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बीकानेर: डिस्कॉम में करोड़ों का 'बिल घोटाला'; यूनियन नेता को XEN ने दी 'एक्सीडेंट' करवाने की धमकी, 19 से अनिश्चितकालीन धरना

India-1stNews



– महाभ्रष्टाचार: 12 लाख का बिल बना दिया 65 लाख का; भवरिया इन्फ्रा प्रोजेक्ट पर फर्जी भुगतान उठाने का आरोप

– जान का खतरा: यूनियन अध्यक्ष रामकुमार व्यास बोले- शिकायत की तो अधिकारी ने कहा 'घर जाते वक्त किसी भी गाड़ी के नीचे आ सकते हो'

– केंद्रीय मंत्री को जवाब: 2317 पद हैं पर काम कर रहे सिर्फ 930 कर्मचारी, फिर 'सरप्लस' कैसे?

बीकानेर, 13 जनवरी (मंगलवार)।जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) में ट्रंकी कार्यों (Turnkey Projects) की आड़ में करोड़ों रुपये के घोटाले का जिन बाहर आया है। कर्मचारी मजदूर संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रामकुमार व्यास ने प्रेस वार्ता कर विभाग में चल रहे फर्जीवाड़े की पोल खोली है।

​व्यास ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि जब उन्होंने इस घोटाले की शिकायत की, तो विभाग के ही एक अधिशाषी अभियंता (XEN) ने उन्हें 'सड़क हादसे में मरवाने' की धमकी दी।

12 लाख का सामान, 65 लाख का बिल

​रामकुमार व्यास ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए मैसर्स भवरिया इन्फ्रा प्रोजेक्ट प्रा. लि. जयपुर पर गंभीर आरोप लगाए।

  • ट्रांसफार्मर घोटाला: कंपनी ने जो ट्रांसफार्मर खरीदे, उनकी मूल इनवॉइस (बिल) 12 लाख रुपये थी, लेकिन फर्जीवाड़ा कर उसे 65 लाख रुपये दिखाया गया और भुगतान उठा लिया गया।
  • ई-वे बिल गायब: पीसीसी पोल (खंभे) के न तो ई-वे बिल बनाए गए और न ही जांच कमेटी को उपलब्ध कराए गए।
  • नुकसान: इस तरह फर्जी बिल लगाकर डिस्कॉम को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया है।

"रास्ते में किसी भी गाड़ी के नीचे आ सकते हो"

​व्यास ने बताया कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन से लेकर सरकार के आला अधिकारियों तक इस 'महाभ्रष्टाचार' की शिकायत की।

  • धमकी: शिकायत से बौखलाए एक अधिशाषी अभियंता (XEN) ने उन्हें शिकायत वापस लेने की सलाह देते हुए कहा, "ऑफिस से घर जाते वक्त किसी वाहन की चपेट में आ सकते हो।"
  • जवाब: व्यास ने कहा कि वे इन धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे।

केंद्रीय मंत्री मेघवाल के आंकड़े गलत?

​व्यास ने केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के उस बयान को भी हास्यास्पद बताया जिसमें उन्होंने जिले में 'जरूरत से ज्यादा कर्मचारी' होने की बात कही थी।

  • हकीकत: व्यास ने आंकड़े रखते हुए कहा कि बीकानेर जिले में 2317 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में महज 930 कार्मिक ही कार्यरत हैं।
  • प्रताड़ना: भारी कमी के बावजूद बीकानेर के कार्मिकों का जिले से बाहर स्थानांतरण कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे कर्मचारी मानसिक तनाव में हैं।

19 जनवरी से 'आर-पार' की लड़ाई

​यूनियन ने अल्टीमेटम दिया है कि:

  1. ​भ्रष्ट फर्म के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
  2. ​1992 से कार्यरत कर्मचारियों को पदोन्नति दी जाए (350 से ज्यादा कर्मचारी कतार में हैं)।

​यदि मांगे नहीं मानी गईं, तो 19 जनवरी से मुख्य अभियंता कार्यालय (Chief Engineer Office) के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।


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