रेषित करेगी।
इन 5 प्रसूताओं की हालत अत्यंत नाजुक, वेंटिलेटर पर फलोदी की प्रीति
अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र फलौदिया और आईसीयू विंग के अनुसार, भर्ती महिलाओं के शरीर के प्रमुख अंगों पर इस कदर असर पड़ा है:
- प्रीति (उम्र 20 वर्ष, निवासी— फलोदी): डिलीवरी के बाद हाई ब्लड प्रेशर के कारण भयंकर दौरे पड़े। फेफड़ों में पानी भर गया और 'हेल्प सिंड्रोम' (HELLP Syndrome) की आशंका के चलते दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो गई है। प्रीति फिलहाल पूरी तरह वेंटिलेटर सपोर्ट पर जिंदगी की अंतिम सांसें गिन रही है।
- राहिला (उम्र 19 वर्ष): प्रसव के बाद अनियंत्रित ब्लीडिंग हुई, प्लेटलेट्स गिर गए और गंभीर इन्फेक्शन के कारण मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन (कई अंगों का एक साथ काम बंद करना) की स्थिति बनी हुई है।
- इमरती (उम्र 20 वर्ष): खून में भयंकर सेप्सिस (गंभीर इन्फेक्शन) फैल चुका है, जिससे एक्यूट किडनी इंजरी हुई है।
- तारा देवी (उम्र 27 वर्ष): फेफड़ों के बाहरी हिस्से में पानी भर चुका है, शरीर में पोटैशियम का स्तर जानलेवा सीमा तक बढ़ गया है और गंभीर एनीमिया (खून की कमी) है।
- शारदा (उम्र 26 वर्ष): एक्यूट किडनी इंजरी के साथ शरीर में प्लेटलेट्स की भारी कमी हो गई है, जिससे शरीर के भीतर खून के थक्के नहीं बन पा रहे हैं।
प्रशासन का बचाव: "90 सेकंड में इन्फेक्शन पकड़ने वाली मशीन लगाएंगे"
इस पूरे मेडिकल हाहाकार पर एसपी मेडिकल कॉलेज के वर्तमान प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि एक्यूट किडनी इंजरी (AKI) के कई क्लिनिकल कारण हो सकते हैं, लेकिन हम ऑपरेशन थिएटर (OT) के भीतर बैक्टीरिया या इन्फेक्शन होने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं कर सकते।
डॉ. वर्मा ने घोषणा की कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए पीबीएम अस्पताल में बहुत जल्द एक आधुनिक 'इन्फेक्शन डिटेक्टर मशीन' इंस्टॉल की जाएगी, जो महज 90 सेकंड के भीतर ओटी के भीतर मौजूद किसी भी घातक वायरस या बैक्टीरिया को तकनीकी रूप से डिटेक्ट कर लेगी।
इधर, पीबीएम अस्पताल अधीक्षक ईएसपी डॉ. बी.सी. घीया ने बताया कि मामले की आंतरिक विधिक जांच के लिए प्रिंसिपल और अधीक्षक स्तर से दो अलग-अलग स्वतंत्र कमेटियां गठित कर दी गई हैं। इस कमेटी में दो सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट, एक टॉप फिजिशियन, ड्रग कंट्रोलर इंचार्ज और नर्सिंग हेड को शामिल किया गया है, जो आज देर शाम तक अपनी प्राथमिक विधिक रिपोर्ट सौंपेंगे। इस घटना के बाद बीकानेर संभाग के प्रबुद्ध नागरिकों और मरीजों के परिजनों में डॉक्टरों की कार्यशैली और घटिया दवाओं की सप्लाई को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

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