Mobile Logo Settings

Mobile Logo Settings

राजस्थान में 'पर्ची' पर लगाम: सरकारी डॉक्टर्स ने बाहर की दवा लिखी तो खैर नहीं

India-1stNews



– मरीजों को बड़ी राहत: अब जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी; अगर अस्पताल में दवा नहीं है, तो प्रशासन खरीदकर देगा, लेकिन मरीज को बाहर नहीं भेजेगा

– आंकड़े: PHC से लेकर मेडिकल कॉलेज तक 500 से 800 तरह की दवाइयां फ्री उपलब्ध; निदेशक रवि प्रकाश शर्मा ने जारी किया अल्टीमेटम

बीकानेर/जयपुर, 15 जनवरी (गुरुवार)।राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को अब डॉक्टर 'बाहर की दवा' (Outside Medicine) लिखकर नहीं दे सकेंगे। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेशभर के डॉक्टर्स को चेतावनी नोटिस जारी किया है।

​स्वास्थ्य विभाग के निदेशक रवि प्रकाश शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निःशुल्क दवा सूची में उपलब्ध सॉल्ट के बजाय अगर किसी डॉक्टर ने दूसरे ब्रांड की दवा लिखी, तो उसके खिलाफ राजस्थान सेवा नियम (RSR) 1958 के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

दवा नहीं है, तो अस्पताल खरीदकर देगा

​आदेश में एक और महत्वपूर्ण बात कही गई है जो मरीजों के हक में है।

  • नियम: अगर किसी अस्पताल (PHC/CHC/District Hospital) के स्टॉक में कोई जरूरी दवा खत्म हो गई है, तो डॉक्टर मरीज को बाहर से लाने के लिए नहीं कहेगा।
  • समाधान: अस्पताल प्रशासन को वह दवा स्थानीय स्तर पर खरीदकर (Local Purchase) मरीज को निःशुल्क उपलब्ध करवानी होगी।

शिकायत मिली तो नपेंगे डॉक्टर

​विभाग के संज्ञान में आया है कि सरकार द्वारा करोड़ों का बजट खर्च करने के बावजूद कई जिलों में डॉक्टर्स मरीजों को मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदने पर मजबूर कर रहे हैं। अब अगर निदेशालय में ऐसी कोई शिकायत आई, तो संबंधित डॉक्टर की खैर नहीं होगी।

जानें, कहां कितनी दवाइयां हैं फ्री?

​सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों में दवाइयों का पर्याप्त भंडार है:

  1. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC): 500 से ज्यादा दवाइयां (80+ सर्जिकल आइटम)।
  2. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC): 700 से ज्यादा दवाइयां।
  3. मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (जैसे PBM): 800 से ज्यादा दवाइयां।
  4. जिला अस्पताल: 850 से ज्यादा दवाइयां आवश्यक दवा सूची (EDL) में शामिल हैं।

Post a Comment

0 Comments