— कलयुगी मां-बाप का क्रूर चेहरा: शुक्रवार सुबह करीब 6:30 बजे झाड़ियों के बीच बने एक खंडहर में लावारिस मिला नवजात शिशु।
— चींटियों ने पहुंचाया नुकसान: मासूम के चेहरे और हाथों पर काट रही थीं चींटियां, शरीर पर मिले हल्की चोटों के निशान।
— देवदूत बनीं ANM मधु श्रीवास्तव: रोने की आवाज सुनकर पहुंचे ग्रामीणों की सूचना पर कपड़ा लेकर दौड़ीं; सुरक्षित रेस्क्यू कर पहुंचाया अस्पताल।
— मासूम पूरी तरह स्वस्थ: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में किया गया उपचार, ढाई किलो है वजन; परिजनों की तलाश में जुटी रणजीतपुरा थाना पुलिस।
बीकानेर, 17 जुलाई (शुक्रवार)। बीकानेर जिले के सीमावर्ती रणजीतपुरा गांव से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ कुछ अज्ञात क्रूर लोगों ने जन्म के कुछ ही घंटे बाद एक नवजात बच्चे को झाड़ियों के बीच स्थित एक वीरान खंडहर में मरने के लिए लावारिस छोड़ दिया। भूख और दर्द से बिलखते मासूम के चेहरे और नाजुक हाथों पर चींटियां काट रही थीं। सुबह के समय वहां से गुजर रहे ग्रामीणों ने जब बच्चे के रोने की आवाज सुनी, तो हड़कंप मच गया। ग्रामीणों की सजगता और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से नवजात को समय रहते सुरक्षित बचा लिया गया है।
झाड़ियों से आ रही थी रोने की आवाज, अस्पताल पहुंचे ग्रामीण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना शुक्रवार सुबह करीब 6:30 बजे रणजीतपुरा गांव की है। रणजीतपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की एएनएम (ANM) मधु श्रीवास्तव ने बताया कि सुबह के समय रास्ते से गुजर रहे कुछ राहगीरों और ग्रामीणों को अचानक सड़क किनारे झाड़ियों के बीच बने एक पुराने खंडहर से किसी छोटे बच्चे के लगातार रोने की आवाज सुनाई दी।
ग्रामीण तुरंत दौड़कर नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और वहां मौजूद मेडिकल स्टाफ से पूछा कि क्या अस्पताल में हाल ही में किसी महिला की डिलीवरी हुई है? जब अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यहाँ ऐसी कोई डिलीवरी नहीं हुई है, तब ग्रामीणों ने मेडिकल टीम को खंडहर के भीतर नवजात शिशु के पड़े होने की जानकारी दी।
कपड़ा लेकर दौड़ीं एएनएम, साफ कर पिलाया दूध
सूचना मिलते ही एएनएम मधु श्रीवास्तव बिना एक पल गंवाए एक साफ कपड़ा लेकर ग्रामीणों के साथ तुरंत मौके की तरफ दौड़ीं। खंडहर के भीतर का नजारा बेहद विचलित करने वाला था। जन्म के कुछ ही घंटे बाद फेंके गए उस मासूम के चेहरे, नन्हे हाथों और पूरे शरीर पर अनगिनत चींटियां चढ़ी हुई थीं और उसे बुरी तरह काट रही थीं।
एएनएम ने पूरी सतर्कता से नवजात को अपनी गोद में उठाया, कपड़े में लपेटा और तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर आईं। अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए सबसे पहले बच्चे के शरीर से चींटियों को साफ किया, उसे नहलाया और उसकी गहन डाॅक्टरी जांच की। भूखे तड़प रहे बच्चे को मेडिकल स्टाफ द्वारा दूध भी पिलाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे का वजन करीब ढाई किलो है और समय पर इलाज मिलने के कारण वह अब पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ है।
शरीर पर चोट के निशान, परिजनों का नहीं लगा सुराग
प्राथमिक चिकित्सा जांच में सामने आया है कि नवजात के शरीर पर कुछ हल्की खरोंचें और चोट के निशान हैं, जो संभवतः झाड़ियों में फेंकने या जंगली कीड़ों के कारण आए हैं। शुरुआती तौर पर यह माना जा रहा है कि लोक-लाज या किसी अन्य कारण से बच्चे के जन्म के तुरंत बाद ही अंधेरे का फायदा उठाकर अज्ञात लोग उसे वहां फेंक कर फरार हो गए।
इस अमानवीय घटना की खबर जैसे ही गांव में फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण मासूम को देखने और उसकी सेहत का हाल जानने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर जमा हो गए। फिलहाल यह पूरी तरह रहस्य बना हुआ है कि इस मासूम का गुनहगार कौन है और उसे इस हाल में छोड़कर जाने वाले माता-पिता कौन हैं।
रणजीतपुरा पुलिस ने शुरू की जांच, इलाके में पूछताछ जारी
घटना की आधिकारिक सूचना मिलने के बाद रणजीतपुरा थाना पुलिस की टीम तुरंत एक्टिव मोड पर आ गई है। पुलिस अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर बच्चे की स्थिति का जायजा लिया और एएनएम व प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों के बयान दर्ज किए हैं।
पुलिस ने खंडहर और उसके आसपास के रास्तों पर नाकेबंदी और छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस टीम आसपास के ढाणियों, गांवों और स्थानीय प्रसूति केंद्रों (Maternity Centers) से भी हाल ही में हुई डिलीवरी और गर्भवती महिलाओं का रिकॉर्ड खंगाल रही है, ताकि बच्चे को इस तरह लावारिस छोड़ने वाले निर्दयी लोगों तक पहुंचा जा सके। फिलहाल नवजात शिशु को बीकानेर बाल कल्याण समिति (CWC) के निर्देशानुसार आगामी सुरक्षा और देखभाल के लिए जिला अस्पताल या शिशु गृह भेजने की प्रक्रिया की जा रही है।

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