— बड़ी राहत का ऐलान: 12 जून से 15 जुलाई तक प्रदेशभर के सभी नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों, यूआईटी और हाउसिंग बोर्ड क्षेत्रों में लगेंगे विशेष कैंप।
— तालिबानी नियमों का अंत: मौका निरीक्षण (स्पॉट वेरिफिकेशन) की विधिक अनिवार्यता पूरी तरह समाप्त; आपत्तियों की अवधि 15 दिन से घटाकर की गई मात्र 7 दिन।
— खजाना खोला: स्टाम्प ड्यूटी और अतिरिक्त प्रीमियम में 100% की छूट; कृषि भूमि पर 2021 तक बसी कॉलोनियों के नियमन का रास्ता साफ; पुराने बिलों के आधार पर भी मिलेंगे पट्टे।
जयपुर/बीकानेर, 11 जून (गुरुवार)। आगामी स्वायत्तशासी नगर निकाय चुनावों (Urban Local Body Elections) की रणभेरी बजने से ठीक पहले राजस्थान सरकार ने शहरी क्षेत्र के निवासियों को अब तक की सबसे बड़ी सौगात दी है। राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी शहरों और कस्बों में 'शहरी सेवा शिविर-2026' (शहरी जन कल्याण अभियान) शुरू करने का विधिक फैसला किया है। यह महा-अभियान 12 जून 2026 (शुक्रवार) से शुरू होकर 15 जुलाई 2026 तक अनवरत रूप से संचालित किया जाएगा।
इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर परिषद, नगर पालिका, जयपुर-जोधपुर-भिवाड़ी-कोटा विकास प्राधिकरण (JDA/JOA), नगर सुधार न्यास (UIT) और राजस्थान हाउसिंग बोर्ड (RHB) के कार्यालयों व वार्डों में विशेष शिविर लगाए जाएंगे, जहां वर्षों से लंबित पड़े आम जनता के प्रकरणों का मौके पर ही 'ऑन द स्पॉट' विधिक निस्तारण कर राहत प्रदान की जाएगी।
नियमों का सरलीकरण: अब बाबू नहीं अटकाएंगे फाइल, मौका निरीक्षण बंद
सरकार ने इस बार पट्टों, नियमन और भूमि संबंधी विधिक फाइलों को बाबूराज और लालफीताशाही से मुक्त करने के लिए प्रक्रियाओं को बेहद सरल और पारदर्शी बना दिया है:
- स्पॉट वेरिफिकेशन खत्म: पट्टा जारी करने या भवन निर्माण स्वीकृति के लिए अब तक अनिवार्य माना जाने वाला 'मौका निरीक्षण' (मौका मुआयना) पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब आवेदक के दस्तावेजों के आधार पर ही विधिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
- 7 दिन में निस्तारण: यदि किसी भूखंड या पट्टे पर कोई विधिक आपत्ति दर्ज करानी है, तो उसकी समय-सीमा को 15 दिन से घटाकर मात्र 7 दिन कर दिया गया है। 7 दिन में आपत्ति नहीं आने पर पट्टा जारी कर दिया जाएगा।
- प्रक्रियाएं हुईं आसान: नामांतरण (म्यूटेशन), उप-विभाजन (सब-डिवीजन), पुनर्गठन (रिकॉन्स्टिट्यूशन), भू-उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज चेंज) और फ्री-होल्ड कन्वर्जन जैसी जटिल विधिक प्रक्रियाओं के नियमों को बेहद लचीला बना दिया गया है।
कॉलोनियों के नियमन की दरें और कट-ऑफ डेट (पट्टा मात्र ₹100 में)
अभियान के तहत बरसों से बिना पट्टे की कॉलोनियों में रह रहे परिवारों को विधिक मालिकाना हक देने के लिए कट-ऑफ डेट (प्रभावी तिथियां) तय की गई हैं:
- कृषि भूमि की कॉलोनियां: कृषि भूमि पर विकसित की गई वैसी कॉलोनियां जो 31 दिसंबर 2021 तक बस चुकी हैं, उन्हें विशेष विधिक प्रावधानों के तहत नियमन (रेगुलराइजेशन) का पूरा लाभ दिया जाएगा।
- सरकारी भूमि पर बसी कॉलोनियां: यदि कोई आबादी 1 जनवरी 2013 तक सरकारी या सिवायचक भूमि पर बस चुकी है, तो उसका भी विधिक नियमन कर निवासियों को राहत दी जाएगी। डीनोटिफाइड कच्ची बस्तियों के पात्र निवासियों को भी फ्री पट्टे जारी होंगे।
- पट्टों की रियायती दरें: * 200 वर्गमीटर तक के भूखंड: पट्टा शुल्क मात्र 100 रुपए प्रति वर्गमीटर तय किया गया है।
- 200 से 500 वर्गमीटर तक के भूखंड: पट्टा शुल्क मात्र 120 रुपए प्रति वर्गमीटर की रियायती दर से जारी होगा।
