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बीकानेर: सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद उठी राजस्थानी भाषा को शिक्षा व रोजगार से जोड़ने की मांग; मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

India-1stNews



​— ऐतिहासिक निर्णय: माननीय उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा स्कूलों में राजस्थानी भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाने और रीट (REET) परीक्षा में शामिल करने संबंधी निर्णय के बाद प्रदेशभर में उत्साह है।

​— कलेक्टर को ज्ञापन: राजस्थानी मोट्यार परिषद ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को तुरंत प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की है।

​— राजभाषा का दर्जा: परिषद ने अनुच्छेद 345 के तहत राजस्थानी को प्रदेश की आधिकारिक राजभाषा घोषित करने और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष पैरवी करने पर बल दिया है।

बीकानेर, 19 मई (मंगलवार)। माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजस्थानी भाषा के पक्ष में दिए गए एक ऐतिहासिक फैसले के बाद प्रदेशभर में इसे शिक्षा और रोजगार से जोड़ने की मुहिम तेज हो गई है। इसी कड़ी में मंगलवार को राजस्थानी मोट्यार परिषद (बीकानेर) के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में राजस्थानी भाषा को प्रदेश की राजभाषा घोषित करने और शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में अनिवार्य रूप से शामिल करने की पुरजोर मांग उठाई गई।

रीट परीक्षा और विद्यालयों में अनिवार्य करने की मांग

​राजस्थानी मोट्यार परिषद के जिलाध्यक्ष हिंमाशु टाक ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजस्थान के सभी राजकीय एवं निजी विद्यालयों में राजस्थानी भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाए जाने तथा रीट (REET) परीक्षा में राजस्थानी भाषा विषय को शामिल करने संबंधी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इस निर्णय से राजस्थानी भाषा प्रेमियों और युवाओं में हर्ष का माहौल है। संगठन ने राज्य सरकार से मांग की है कि इस अदालती फैसले को बिना किसी विलंब के धरातल पर लागू किया जाए ताकि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुल सकें।

संस्कृति और स्वाभिमान की पहचान: कमल मारू

​ज्ञापन सौंपने के दौरान परिषद के सक्रिय सदस्य कमल मारू ने कहा कि राजस्थानी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपरा और माटी के स्वाभिमान की पहचान है। इसे शिक्षा, प्रशासन और रोजगार से जोड़ना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रदेश के करोड़ों लोगों की भावनाएं अपनी मातृभाषा से जुड़ी हुई हैं और अब सरकार को इस दिशा में सकारात्मक व त्वरित कदम उठाने चाहिए।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

​मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए इस महत्वपूर्ण ज्ञापन के दौरान परिषद के पदाधिकारियों सहित शहर के कई प्रबुद्ध जन मौजूद रहे। इस अवसर पर डॉ. हरिराम बिश्नोई, पार्षद सुधा आचार्य, राजेश चौधरी, प्रशांत जैन, मुकेश सिंढ़ायच और राजूनाथ आदि ने उपस्थित रहकर राजस्थानी भाषा को उसका वाजिब हक दिलाने की इस मांग का पुरजोर समर्थन किया।

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