Mobile Logo Settings

Mobile Logo Settings

बीकानेर: पीबीएम अस्पताल के बाहर हाई-वोल्टेज ड्रामा; पार्किंग विवाद में फार्मासिस्ट ने कार चढ़ाने का किया प्रयास! टिफिन चकनाचूर

India-1stNews



​— परिजनों में भारी रोष: नीकू वार्ड में भर्ती दोहिते की देखभाल करने नोखा से आए बुजुर्ग से उलझा अस्पताल कर्मी।

खाना खाते समय हुआ विवाद: टिफिन खत्म करने की मोहलत मांगने पर भड़का फार्मासिस्ट; गाली-गलौज कर गाड़ी आगे बढ़ाने का आरोप।

बुजुर्ग को आई मामूली चोटें: टायर की चपेट में आने से बचा पीड़ित, गुस्साए प्रत्यक्षदर्शियों ने परिसर में काटा जमकर हंगामा।

सदर पुलिस ने शांत कराया मामला: देर रात मचे बवाल की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस; समझाइश के बाद टला बड़ा टकराव।

बीकानेर, 3 जुलाई (शुक्रवार)। संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल का 'बच्चा अस्पताल' (चाइल्ड हॉस्पिटल) परिसर एक बार फिर गंभीर विवाद और कर्मचारियों की दबंगई का केंद्र बन गया है। गुरुवार देर रात अस्पताल परिसर के ठीक बाहर कार पार्किंग के मामूली विवाद को लेकर एक फार्मासिस्ट द्वारा मरीज के बुजुर्ग परिजन पर कार चढ़ाने के प्रयास का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद दर्जनों लोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए भारी हंगामा किया, जिससे आधी रात को अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।

नोखा के बुजुर्ग के साथ खाना खाते समय हुई बदसलूकी

​सदर थाना पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, नोखा निवासी बुजुर्ग हरिश्चंद्र अपने बीमार दोहिते के इलाज के सिलसिले में बीकानेर आए हुए हैं। उनका दोहिता बच्चा अस्पताल के 'नीकू' (NICU) वार्ड में भर्ती है।

​देर रात करीब 12:30 बजे हरिश्चंद्र नीकू वार्ड के बाहर खुले परिसर में बैठकर अपना खाना (टिफिन) खा रहे थे। इसी दौरान बच्चा अस्पताल में ही फार्मासिस्ट के पद पर कार्यरत अश्विनी कुमार अपनी निजी कार लेकर वहां पहुंचा। फार्मासिस्ट उसी जगह पर अपनी कार पार्क करना चाहता था जहाँ बुजुर्ग बैठकर खाना खा रहे थे। इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

गुस्से में आपा खोया, टिफिन रौंदा और बुजुर्ग को मारी टक्कर

​मौके पर मौजूद चश्मदीदों ने बताया कि बुजुर्ग हरिश्चंद्र ने फार्मासिस्ट अश्विनी कुमार से अत्यंत शालीनता से आग्रह किया कि वे बस दो मिनट में अपना खाना खत्म कर रहे हैं, तब तक वह थोड़ा रुक जाए। यह सुनते ही फार्मासिस्ट अचानक आगबबूला हो गया और बुजुर्ग के साथ भद्दी-भद्दी गालियां और बदतमीजी करने लगा।

​विवाद इतना बढ़ गया कि फार्मासिस्ट ने आव देखा न ताव, गुस्से में कार की रफ्तार बढ़ाई और सीधे हरिश्चंद्र की तरफ मोड़ दी। गनीमत रही कि हरिश्चंद्र फुर्ती से पीछे हट गए, जिससे उनकी जान बच गई, लेकिन कार का टायर चढ़ने से उनका टिफिन पूरी तरह चकनाचूर हो गया और उन्हें मामूली चोटें (खरोंचें) आईं।

सदर थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाला मोर्चा

​एक लाचार बुजुर्ग तीमारदार के साथ अस्पताल कर्मी की इस बर्बरता को देखकर वहां मौजूद अन्य मरीजों के परिजन और एम्बुलेंस चालक इकट्ठा हो गए। लोगों ने फार्मासिस्ट को घेरकर विरोध जताना शुरू किया तो वह कार छोड़कर भाग निकला। इसके बाद भीड़ ने अस्पताल प्रशासन की तानाशाही के खिलाफ जोरदार नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया।

​अस्पताल परिसर में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की सूचना पर सदर थाना पुलिस मय जाब्ते तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने आक्रोशित लोगों और पीड़ित बुजुर्ग से वार्ता की तथा मामले में निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई का भरोसा देकर करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद हंगामे को शांत करवाया। इस घटना ने एक बार फिर पीबीएम अस्पताल के संविदा व स्थायी कर्मियों के आम जनता के प्रति संवेदनहीन और हिंसक व्यवहार की पोल खोलकर रख दी है।

Post a Comment

0 Comments