— निर्विरोध जीत: बीकानेर नगर निगम चुनाव के तहत वार्ड नंबर 69 से भाजपा प्रत्याशी लीला गहलोत बिना चुनाव लड़े ही निर्विरोध पार्षद निर्वाचित हो गई हैं.
— कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन खारिज: कांग्रेस की ओर से अधिकृत ममता सांसी ने पर्चे में स्वयं को आरएलपी (RLP) का उम्मीदवार दर्शा दिया था और पार्टी का आधिकारिक टिकट संलग्न नहीं किया था, जिसके चलते स्क्रूटनी में उनका नामांकन खारिज हो गया.
— भाजपा का खुला खाता: विपक्षी उम्मीदवार का पर्चा रद्द होने के बाद मैदान में कोई अन्य प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा, जिससे चुनाव से पहले ही भाजपा को इस सीट पर बड़ी बढ़त मिल गई है.
बीकानेर: बीकानेर नगर निगम चुनाव के नामांकन और स्क्रूटनी की प्रक्रिया के दौरान एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। शहर के वार्ड नंबर 69 से चुनाव से पहले ही मुकाबला पूरी तरह समाप्त हो गया है। कांग्रेस पार्टी द्वारा अधिकृत प्रत्याशी के रूप में उतमी गईं ममता सांसी का नामांकन तकनीकी खामियों के चलते रद्द हो गया, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उम्मीदवार लीला गहलोत (पत्नी पूर्व पार्षद अनूप गहलोत) को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया.
कांग्रेस का टिकट और आरएलपी के नाम का फेर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कांग्रेस पार्टी ने अपनी सूची में वार्ड 69 से ममता सांसी को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, नामांकन पत्र दाखिल करते समय तकनीकी चूक या असमंजस के चलते उन्होंने कांग्रेस के बजाय राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के उम्मीदवार के रूप में पर्चा भर दिया और साथ ही आरएलपी का आधिकारिक सिंबल या टिकट भी जमा नहीं करवा पाईं।
मंगलवार को जब निर्वाचन अधिकारियों द्वारा नामांकन पत्रों की संवीक्षा (स्क्रूटनी) की गई, तो इस बड़ी तकनीकी त्रुटि के कारण ममता सांसी का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद वार्ड 69 में भाजपा प्रत्याशी लीला गहलोत के मुकाबले अन्य कोई भी वैध उम्मीदवार मैदान में नहीं बचा। नियमों के अनुपालन में निर्वाचन प्रशासन ने लीला गहलोत को निर्विरोध विजयी घोषित कर दिया।
भाजपा खेमे में जश्न का माहौल
बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों के इस चुनावी रण में यह पहली सीट है जहां मतदान से पहले ही भाजपा का खाता खुल गया है। इस खबर के सामने आते ही भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी उत्साह व जश्न का माहौल देखने को मिला। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तकनीकी लापरवाही के चलते विपक्षी दल को शुरुआती चरण में ही एक सीट गंवानी पड़ी है, जो भाजपा के लिए एक बड़ी मनोवैज्ञानिक बढ़त साबित हो रही है।


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