- बिना रजिस्ट्री भी राहत: यदि किसी के पास मूल विधिक रजिस्ट्री नहीं है, तो पुराने बिजली-पानी के बिल और बिना रजिस्ट्री वाले पुराने नोटरीकृत इकरारनामों (एग्रीमेंट) को भी विधिक साक्ष्य मानकर पट्टा जारी किया जाएगा।
शुल्क और प्रीमियम में 100% तक की विधिक छूट (छूट की तालिका)
शहरी उपभोक्ताओं और संपत्ति धारकों को आर्थिक संबल देने के लिए शुल्कों में भारी कटौती और रियायतें दी गई हैं:
|
क्र.सं. |
सेवा/शुल्क का प्रकार |
दी गई विधिक छूट / राहत |
|---|---|---|
|
1. |
स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) |
100 प्रतिशत पूरी छूट |
|
2. |
अतिरिक्त प्रीमियम (Additional Premium) |
100 प्रतिशत पूरी छूट |
|
3. |
पुरानी लीज राशि पर ब्याज |
एकमुश्त जमा कराने पर 100% ब्याज माफ |
|
4. |
नामांतरण शुल्क (Mutation Fee) |
50 प्रतिशत तक की बड़ी राहत |
|
5. |
भू-उपयोग परिवर्तन / उप-विभाजन शुल्क |
नियम व श्रेणी अनुसार 25% से 75% तक छूट |
|
6. |
भवन निर्माण स्वीकृति शुल्क |
नियमों |
एक ही छत के नीचे मिलेंगी ये 20 से अधिक प्रमुख विधिक सेवाएं
शिविरों के भीतर आम नागरिकों को अपने काम के लिए अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। मुख्य रूप से निम्नलिखित जन-सेवाओं का मौके पर ही निपटारा होगा:
- राजस्व व भूमि सेवाएं: पट्टा वितरण, नामांतरण, फ्री-होल्ड कन्वर्जन, लीज मुक्ति प्रमाण पत्र, भू-उपयोग परिवर्तन, भूखंडों का उप-विभाजन और पुनर्गठन।
- नागरिक पंजीकरण व विधिक लाइसेंस: जन्म-मृत्यु पंजीकरण, विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र, फायर एनओसी (Fire NOC), ट्रेड लाइसेंस और भवन निर्माण नक्शा स्वीकृति।
- शहरी अवसंरचना व शिकायतें: नई सड़कों का निर्माण, नाली-सीवर ब्लॉकचेन की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट दुरुस्त करना, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों का जीर्णोद्धार तथा आवारा पशुओं की धरपकड़।
- जनकल्याणकारी योजनाएं: सामाजिक सुरक्षा पेंशन के नए विधिक आवेदन, पीएम स्वनिधि योजना (स्ट्रीट वेंडर्स लोन), मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना, कुसुम सोलर योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं के ऑन-स्पॉट फॉर्म और वेरिफिकेशन।
आवेदन की विधिक प्रक्रिया: ऑनलाइन पोर्टल के साथ हेल्प डेस्क की सुविधा
सरकार ने इस अभियान को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए अधिकांश आवेदनों को ऑनलाइन मोड पर ही स्वीकार करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, जिन वृद्ध या सीधे-साधे नागरिकों के पास ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध नहीं है या जिन सेवाओं का सॉफ्टवेयर ऑनलाइन नहीं है, वहां नगरीय निकाय खुद ऑफलाइन आवेदन स्वीकार करेंगे और अपने स्तर पर ऑपरेटरों के माध्यम से उन्हें ई-मित्र पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज (अपलोड) करेंगे।
प्रत्येक शिविर स्थल पर जनता की सहूलियत के लिए एक विस्तृत कंट्रोल रूम व हेल्प डेस्क बनाई जाएगी। इसके अलावा मौके पर ही ई-मित्र केंद्र, विधिक नोटरी पब्लिक, स्टाम्प वेंडर और डीड राइटर (दस्तावेज लेखक) की फिजिकल बैठक व्यवस्था की जाएगी, ताकि जनता को एफिडेविट या स्टाम्प पेपर के लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर न काटने पड़ें। बीकानेर और जयपुर संभाग के नगरीय निकायों ने शुक्रवार सुबह 9:00 बजे से इन शिविरों को धरातल पर उतारने के लिए वार्डवार कमेटियों और प्रभारियों को विधिक आदेश जारी कर दिए हैं।

0 Comments