— बढ़ा इंतजार: इंदिरा गांधी नहर में पानी छोड़े जाने के बावजूद बीकानेर शहर को प्यास बुझाने वाले बीछवाल जलाशय (Bichwal Reservoir) तक बुधवार दोपहर तक पानी की एक बूंद नहीं पहुंच पाई।
— खाला पड़ा सूखा: नहर से जलाशय तक आने वाला खाला (कैनल चैनल) पूरी तरह सूखा मिला, जिसके चलते शहर में नियमित जलापूर्ति सामान्य होने में अभी कम से कम दो दिन का समय और लग सकता है।
— पानी की कालाबाजारी: नहरबंदी के कारण उपजे जल संकट का फायदा उठाकर निजी टैंकर माफिया सक्रिय हैं; मजबूरी में जनता से 6 हजार लीटर पानी के बदले एक हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
बीकानेर, 20 मई (बुधवार)। बीकानेर शहर में भीषण गर्मी के बीच चल रहा गंभीर पेयजल संकट फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। इंदिरा गांधी नहर (IGNP) में पानी की आवक शुरू होने के बावजूद, बीकानेर शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले बीछवाल जलाशय तक बुधवार दोपहर तक पानी नहीं पहुंच सका है। ऐसे में शहरवासियों को सुचारू और नियमित जलापूर्ति के लिए अभी एक से दो दिनों का और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
शाम तक पानी पहुंचने की उम्मीद, खाला पड़ा सूखा
बुधवार को धरातलीय स्थिति देखने पर बीछवाल जलाशय से जुड़ा मुख्य खाला पूरी तरह सूखा नजर आया और उसमें पानी का कोई प्रवाह दिखाई नहीं दिया। मौके पर जलाशय का निरीक्षण करने पहुंचे जलदाय विभाग (PHED) के अधिशासी अभियंता (XEN) नितेश ने बताया कि नहर से पानी आगे बढ़ चुका है और बुधवार देर शाम तक जलाशय में इसके पहुंचने की पूरी संभावना है। हालांकि, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने मीडिया के कैमरों के सामने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने अनौपचारिक बातचीत में माना कि फिलहाल जलाशय में पानी एकदम अंतिम तल (डेड स्टोरेज) पर पहुंच चुका है, लेकिन शाम तक नया पानी आने के बाद स्टोरेज भरकर व्यवस्था में तेजी से सुधार किया जाएगा।
नहरबंदी से बिगड़ी व्यवस्था, एक दिन छोड़कर आ रहा पानी
बीकानेर में पिछले दिनों से जारी नहरबंदी के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। जलदाय विभाग वर्तमान में शहर में एक दिन छोड़कर एक दिन (अल्टरनेट डे) पानी की सप्लाई कर रहा है, वह भी कम दबाव और बेहद कम समय के लिए। भीषण गर्मी के इस दौर में एक दिन छोड़कर आ रहा पानी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है, जिससे आम जनता त्रस्त है।
मजबूरी का फायदा उठा रहे टैंकर माफिया, मनमाने दाम की वसूली
सरकारी दावों और नियंत्रण के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए शहर में पानी की कालाबाजारी खुलेआम जारी है। पेयजल की भारी किल्लत के चलते लोग महंगे दामों पर निजी टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं। शहर के विभिन्न मोहल्लों से मिल रही शिकायतों के अनुसार, करीब 6 हजार लीटर पानी के एक टैंकर के लिए निजी ऑपरेटरों द्वारा 800 से 1000 रुपये तक मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा टैंकरों की दरों को लेकर कोई सख्त निगरानी नहीं रखने के कारण मध्यम और गरीब परिवारों की जेब पर भारी डाका पड़ रहा है।

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