— गंभीर विवाद: पीबीएम अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में सड़क हादसे के शिकार दो मरीजों की मौत के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। एक तरफ परिजन उपचार में लापरवाही और मारपीट के आरोप लगाकर धरने पर बैठे हैं, तो दूसरी तरफ डॉक्टर रेजिडेंट के साथ मारपीट का विरोध जताते हुए कार्य बहिष्कार कर रहे हैं।
— परिजनों के आरोप: मृतकों के परिजनों का दावा है कि सुबह 6 से 8 बजे के बीच डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं थे, समय पर इलाज और इंजेक्शन न मिलने तथा बाहर से दवा मंगाने के कारण दोनों घायलों की जान गई; साथ ही अस्पताल कर्मियों पर लाठियों से मारपीट का आरोप भी लगाया गया है।
— डॉक्टरों का पक्ष: वहीं चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने आरोप लगाया है कि मरीज की मौत के बाद परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात रेजिडेंट डॉक्टर के साथ मारपीट की, जिसके विरोध में सुरक्षा की मांग को लेकर कार्य बहिष्कार किया गया है।
बीकानेर: पीबीएम अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर इन दिनों गंभीर आरोपों और हंगामे के केंद्र में आ गया है। सड़क हादसे में दो लोगों की मौत के बाद शुरू हुआ यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। परिजनों के धरने और डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार के चलते अस्पताल परिसर में भारी तनाव बना हुआ है, जिसे नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक अमला मौके पर सक्रिय है।
इलाज में देरी और लापरवाही के गंभीर आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए दो मरीजों को ट्रॉमा सेंटर लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि उन्हें करीब दो घंटे तक समुचित उपचार नहीं मिला। सुबह 6 से 8 बजे के बीच जब मरीज तड़प रहे थे, तब डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे। नर्सिंग स्टाफ द्वारा फोन करने के काफी देर बाद डॉक्टर पहुंचे।
परिजनों का यह भी आरोप है कि अस्पताल के अंदर दवा और इंजेक्शन उपलब्ध होने के बावजूद उनके हाथ पर दवा का नाम लिखकर बाहर से लाने को कहा गया। सही समय पर उपचार न मिलने के कारण दोनों मरीजों की मौत हो गई। इसके अलावा परिजनों ने ट्रॉमा सेंटर के कुछ कर्मचारियों पर बैड के नीचे रखी लाठियों से उनके साथ मारपीट करने का भी गंभीर आरोप लगाया है।
सुरक्षा की मांग को लेकर डॉक्टरों का कार्य बहिष्कार
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पहलू यह है कि डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों ने इसे अपनी सुरक्षा पर हमला बताया है। डॉक्टरों का कहना है कि एक मरीज की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात रेजिडेंट डॉक्टर के साथ मारपीट की।
इस घटना से आहत डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत काम बंद कर दिया और ट्रॉमा सेंटर के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। डॉक्टरों का तर्क है कि अस्पताल परिसर में लगातार इस तरह की घटनाएं हो रही हैं और यदि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो उनके लिए कार्य करना असंभव होगा।
प्रशासन की समझाइश और जांच जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीबीएम अस्पताल प्रशासन और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों (मृतकों के परिजनों और नाराज डॉक्टरों) से बातचीत कर समझाइश के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
परिजनों की मांग है कि कथित तौर पर मारपीट करने वाले कर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए और जब तक कार्रवाई नहीं होती, वे शव नहीं लेंगे। फिलहाल, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति को शांत करने और दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर वस्तुस्थिति की जांच करने में जुटे हैं।

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