— बड़ी खबर: दीपावली के पावन अवसर पर बीकानेर शहर को भव्य तरीके से सजाया गया है, लेकिन उपनगर गंगाशहर क्षेत्र में सजावट के नाम पर महज औपचारिकता निभाए जाने से स्थानीय निवासियों और प्रबुद्धजनों में गहरा आक्रोश है।
— विकास मंच का विरोध: 'गंगाशहर विकास मंच' के बैनर तले बीकानेर कलेक्टर निशांत जैन, निगम आयुक्त सिद्धार्थ पालनीचामी, महापौर अनिल कल्ला, पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास व भाजपा जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़ सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को संदेश भेजकर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है।
— भामाशाहों की नगरी की उपेक्षा का आरोप: मंच के सदस्यों ने कहा कि दानशीलता, धर्म और व्यापार के क्षेत्र में अग्रणी रहने वाले भामाशाहों की नगरी गंगाशहर के साथ हर विकास कार्य और साज-सज्जा में हमेशा सौतेला व्यवहार किया जाता है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बीकानेर। रोशनी और उल्लास के महापर्व दीपावली के दौरान जहाँ एक ओर पूरा बीकानेर शहर रंग-बिरंगी लाइटों और भव्य सजावट से नहाया हुआ है, वहीं दूसरी ओर उपनगर गंगाशहर के निवासियों ने प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया है। शहर के मुख्य हिस्सों (जैसे पंचशती सर्किल, पब्लिक पार्क, जूनागढ़ और परकोटे के भीतर के बाजारों) की तुलना में गंगाशहर में केवल चुनिंदा चौकों पर मामूली सजावट किए जाने से स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
गंगाशहर विकास मंच ने खोला मोर्चा, सोशल मीडिया पर जताया विरोध
क्षेत्र के विकास और हितों के लिए मुखर संस्था 'गंगाशहर विकास मंच' ने इस भेदभाव के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाई है। मंच से जुड़े प्रबुद्धजनों ने सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों से बीकानेर जिला कलेक्टर निशांत जैन, नगर निगम आयुक्त सिद्धार्थ पालनीचामी, महापौर अनिल कल्ला, पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास और भाजपा जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़ को अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
मंच के इंदर चंद गोलछा ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि गंगाशहर बीकानेर का एक प्रमुख और बड़ा उपनगर है, लेकिन विभिन्न विकास कार्यों और आयोजनों में इसके साथ हमेशा सौतेला व्यवहार किया जाता है। नवरतन बोथरा ने कहा कि पर्व के समय अच्छी सजावट से बाजार में रौनक बढ़ती है और व्यापार को गति मिलती है। वहीं राजेश बुच्चा ने कहा कि मामला भले ही छोटा लगे, लेकिन यह इस बात का प्रमाण है कि इस उपनगर की निरंतर उपेक्षा की जा रही है।
महापौर अनिल कल्ला ने भी शहर के सभी 80 वार्डों में विशेष सजावट करवाने के निर्देश जारी किए थे। जो कि चुनिंदा वार्डो में ही कार्य हो पाए जबकि गंगाशहर के किसी वार्ड में ऐसी कोई सजावट या सफाई व्यवस्था धरातल पर नही दिखी।सड़को पर मोहल्लों में अभी भी कचरे के अंबार लगे पड़े है। दीवाली में भी हाइवे के दोनों तरफ हो या डिवाइडर पर धूल से डटे हुए है। आखिर अधिकारियों की मॉनिटरिंग आमजन को दिखाई दे रही है।
गंगाशहर के योगदान के बावजूद उपेक्षा क्यों?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गंगाशहर भामाशाहों की वह नगरी है, जहाँ से धर्म, शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक कार्यों और राजनीति के क्षेत्र में हमेशा सर्वाधिक आर्थिक सहयोग और समर्थन दिया जाता रहा है। प्रशासन, पुलिस और राजनीतिक दल—सभी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गंगाशहर से संबल मिलता है, इसके बावजूद इस क्षेत्र को हर बार विकास और सुविधाओं के मामले में पीछे छोड़ दिया जाता है।
इस विरोध प्रदर्शन और जागरूकता अभियान में मंच के प्रमुख सदस्यों—राजेश बैद, मनीष बाफना, इंदर चंद गोलछा, जवाहर मल सेठिया, नवरतन बोथरा, शिखर चंद डागा, सुधीर लुणावत, गोविंद सारस्वत, राजेश बुच्चा, मनोज पारख, नवीन सोलंकी, चांद मल बोथरा, मनोज सेठिया, रामकरण तंवर, धीरज पंचारिया, शिव शंकर उपाध्याय, बच्छराज गुलगुलिया, कन्हैयालाल बोथरा (एडवोकेट), धनराज भाटी और हेमराज जाजड़ा सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के आमजन ने खुलकर अपनी आवाज बुलंद की है।
अब देखना यह होगा कि इस मुखर विरोध के बाद जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपनगर गंगाशहर की इस उपेक्षा को दूर करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।



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