— हादसों की कतरन: बीकानेर के ग्रामीण इलाकों में खेतों में सिंचाई के लिए बनी पानी की डिग्गियां अब मासूमों के लिए काल साबित हो रही हैं। बीते 7 दिनों में जिले में डूबने से 7 मौतें हो चुकी हैं।
— त्योहार बदला मातम में: 8 वर्षीय मासूम यूनुस ईद की खुशियां और छुट्टियां मनाने अपने ननिहाल आया हुआ था, लेकिन डिग्गी के गहरे पानी ने उसकी जीवनलीला समाप्त कर दी।
— सुरक्षा पर बड़ा सवाल: ग्रामीण अंचलों में बिना सुरक्षा घेराबंदी (फेंसिंग) के खुली पड़ी डिग्गियों के कारण लगातार दर्दनाक हादसे हो रहे हैं, जिससे सुरक्षा इंतजामों की पोल खुल गई है।
बीकानेर, 21 मई (गुरुवार)। बीकानेर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में बनी पानी की डिग्गियां (फार्म पोंड) लगातार जानलेवा साबित हो रही हैं। पूगल और बज्जू के पिछले हादसों के घाव अभी भरे भी नहीं थे कि बुधवार को रणजीतपुरा थाना क्षेत्र के बज्जू इलाके में एक और हृदयविदारक घटना सामने आई। यहाँ एक खेत की खुली डिग्गी में डूबने से 12 वर्षीय बच्ची और उसके 8 साल के ममेरे भाई (नानी के घर आए मासूम) की तड़पकर मौत हो गई।
पैर फिसलने से डिग्गी के गहरे पानी में समाए मासूम
जानकारी के अनुसार, घटना बज्जू क्षेत्र की ग्राम पंचायत बीजेरी के मोड़िया फांटा की है। बुधवार को खेत में बनी पानी की डिग्गी के पास खेलते समय दोनों बच्चों का संतुलन बिगड़ गया या पैर फिसल गया, जिससे वे गहरे पानी में चले गए। डिग्गी की गहराई अधिक होने और चारों ओर सुरक्षा मुंडेर न होने के कारण दोनों बच्चे खुद को बचा नहीं पाए। मृतकों की पहचान वकीला (12) पुत्री हसन खान तथा यूनुस (8) पुत्र शौकत खान के रूप में हुई है।
दंतौर अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
काफी देर तक जब दोनों बच्चे कहीं नजर नहीं आए तो परिजनों ने तलाश शुरू की। डिग्गी के पास पहुंचने पर जब दोनों के शव पानी में दिखे तो परिवार में कोहराम मच गया। बदहवास परिजन तुरंत दोनों बच्चों को डिग्गी से बाहर निकालकर दंतौर राजकीय चिकित्सालय लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। रणजीतपुरा थानाधिकारी लक्ष्मण सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि कानूनी औपचारिकताओं के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिए गए हैं।
7 दिन, 3 बड़े हादसे और 7 मौतें: सहम उठा बीकानेर
बीकानेर जिले के ग्रामीण अंचलों में पिछले 96 घंटों के भीतर पानी की डिग्गियों में डूबने की घटनाओं ने पूरे जिला प्रशासन और आमजन की चिंता बढ़ा दी है। मौतों का यह आंकड़ा डराने वाला है:
- बज्जू क्षेत्र (पहला हादसा): 14 मई को बज्जू में ही खेत की डिग्गी में डूबने से तीन सगी बहनों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
- पूगल क्षेत्र (दूसरा हादसा): मंगलवार को ही भानीपुरा (पूगल) में खेलते समय डिग्गी में गिरे 7 वर्षीय मासूम को बचाने के प्रयास में उसकी नानी और दोहिते दोनों की डूबने से जान चली गई थी।
- बज्जू क्षेत्र (तीसरा हादसा - बुधवार): मोड़िया फांटा में वकीला और यूनुस की मौत के बाद अब बीते चार दिनों में डिग्गी हादसों में मरने वालों की संख्या 7 पहुंच गई है।
सुरक्षा घेरा न होना बन रहा मौतों की वजह
लगातार हो रही इन सामूहिक मौतों ने खेतों में बनी खुली डिग्गियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर नीतिगत सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अनुदान या स्वयं के खर्च पर डिग्गियां तो बना लेते हैं, लेकिन उनके चारों ओर कंटीली तार, सुरक्षा जाली (चेनलिंक फेंसिंग) या मजबूत दीवार नहीं बनाते। भीषण गर्मी के इस दौर में बच्चे खेलते-खेलते या पानी के आकर्षण में इनके पास पहुंच जाते हैं और जरा सा पैर फिसलते ही मौत के मुंह में समा जाते हैं। ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से सभी चालू डिग्गियों पर सुरक्षा घेराबंदी अनिवार्य करने की मांग की है।

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