8 माह की उम्र में चूल्हे में गिरने से झुलसा था दायां हाथ, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में प्लास्टिक सर्जरी से कार्यक्षमता में हुआ सुधार
बीकानेर। एसपी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में विशेषज्ञ प्लास्टिक सर्जरी के जरिए 38 वर्षीय बाबूलाल को 37 साल पुरानी हाथ की विकृति से राहत मिली है। महज 8 माह की उम्र में चूल्हे में गिरने से उनका दायां हाथ बुरी तरह झुलस गया था। समय के साथ हाथ में गंभीर विकृति विकसित हो गई, जिसका असर उनके दैनिक जीवन के साथ-साथ रोजगार पर भी पड़ा।
लगभग चार दशक तक इस परेशानी के साथ जीवन बिताने के बाद बाबूलाल को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में उपचार मिला। यहां प्लास्टिक सर्जन डॉ. अजयपाल चौधरी ने जटिल सर्जरी कर हाथ को नया आकार देने के साथ उसकी कार्यक्षमता में सुधार किया। सर्जरी के बाद अब बाबूलाल अपने दैनिक कार्य स्वयं करने के साथ मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने में सक्षम हो गए हैं।
जटिल सर्जरी से हाथ को मिला नया आकार
डॉ. अजयपाल चौधरी ने जांच के बाद आवश्यक सर्जिकल प्रक्रिया की। सर्जरी के दौरान बोन ग्राफ्टिंग, टेंडन की लंबाई बढ़ाने और फ्लैप कवरेज जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। इन प्रक्रियाओं के माध्यम से हाथ की विकृति को सुधारने और उसकी कार्यक्षमता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
लंबे समय बाद आत्मनिर्भर हुए बाबूलाल
बचपन में हुए हादसे के बाद हाथ की विकृति के कारण बाबूलाल को वर्षों तक दैनिक कार्य करने और रोजगार कमाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। सर्जरी के बाद हाथ की कार्यक्षमता में सुधार हुआ और अब वे अपने जरूरी काम करने के साथ मजदूरी भी कर पा रहे हैं। उनके लिए यह बदलाव लंबे समय बाद सामान्य और आत्मनिर्भर जीवन की ओर लौटने का अवसर बना है।
एसएसबी अधीक्षक डॉ. संजीव बुरी ने इसे अस्पताल की विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से हाथ की विकृति के साथ जीवन जी रहे मरीज का सफल उपचार कर उसे कार्यात्मक रूप से आत्मनिर्भर बनाना चिकित्सा टीम के लिए संतोष और गौरव की बात है।
एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार के तहत अस्पताल में इस तरह की जटिल प्लास्टिक सर्जरी की जा रही है। बाबूलाल के मामले में बोन ग्राफ्टिंग, टेंडन की लंबाई बढ़ाने और फ्लैप कवरेज के जरिए हाथ को पुनः आकार देकर उसकी कार्यक्षमता में सुधार किया गया।
पूरी टीम ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
सर्जरी में निश्चेतन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कांता भाटी, डॉ. सोनाली धवन, डॉ. शिवा तंवर सहित ओटी स्टाफ का सहयोग रहा। ओपीडी स्टाफ से अनीता चाहर और सुरेश आचार्य ने भी उपचार प्रक्रिया में सहयोग किया।
बाबूलाल का मामला यह दर्शाता है कि लंबे समय से चली आ रही शारीरिक विकृति के उपचार में विशेषज्ञ प्लास्टिक सर्जरी किस तरह मरीज की कार्यक्षमता और आत्मनिर्भरता में सुधार ला सकती है। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हुए उपचार के बाद बाबूलाल अब अपने काम पर लौटकर परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।



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