– बसंत पंचमी और पराक्रम दिवस: इतिहास का सच आया सामने; वीसी ने कहा- ब्रिटिश पीएम एटली ने माना था, आजाद हिंद फौज के डर से मिली थी आजादी
– सांस्कृतिक रंग: सितार और तबले पर गूंजा आजाद हिंद का 'पहला राष्ट्रगान'; डॉ. मेघना शर्मा ने बताया बसंती रंग को ऊर्जा का प्रतीक
बीकानेर, 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार)।महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (MGSU) में शुक्रवार को विद्या की देवी सरस्वती और राष्ट्रनायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस का उत्सव एक साथ मनाया गया। अवसर था 'बसंती पंचमी उत्सव' और 'पराक्रम दिवस' का।
समारोह में जहां बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय (BTU) के कुलगुरु ने युवाओं को बोस से 'संकट प्रबंधन' (Crisis Management) सीखने की सलाह दी, वहीं MGSU के कुलगुरु ने कैंपस में 'नेताजी उद्यान' बनाने की बड़ी घोषणा की।
विपरीत हालात में कैसे खड़ी करें फौज?
मुख्य अतिथि BTU के कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग ने प्रबंधन का एक नया पाठ पढ़ाया।
- सीख: उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को बोस के जीवन से 'संकट प्रबंधन' के गुर सीखने चाहिए।
- उदाहरण: कैसे विपरीत परिस्थितियों में, बिना संसाधनों के उन्होंने न सिर्फ आजाद भारत का सपना देखा, बल्कि देश से बाहर रहकर स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए अपनी एक पूरी फौज खड़ी कर दी। यह 'मैनेजमेंट' का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।
इतिहास के पन्ने और बड़ा ऐलान
अध्यक्षीय उद्बोधन में MGSU के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने इतिहास के अनछुए पहलुओं पर बात की।
- एटली का कबूलनामा: उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली के उस वक्तव्य का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने स्वीकारा था कि भारत को स्वतंत्रता देने का मुख्य कारण 'आजाद हिंद फौज' का डर था।
- सवाल: कुलगुरु ने सवाल उठाया कि क्या इतिहास ने नेताजी के साथ न्याय किया? वे आंतरिक विरोधों और षड्यंत्रों का शिकार बने।
- घोषणा: नेताजी की स्मृति को चिरस्थाई बनाने के लिए कुलगुरु ने निकट भविष्य में विश्वविद्यालय परिसर में 'नेताजी उद्यान' स्थापित करने की घोषणा की।
सितार पर गूंजा 'शुभ सुख चैन...'
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
- अनोखी प्रस्तुति: पंडित राजेंद्र जोशी और उनकी टीम ने तबले व सितार पर आजाद हिंद फौज द्वारा गाया गया प्रथम राष्ट्रगान (शुभ सुख चैन की बरखा...) प्रस्तुत कर माहौल को देशभक्ति से भर दिया।
- बसंती रंग: इससे पहले स्वागत भाषण में डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर (DSW) डॉ. मेघना शर्मा ने विषय प्रवर्तन किया। उन्होंने बसंती रंग को प्रकाश, पवित्रता, ऊर्जा और विवेक का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि 'आत्मनिर्भर भारत' का जो सपना आज सरकारें देख रही हैं, उसकी नींव बोस ने बहुत पहले रख दी थी।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन सह-अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. प्रभुदान चारण ने किया। मंच पर वित्त नियंत्रक देवेंद्र सिंह राठौड़ मौजूद थे। आयोजन में प्रो. राजाराम चोयल, डॉ. ज्योति लखानी, डॉ. अनिल कुमार दुलार, डॉ. गौतम मेघवंशी, डॉ. धर्मेश हरवानी, डॉ. लीला कौर, डॉ. अभिषेक वशिष्ठ और कमलकांत शर्मा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक व विद्यार्थी शामिल हुए।

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