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राजस्थान पुलिस का बड़ा आदेश: अब मुल्जिमों की फोटो नहीं होगी वायरल; हाई कोर्ट की सख्ती के बाद सोशल मीडिया और मीडिया परेड पर रोक

India-1stNews



– हाई कोर्ट का आदेश: 'गिरफ्तारी के बाद भी निजता का अधिकार खत्म नहीं होता'; आरोपी को अपराधी की तरह प्रदर्शित करने पर पाबंदी

– पुलिस के लिए नई गाइडलाइन: प्रेस के सामने परेड कराने और सोशल मीडिया पर फोटो/वीडियो अपलोड करने पर सख्त मनाही

जयपुर/बीकानेर, 22 जनवरी 2026 (गुरुवार)। राजस्थान पुलिस ने अपराधियों और आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है, जो पुलिसिंग के पुराने तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल देगी। अब पुलिस किसी भी गिरफ्तार आरोपी की फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं कर सकेगी।

​अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध), डॉ. हवा सिंह घुमरिया ने 21 जनवरी को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। यह फैसला राजस्थान हाई कोर्ट, जोधपुर द्वारा 20 जनवरी 2026 को दिए गए एक निर्णय की पालना में लिया गया है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

​आदेश में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला दिया गया है।

  • तर्क: एडीजी क्राइम ने स्पष्ट लिखा है कि "अभियुक्त केवल आरोपित होता है, दोषी नहीं।" गिरफ्तारी के बाद भी किसी व्यक्ति की मानवीय गरिमा और निजता (Right to Privacy) समाप्त नहीं होती।
  • सम्मान: इसलिए, प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति के साथ मानवीय और सभ्य व्यवहार किया जाना अनिवार्य है।

पुलिस अधिकारियों के लिए 5 कड़े निर्देश (SOP)

​एडीजी ने सभी रेंज आईजी, एसपी और कमिश्नर को इन नियमों की पालना सुनिश्चित करने को कहा है:

  1. सोशल मीडिया पर बैन: गिरफ्तारी के समय या बाद में आरोपी का फोटो/वीडियो किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप), पुलिस के आधिकारिक पेज या मीडिया/प्रेस के साथ साझा नहीं किया जाएगा।
  2. सार्वजनिक परेड नहीं: आरोपी को सार्वजनिक रूप से अपमानित नहीं किया जाएगा और न ही उसे अपराधी की तरह प्रदर्शित (Parade) किया जाएगा।
  3. मीडिया ब्रीफिंग: पुलिस ब्रीफिंग के दौरान आरोपी के संबंध में शब्दों का चयन बहुत सावधानी और गरिमा के साथ करना होगा। किसी भी हाल में आरोपी को मीडिया के सामने अपमानजनक स्थिति में पेश नहीं किया जाएगा।
  4. मीडिया ट्रायल: पुलिस ऐसा कोई काम नहीं करेगी जो 'मीडिया ट्रायल' को प्रोत्साहित करता हो।
  5. हिरासत में व्यवहार: थाने में आरोपी को लाने-ले जाने और बैठाने की व्यवस्था सभ्य होगी। महिलाओं, वृद्धों और कमजोर वर्गों के साथ विशेष संवेदनशीलता बरती जाएगी।

बदलेगी 'सिंघम' स्टाइल पुलिसिंग

​अब तक अक्सर देखा जाता था कि पुलिस किसी गैंग या आरोपी को पकड़ने के बाद टेबल के पीछे खड़ा कर फोटो खिंचवाती थी और उसे प्रेस नोट के साथ जारी करती थी। कई पुलिसकर्मी अपनी व्यक्तिगत वाहवाही के लिए सोशल मीडिया पर रील या फोटो डालते थे। इस आदेश के बाद अब इस 'फोटो सेशन कल्चर' पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी।


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