— परिजनों का गंभीर आरोप: बीकानेर के पीबीएम अस्पताल स्थित सीएम मूंधड़ा विंग में 70 वर्षीय मरीज रोशन की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया।
— व्हीलचेयर के लिए आधे घंटे इंतजार: परिजनों का दावा है कि गंभीर हालत और सांस की तकलीफ के बावजूद इमरजेंसी से वार्ड में शिफ्ट करने के लिए करीब आधे घंटे तक मांगने पर भी व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल सका।
— तनावपूर्ण माहौल और जांच की मांग: घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई; हालांकि, मौत के वास्तविक चिकित्सकीय कारणों और प्रशासनिक पक्ष की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बीकानेर: शहर के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में व्यवस्थाओं की पोल खोलती एक संवेदनशील घटना सामने आई है। अस्पताल के सीएम मूंधड़ा विंग में मंगलवार को इलाज के दौरान एक बुजुर्ग मरीज की मौत हो जाने के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने अस्पताल के चिकित्सा स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाते हुए परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
इमरजेंसी से वार्ड शिफ्टिंग के दौरान बिगड़ी तबीयत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 70 वर्षीय मरीज रोशन को गंभीर हालत में पीबीएम अस्पताल लाया गया था, जहां उन्हें इमरजेंसी से दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया जाना था। परिजनों का आरोप है कि मरीज को सांस लेने में भारी परेशानी हो रही थी और उसकी स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई थी। ऐसी आपात स्थिति में परिजनों ने वार्ड तक ले जाने के लिए अस्पताल के कर्मचारियों से तुरंत व्हीलचेयर या स्ट्रेचर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
आधे घंटे तक नहीं मिली व्हीलचेयर
परिजनों का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद अस्पताल के जिम्मेदार स्टाफ ने करीब आधे घंटे तक कोई सुध नहीं ली और न ही व्हीलचेयर मुहैया कराई गई। इस बीच मरीज की हालत और अधिक बिगड़ती चली गई और अंततः वार्ड में पहुंचने से पहले ही उसकी सांसे थम गईं। मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ पर भारी लापरवाही का आरोप लगाया।
उनका कहना था कि यदि समय रहते व्हीलचेयर मिल जाती और मरीज को तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचा दिया जाता, तो शायद यह अनहोनी टाली जा सकती थी। घटना के तुरंत बाद अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया था। हालांकि, इस पूरे मामले पर अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि व्हीलचेयर की अनुपलब्धता और मरीज की मौत के बीच के घटनाक्रम की तथ्यात्मक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति साफ हो सकेगी।

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