– 50 साल की परंपरा: गंगासागर मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब; नि:शुल्क ठहरने और चिकित्सा की रही उत्तम व्यवस्था
– भक्ति की बयार: श्री नारायण गुरु की महाज्योत और भजनों पर झूम उठे श्रद्धालु; सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने दी आहुति
कोलकाता, 16 जनवरी (शुक्रवार)।बंगीय गुर्जरगौड़ ब्राह्मण समाज, कोलकाता द्वारा आयोजित विशाल सेवा शिविर बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। गंगासागर मेले के निमित्त लगाए गए इस शिविर में 'नर सेवा ही नारायण सेवा' का ध्येय वाक्य चरितार्थ होता नजर आया।
शिविर में तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ उमड़ी। संस्था की ओर से सभी यात्रियों के लिए नि:शुल्क ठहरने और आदर-सत्कार के साथ बैठाकर भोजन-प्रसाद खिलाने की व्यवस्था की गई थी।
50 वर्षों से अनवरत चल रहा है सेवा यज्ञ
संस्था के अध्यक्ष आसकरण बच्छ और श्री महर्षि गौतम सेवा संस्थान के सचिव श्री भरत राम जी तिवाड़ी ने बताया कि उनकी संस्था पिछले 50 वर्षों से निरंतर गंगासागर मेला शिविर का आयोजन कर रही है।
- सेवा का दायरा: शिविर में प्रतिदिन लगभग 5000 से ज्यादा तीर्थयात्रियों के लिए भोजन प्रसाद, ठहरने और चिकित्सा की उत्तम व्यवस्था प्रदान की गई।
- समर्पण: संस्था सचिव राजकुमार उपाध्याय ने बताया कि सैकड़ों कार्यकर्ताओं की टीम ने दिन-रात एक कर इस महायज्ञ को सफल बनाया और अपनी बहुमूल्य सेवाएं दीं।
भजनों की अमृत वर्षा और महाज्योत
शिविर के दौरान आध्यात्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ। श्री नारायण गुरु भक्त मंडल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में माहौल भक्तिमय हो गया।
- आकर्षण: मंडल अध्यक्ष गोवर्धन सुरावत ने बताया कि आराध्य श्री नारायण गुरु महाराज की 'महाज्योत' शिविर का मुख्य आकर्षण रही।
- भजन संध्या: गुरु चरणों में मंडल के सदस्यों ने भजनों की ऐसी अमृत वर्षा की कि उपस्थित श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हो गए।
इनका रहा विशेष सहयोग
कार्यक्रम के अंत में संस्था के उपाध्यक्ष गणेश प्रसाद जोशी और कोषाध्यक्ष राधेश्याम पंचारिया ने सभी सदस्यों की बेहतरीन सेवा के लिए आभार व्यक्त किया।
- बधाई: संयोजकवृद कैलाश जी सुरावत, भवानी शंकर उपाध्याय, वासुदेव जी सांखी और परमेश्वर जी सुरावत को सफल आयोजन के लिए बधाई दी गई।
- सक्रिय भूमिका: शिविर को सफल बनाने में धर्म चंद सुरावत, पवन कुमार जोशी, भगवान सुरावत, कमल किशोर जोशी, मदन लाल सुरावत, भजन लाल उपाध्याय, बलदेव उपाध्याय, श्याम सुंदर जोशी, मनीष सुरावत, अजय शर्मा, सुरेश शर्मा, महेश शर्मा, सुमेर सिंह और बाबूलाल चौधरी की सक्रिय एवं अहम भूमिका रही।

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