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बीकानेर में राजनीतिक भूचाल: गैंगस्टर के गुर्गे विष्णु साध की गिरफ्तारी के बाद भाजपा नेताओं के साथ फोटो वायरल, मनीष लांबा की रिहाई पर उठे सवाल

India-1stNews



​— बड़ी राजनीतिक हलचल: कोटगेट थाने में सालभर पहले दर्ज गंभीर मामले में गिरफ्तार गैंगस्टर रोहित गोदारा के गुर्गे विष्णु साध की भाजपा नेताओं के साथ तस्वीरें वायरल होने के बाद बीकानेर में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

— पुलिस की कार्यशैली पर सवाल: आरोपी विष्णु नगर निगम चुनावों के दौरान प्रदेश और स्थानीय स्तर के कई भाजपा नेताओं के साथ खुलेआम घूमता रहा और सोशल मीडिया पर पोस्ट भी करता रहा, लेकिन पुलिस की पकड़ से दूर रहा।

— मनीष लांबा की रिहाई पर विवाद: जयपुर से विष्णु साध के साथ पकड़े गए स्वर्ण व्यवसायी मनीष सोनी लांबा को तीन दिन की पूछताछ के बाद छोड़ दिए जाने पर पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिस पर कानूनी प्रावधानों और राजनीतिक दबाव की चर्चाएं जोरों पर हैं।

​बीकानेर में कुख्यात गैंगस्टर रोहित गोदारा के नाम पर फिरौती मांगने और आपराधिक षड्यंत्र रचने के मामले में गिरफ्तार किए गए आदतन अपराधी विष्णु साध की गिरफ्तारी ने शहर की सियासत और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस द्वारा उसे जयपुर से दबोचने और इसके बाद सामने आई तस्वीरों ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है।

​निगम चुनावों में भाजपा नेताओं के साथ घूमता रहा वांटेड अपराधी

​विष्णु साध के खिलाफ कोटगेट थाने में 14 अक्टूबर 2025 को गैंगस्टर रोहित गोदारा के लिए काम करने और व्यवसायियों को धमकी देकर फिरौती मांगने का गंभीर मामला दर्ज था, जिसमें वह लंबे समय से वांछित चल रहा था।

​हैरानी की बात यह है कि एक तरफ पुलिस उसे ढूंढने का दावा कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ वह नगर निगम चुनावों के दौरान बीकानेर में सक्रिय रूप से भाजपा नेताओं के साथ मंचों, बैठकों और प्रचार अभियानों में नजर आ रहा था।

​सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, भाजपा आईटी सेल के अविनाश जोशी, अध्यक्ष सुमन छाजेड़, प्रवासी प्रकोष्ठ के अनिल जोशी, चुनाव प्रभारी महावीर सैनी, विधायक जेठानंद व्यास और मेयर प्रत्याशी सुरेन्द्रसिंह शेखावत जैसे प्रमुख नेताओं के साथ विष्णु साध साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। इस खुलासे के बाद से स्थानीय लोगों और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मंगलवार को कोर्ट में पेश कर पुलिस ने उसे एक दिन के रिमांड पर लिया है।

​मनीष लांबा की रिहाई पर उठे सवाल, कानून और राजनीतिक दबाव की चर्चा

​इस पूरे प्रकरण में स्वर्ण व्यवसायी मनीष सोनी लांबा की भूमिका को लेकर भी विवाद गहरा गया है। पुलिस नयाशहर और कोटगेट थाने की संयुक्त टीम के जरिए विष्णु साध के साथ मनीष लांबा को भी जयपुर स्थित उसके फ्लैट से पकड़कर बीकानेर लाई थी।

​कानून जानकारों और आमजन का सवाल है कि यदि विष्णु आदतन अपराधी है और उसे जयपुर में शरण दी गई थी, तो बी.एन.एस. की धारा 249 ("अपराधी को शरण देना या छिपाना") के तहत आरोपी को छिपाने वाले पर भी वैधानिक कार्रवाई होनी चाहिए थी। तीन दिन की पूछताछ के बाद केवल विष्णु को गिरफ्तार कर मनीष लांबा को छोड़ दिए जाने से पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

​सूत्रों का यह भी दावा है कि इस मामले में सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के कुछ रसूखदार नेताओं द्वारा दबाव बनाया गया था, जिसके चलते पुलिस ने नरमी बरती। स्वर्णकार समाज के कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच हो, तो कई अन्य बड़े खुलासे और वित्तीय लेन-देन की परतें भी खुल सकती हैं।

​इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रदेश महामंत्री श्रवणसिंह बागड़ी ने कहा है कि गैंगस्टर से जुड़े किसी शख्स के भाजपा नेताओं के साथ होने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है और वे जिला पदाधिकारियों से पता करके ही इस पर कुछ कह पाएंगे, साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में ऐसे आपराधिक तत्वों के लिए कोई जगह नहीं है।

फिलहाल विष्णु साध से पूछताछ और मामले की जांच जारी है। पुलिस की ओर से जांच के निष्कर्ष और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका पर आधिकारिक जानकारी आने के बाद ही पूरे प्रकरण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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