— गंभीर आरोप: बीकानेर के सिटी कोतवाली थाने में अधिवक्ता द्वारका प्रसाद चावला के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा धक्का-मुक्की, मारपीट और कान का पर्दा फटने जैसी गंभीर चोट पहुँचाने का आरोप लगाया गया है।
— मेडिकल जांच में खुलासा: पीड़ित अधिवक्ता के अनुसार, थाने में सुनवाई न होने पर उन्होंने पीबीएम अस्पताल के ईएनटी (ENT) विभाग में जाँच कराई, जहाँ बाएं कान का पर्दा फटने की बात सामने आई है।
— बार काउंसिल का हस्तक्षेप: बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के कार्यवाहक सचिव विकास ढाका ने बीकानेर पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर मामले की व्यक्तिगत जाँच कराने और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बीकानेर। सीटी कोतवाली थाने में एक अधिवक्ता के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित मारपीट का मामला सामने आया है। अधिवक्ता द्वारका प्रसाद चावला की शिकायत को लेकर बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के सदस्य कुलदीप कुमार शर्मा सहित बार से जुड़े पदाधिकारियों के समक्ष मामला उठाया गया है।
शिकायत के अनुसार, 27 सितंबर की सुबह अधिवक्ता चावला अपने भाई के साथ सीटी कोतवाली पहुंचे थे। आरोप है कि थाने में ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और उन्हें एचएम कार्यालय में ले जाकर मारपीट की। शिकायत में थप्पड़ मारने, बाल खींचने और मुक्के मारने सहित अन्य आरोप लगाए गए हैं।
कान के पर्दे में चोट का आरोप
अधिवक्ता ने शिकायत में आरोप लगाया है कि कथित मारपीट के दौरान उनके बाएं कान पर जोर से थप्पड़ मारा गया। इसके बाद उन्हें कान में दर्द और सुनाई नहीं देने की समस्या हुई।
शिकायत के मुताबिक थाने में मेडिकल नहीं करवाया गया, जिसके बाद उन्होंने पीबीएम अस्पताल के नाक-कान-गला विभाग में जांच करवाई। वहां बाएं कान का पर्दा फटने की बात सामने आने का दावा शिकायत में किया गया है।
बार काउंसिल ने एसपी को लिखा पत्र
मामले में बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के कार्यवाहक सचिव विकास ढाका ने 30 सितंबर 2026 को बीकानेर पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा है। पत्र में अधिवक्ता की शिकायत का उल्लेख करते हुए मामले की व्यक्तिगत रूप से जांच कराने और आरोपों की शीघ्र जांच कराए जाने का अनुरोध किया गया है।
पत्र में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग
अधिवक्ता की शिकायत में सीटी कोतवाली थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को महत्वपूर्ण साक्ष्य बताते हुए उसे सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।
फिलहाल उपलब्ध शिकायत के आधार पर आरोप सामने आए हैं। पुलिस का पक्ष और मामले की जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी।

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