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बीकानेर में आफत की रात: स्कूल के कमरे की छत भरभराकर गिरी;'ऑल इज वेल' की रिपोर्ट फेल

India-1stNews



​— मलबे में तब्दील कमरा: गुरुवार रात 11 बजे आए भयंकर अंधड़-बारिश के दौरान राजकीय सीनियर सेकेंडरी विद्यालय में हुआ हादसा; छत की 60 में से 17 पट्टियां टूटीं, फर्नीचर क्षतिग्रस्त।

भगवान का शुक्र है, छुट्टियां थीं: इसी तीन मंजिला/बड़े हॉल में बैठते थे कक्षा 10 के 40 से अधिक छात्र; स्कूल टाइम या वर्किंग डे में हादसा होता तो जा सकती थी मासूमों की जान।

कागजी रिपोर्ट की खुली पोल: जिले की 'जर्जर एवं क्षतिग्रस्त' स्कूलों की सरकारी सूची में शामिल नहीं था इस स्कूल का नाम; सीडीईओ और सीबीईओ कनिष्ठ अभियंता के साथ जांच के लिए मौके पर पहुंचे।



बीकानेर, 5 जून (शुक्रवार)। बीकानेर जिले में गुरुवार रात को आए विनाशकारी रेतीले बवंडर और तेज तूफान-बारिश के साइड इफेक्ट्स अब सामने आने लगे हैं। लूणकरणसर विधानसभा क्षेत्र के गारबदेसर गांव स्थित राजकीय सीनियर सेकेंडरी विद्यालय से एक बेहद चिंताजनक खबर आ रही है। यहाँ देर रात आए अंधड़ के विधिक थपेड़ों को सरकारी स्कूल की जर्जर इमारत झेल नहीं सकी और एक बड़े कमरे (हॉल) की छत भरभराकर नीचे आ गिरी।

​गनीमत यह रही कि वर्तमान में शिक्षा विभाग के नियमानुसार स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां (ग्रीष्मावकाश) चल रही हैं और यह हादसा रात के समय हुआ, जिसके चलते एक बहुत बड़ा और खौफनाक हादसा होने से टल गया।

रात 11 बजे का तांडव: 17 पट्टियां टूटीं, सुबह ग्रामीणों ने देखा मलबा

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार रात करीब 11:00 बजे जब पूरा क्षेत्र तेज आंधी और मूसलाधार बारिश की चपेट में था, तभी गारबदेसर स्कूल के भवन में एक जोरदार धमाका हुआ। रात के अंधेरे और अंधड़ के कारण शुरुआत में किसी को पता नहीं चला। शुक्रवार सुबह जब स्थानीय ग्रामीण और स्कूल स्टाफ के कुछ लोग परिसर में पहुंचे, तो नजारा देखकर दंग रह गए। स्कूल के एक मुख्य कमरे की छत पूरी तरह ढह चुकी थी।

​कमरे की छत में कुल 60 आरसीसी/पत्थर की पट्टियां लगी हुई थीं, जिनमें से 17 पट्टियां टूटकर नीचे गिर गईं। छत गिरने के कारण कमरे के भीतर लगा बच्चों के बैठने का कीमती फर्नीचर, ब्लैकबोर्ड और अन्य शिक्षण सामग्रियां मलबे के नीचे दबकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय ग्राम पंचायत, प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षा विभाग को दी।

यदि स्कूल खुला होता तो...? 40 से अधिक छात्रों की जान दांव पर थी

​इस हादसे ने शिक्षा विभाग और पीडब्ल्यूडी (PWD) की तकनीकी जांच विंग की लापरवाही को पूरी तरह उजागर कर दिया है। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि जिस कमरे की छत गिरी है, वह स्कूल का एक बड़ा हॉल है। इस कमरे में कक्षा 10वीं की नियमित क्लास संचालित होती है, जिसमें 40 से अधिक छात्र-छात्राएं एक साथ बैठकर पढ़ाई करते हैं।

​यदि यह तूफान दिन के समय आया होता या स्कूल में छुट्टियां नहीं चल रही होतीं, तो निश्चित रूप से 40 मासूम बच्चों और ऑन-ड्यूटी शिक्षकों की जान गंभीर जोखिम में पड़ सकती थी। इस घटना के बाद से ही ग्रामीणों में स्कूल की पूरी बिल्डिंग की सुरक्षा और उसकी मियाद को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है।

'ऑल इज वेल' की रिपोर्ट फेल: जर्जर सूची में नाम ही नहीं था

​इस पूरे मामले का सबसे हैरान करने वाला और प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाने वाला पहलू यह है कि शिक्षा विभाग की 'सेफ स्कूल' लिस्ट में इस विद्यालय का कोई जिक्र ही नहीं था। दरअसल, मानसून की दस्तक से पहले शिक्षा विभाग ने जिले के सभी संस्था प्रधानों (प्रिंसिपल्स) से उनके विद्यालयों की इमारतों का सर्वे कर क्षतिग्रस्त या जर्जर भवनों की विधिक रिपोर्ट मांगी थी।

  • सीडीईओ का बयान: मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) किसनदान चारण ने मामले पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए स्वीकारा कि जिले की क्षतिग्रस्त या असुरक्षित स्कूलों की जो आधिकारिक लिस्ट विभाग के पास मौजूद थी, उसमें गारबदेसर की इस स्कूल का नाम शामिल ही नहीं था। यानी कागजों में इस बिल्डिंग को पूरी तरह 'सुरक्षित' माना गया था। अब विभाग इस बात का पता लगा रहा है कि आखिर किस आधार पर इस जर्जर भवन को क्लीन चिट दी गई थी।

CBEO उमराव यादव कनिष्ठ अभियंता के साथ मौके पर, तकनीकी जांच शुरू

​घटना की सूचना मिलते ही मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO) उमराव यादव शिक्षा विभाग के कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) और तकनीकी टीम के साथ तुरंत गारबदेसर स्कूल पहुंचे। अधिकारियों ने गिरे हुए मलबे और दीवारों में आई दरारों का विधिक भौतिक निरीक्षण किया।

​सीबीईओ उमराव यादव ने बताया कि मलबे को हटाने और कमरे को पूरी तरह सील करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई बच्चा कौतूहलवश अंदर न जाए। कनिष्ठ अभियंता की तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही छत गिरने के वास्तविक कारणों और पूरी बिल्डिंग की विधिक स्थिति के बारे में उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

​इधर, इस हादसे के बाद लूणकरणसर क्षेत्र के सजग ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि बरसात का मौसम शुरू होने से पहले क्षेत्र की सभी पुरानी और जर्जर सरकारी स्कूल इमारतों की दोबारा से निष्पक्ष तकनीकी जांच करवाई जाए ताकि भविष्य में किसी मासूम की जान के साथ खिलवाड़ न हो।

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