— न्यायालय का कड़ा रुख: स्थायी लोक अदालत (जनोपयोगी सेवा) के निर्णय (पंचाट) की पालना नहीं करने पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या-6 ने टाटा कैपिटल लिमिटेड के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए कुर्की वारंट जारी किया और बैंक खाता सीज करवा दिया।
— 19.40 लाख रुपए की रिकवरी: इस कानूनी कार्रवाई के परिणामस्वरूप परिवादी रामनिवास बिश्नोई को ब्याज और हर्जाने सहित कुल 19 लाख 40 हजार रुपए की राहत राशि प्राप्त हुई।
— अधिवक्ता की प्रभावी पैरवी: इस पूरे प्रकरण में परिवादी की ओर से पैरवी अधिवक्ता जितेंद्र कुमार बिश्नोई द्वारा की गई।
बीकानेर: स्थायी लोक अदालत के आदेशों की अवहेलना करना वित्तीय कंपनियों को किस हद तक भारी पड़ सकता है, इसका एक बड़ा उदाहरण बीकानेर में सामने आया है। पंचाट के बावजूद तय समय पर भुगतान न करने पर न्यायालय द्वारा टाटा कैपिटल लिमिटेड के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त विवरण के अनुसार, परिवादी रामनिवास बिश्नोई (निवासी- बंगला नगर, बीकानेर) ने वाहन खरीद से जुड़े एक विवाद को लेकर टाटा कैपिटल लिमिटेड के खिलाफ स्थायी लोक अदालत (जनोपयोगी सेवा) में परिवाद दायर किया था।
स्थायी लोक अदालत ने 29 सितंबर 2025 को निर्णय पारित करते हुए कंपनी को निर्देश दिए थे कि वह वाहन की मूल राशि 15,60,308 रुपये एक महीने के भीतर जमा कराए। इसके अलावा, मानसिक संताप के लिए 25,000 रुपये और परिवाद व्यय के रूप में 10,000 रुपये देने के भी आदेश दिए गए थे, साथ ही भुगतान में देरी होने पर ब्याज देय होने का प्रावधान भी तय किया गया था।
बैंक खाता सीज होने के बाद हुआ भुगतान
कंपनी की ओर से अदालत के पंचाट के अनुसार समयानुसार भुगतान नहीं किया गया, जिसके बाद परिवादी को न्याय के लिए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या-6, बीकानेर के समक्ष निष्पादन (इजराय) की कार्रवाई दाखिल करनी पड़ी।
न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाया और कुर्की वारंट जारी करते हुए टाटा कैपिटल लिमिटेड का बैंक खाता सीज करवा दिया। इस प्रभावी न्यायिक कार्रवाई के बाद परिवादी को ब्याज व हर्जाना जोड़कर कुल 19 लाख 40 हजार रुपये की राशि प्राप्त हो गई। मामले में परिवादी की पैरवी अधिवक्ता जितेंद्र कुमार बिश्नोई द्वारा की गई थी।

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