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बीकानेर: अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़; 'अकाउंट मैनेजर' लोकेश गिरफ्तार, देशभर में 20 लाख की ठगी का आरोप

India-1stNews



​— बड़ी सफलता: बीकानेर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह के एक शातिर सदस्य को दबोचने में सफलता हासिल की है।

​— म्यूल अकाउंट्स का खेल: आरोपी सीधे-साधे स्थानीय लोगों को 10% कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते किराये पर लेता था और ठगी की रकम को चेक के जरिए तुरंत विड्रॉल कर लेता था।

​— वर्क फ्रॉम होम का झांसा: यह गिरोह देश भर के लोगों को 'वर्क फ्रॉम होम' और 'टैस्क पूरे करने' के नाम पर अपना शिकार बनाता था, जिसकी कड़ियां अब पुलिस खंगाल रही है।

बीकानेर, 20 मई (बुधवार)। बीकानेर पुलिस ने आधुनिक तकनीक और मुस्तैदी के बल पर देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय एक अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के एक मुख्य कारिंदे को गिरफ्तार किया है, जो ठगी के इस पूरे नेटवर्क में 'कैश विड्रॉल' और 'अकाउंट मैनेजर' के रूप में काम कर रहा था। गिरफ्तार आरोपी की पहचान बीकानेर के रानीसर बास निवासी लोकेश पड़िहार के रूप में हुई है।

देशभर में दर्ज हैं 20 लाख से अधिक की शिकायतें

​पुलिस की प्रारंभिक जांच और साइबर सेल के रिकॉर्ड के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी लोकेश पड़िहार के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों और जिलों में 20 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी की गंभीर शिकायतें (National Cyber Crime Portal पर) दर्ज हैं। आरोपी बेहद शातिर दिमाग है, जो पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए लगातार अपने तरीके बदल रहा था।

ऐसे फंसाते थे जाल में: 'वर्क फ्रॉम होम' का झांसा

​पूछताछ में सामने आया है कि यह अंतरराज्यीय गैंग आम लोगों को डिजिटल माध्यमों से जाल में फंसाने के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' (घर बैठे काम) और 'डिफरेंट टास्क' (विभिन्न ऑनलाइन कार्य) पूरे करके मोटा मुनाफा कमाने का लालच देता था। जैसे ही कोई पीड़ित इनके झांसे में आता और बताए गए खातों में पैसे ट्रांसफर करता, वैसे ही लोकेश सक्रिय हो जाता था। लोकेश उस पूरी फ्रॉड रकम को अपने और गिरोह द्वारा मैनेज किए जा रहे खातों में डलवा लेता था। इसके बाद वह बैंकों से चेक के जरिए इस पूरी रकम को तुरंत विड्रॉल (नकद निकासी) कर मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा देता था।

10% कमीशन पर लेता था भोले-भाले लोगों के बैंक खाते

​पुलिस पूछताछ में एक चौंकाने वाला हथकंडा सामने आया है। आरोपी लोकेश खुद के बैंक खातों के ब्लॉक होने के डर से स्थानीय सीधे-साधे और गरीब लोगों को पैसों का लालच देता था। वह उन्हें 10 प्रतिशत कमीशन देने का वादा कर उनके नाम से खुले बैंक खाते (जिन्हें साइबर अपराध की भाषा में म्यूल अकाउंट्स कहा जाता है) और किट अपने कब्जे में ले लेता था। इसके बाद देश के अन्य राज्यों में बैठे गिरोह के मुख्य सरगना पीड़ितों से इन्हीं खातों में पैसा जमा करवाते थे। बीकानेर पुलिस अब लोकेश को रिमांड पर लेकर गिरोह के मुख्य सरगनाओं और बीकानेर में उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए अन्य बैंक खातों के मालिकों के बारे में गहनता से तफ्तीश कर रही है।

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