– कोर्ट का सख्त सवाल: 'बिना स्वीकृति 5 मंजिला इमारत कैसे तन गई?'; शिकायत पर कार्रवाई होती तो बच सकती थी 11 जिंदगियां
– अब होगी जवाबदेही तय: एसीजेएम कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को जांच सौंपी; कलेक्टर-निगम आयुक्त को की गई शिकायत पर क्यों साधी गई थी चुप्पी?
बीकानेर, 19 जनवरी (सोमवार)। बीकानेर के ज्वैलरी मार्केट में 8 महीने पहले हुए भीषण सिलेंडर ब्लास्ट, जिसमें 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, मामले में कोर्ट ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश संख्या-1 (ACJM No. 1) ने आदेश दिया है कि इस मामले की जांच अब SP या ASP स्तर के अधिकारी करेंगे।
कोर्ट ने केवल हादसे की जांच नहीं, बल्कि उन प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करने का आदेश दिया है, जिन्होंने अवैध निर्माण की शिकायत मिलने के बावजूद आंखें मूंद रखी थीं।
'अफसर जिम्मेदारी निभाते तो नहीं होता हादसा'
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं:
- अवैध निर्माण: नगर निगम से निर्माण स्वीकृति नहीं होने के बावजूद 5 मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग कैसे खड़ी हो गई?
- लापरवाही: कोर्ट ने माना कि अगर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाते, तो इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती।
अगस्त 2024 में ही कर दी गई थी शिकायत
इस मामले में प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आई है।
- चेतावनी: व्यापारी चुन्नीलाल सोनी ने हादसे से महीनों पहले 21 अगस्त 2024 को ही जिला कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और संभागीय आयुक्त को लिखित पत्र देकर इस परिसर की सुरक्षा और अवैध निर्माण पर सवाल खड़े किए थे।
- अनदेखी: उन्होंने कार्रवाई का निवेदन किया था, लेकिन प्रशासन ने फाइल दबा दी। कोर्ट ने अब आदेश दिया है कि शिकायत पर कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।
फ्लैशबैक: 7 मई का वो काला दिन
हादसा 7 मई को बीकानेर के मदान मार्केट (ज्वैलरी मार्केट) में हुआ था।
- वजह: 5 मंजिला दुकान के बेसमेंट में चल रही ज्वैलरी शॉप में मशीन पर लगे सिलेंडर से गैस रिसाव हो रहा था। सुबह से बिजली गुल थी।
- ब्लास्ट: जैसे ही बिजली आई और किसी ने स्विच दबाया, स्पार्किंग से भीषण धमाका हुआ। धमाका इतना तेज था कि दुकान के नीचे के 2 फ्लोर पूरी तरह तबाह हो गए और 11 लोग मलबे में दबकर या झुलसकर मर गए।
अंडरग्राउंड दुकानों का जाल
पुलिस जांच में सामने आया कि मदान मार्केट में नियमों को ताक पर रखकर अंडरग्राउंड दुकानों का जाल बिछाया गया था। दो दुकानों को मिलाकर बड़ा किया गया था। पास ही दैया मार्केट और नजीर गौरी मार्केट में भी भीड़भाड़ रहती है, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी आम है।

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