— बढ़ती जा रही त्रासदी: फलोदी की प्रीति के बाद अब श्रीरामसर निवासी शारदा (26) की भी गई आंखों की रोशनी; सिजेरियन डिलीवरी के बाद 'हेल्प सिंड्रोम' का शिकार।
— वेंटिलेटर सपोर्ट पर सांसे: यूरिन रुकने और किडनी फेल होने के बाद शरीर के कई मुख्य अंगों ने काम करना बंद किया; बाइपैप के बाद अब पूरी तरह लाइफ सपोर्ट पर प्रसूता।
— मंत्री के 'हेल्थ बुलेटिन' पर सवाल: दो दिन पहले बीकानेर आए चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने शारदा को बताया था 'आउट ऑफ डेंजर'; नई मेडिकल रिपोर्ट ने खोली दावों की पोल।
— एम्स और विधिक कमेटियों की रिपोर्ट का इंतजार: दवाइयों के विधिक सैंपल्स और ओटी इन्फेक्शन की रिपोर्ट का अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं; आक्रोश की आग में सुलग रहा बीकानेर।
बीकानेर, 13 जून (शनिवार)। बीकानेर के संभाग स्तरीय पीबीएम (PBM) अस्पताल के जनाना विंग में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की किडनी फेल होने और कथित 'कातिल इंजेक्शन' के विधिक कोहराम के बीच शनिवार को एक और रूह कंपा देने वाली और बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। आईसीयू (ICU) के वेंटिलेटर सपोर्ट पर जिंदगी और मौत के बीच झूल रही श्रीरामसर निवासी 26 वर्षीय प्रसूता शारदा की आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई है। सिजेरियन ऑपरेशन के बाद एक-एक कर उसके शरीर के मुख्य अंगों ने काम करना बंद कर दिया है, जिससे वह मल्टी ऑर्गन फेलियर (MOF) जैसी अत्यधिक क्रिटिकल विधिक स्थिति से जूझ रही है। इस नए और दर्दनाक खुलासे के बाद दो दिन पहले ही बीकानेर आकर 'सब कुछ नियंत्रण में' होने का दावा करने वाले सूबे के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के विधिक बयानों और अस्पताल प्रशासन के दावों की पूरी तरह पोल खुल गई है।
4 जून को हुई थी सिजेरियन डिलीवरी, महज 2 घंटे बाद ही शुरू हो गया था 'स्लो पॉइजन'
प्राप्त आधिकारिक विधिक जानकारी और केस शीट के अनुसार, बीकानेर के श्रीरामसर क्षेत्र की रहने वाली शारदा को प्रसव पीड़ा होने पर गत 3 जून को पीबीएम के जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
- ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत: डॉक्टरों की टीम ने 4 जून को उसकी सिजेरियन डिलीवरी (C-Section) करवाई, जिसके बाद उसने एक स्वस्थ नवजात को जन्म दिया। लेकिन खुशियों का यह माहौल महज दो घंटे ही टिक सका। ऑपरेशन थियेटर से वॉर्ड में शिफ्ट होने के दो घंटे बाद ही शारदा को सांस लेने में भयंकर तकलीफ शुरू हो गई और उसका यूरिन आउटपुट (पेशाब) पूरी तरह ब्लॉक हो गया।
- आईसीयू में शिफ्टिंग: स्थिति नियंत्रण से बाहर होते देख डॉक्टरों ने अगले ही दिन 5 जून की सुबह उसे आपातकालीन स्थिति में आईसीयू (ICU) में शिफ्ट कर दिया।
खतरनाक 'हेल्प सिंड्रोम' की चपेट में शारदा, बाइपैप के बाद अब वेंटिलेटर पर
आईसीयू विंग के नेफ्रॉलॉजिस्ट और क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट्स द्वारा की गई गहन क्लिनिकल जांच में सामने आया कि शारदा की किडनी पूरी तरह डैमेज हो चुकी है। चिकित्सकीय विधिक सूत्रों के अनुसार, वह गर्भावस्था की सबसे घातक और रेयर जटिलता 'हेल्प सिंड्रोम' (HELLP Syndrome) की चपेट में आ चुकी है।
इस सिंड्रोम के तीव्र प्रभाव के कारण उसके दिमाग की नसों और ऑप्टिक नर्व पर गहरा दबाव पड़ा, जिसके चलते अचानक उसकी आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई और उसे दिखाई देना पूरी तरह बंद हो गया। फेफड़ों में पानी भरने और मल्टी ऑर्गन डिस्फंक्शन के चलते पहले उसे 'बाइपैप' (BIPAP) मशीन पर रखा गया था, लेकिन फेफड़ों द्वारा ऑक्सीजन छोड़ देने के बाद अब उसे पूर्ण वेंटिलेटर सपोर्ट पर ले लिया गया है।
चिकित्सा मंत्री खींवसर ने बताया था 'डेंजर जोन से बाहर', दावों पर खड़े हुए विधिक सवाल
शारदा की आंखों की रोशनी जाने और शरीर के कई अंगों के फेल होने की इस विधिक रिपोर्ट ने राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल ला दिया है। गौरतलब है कि गत गुरुवार (11 जून) को बीकानेर के दौरे पर आए चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने एसपी मेडिकल कॉलेज में जोधपुर एम्स (AIIMS) की टीम के साथ विधिक समीक्षा बैठक की थी।
बैठक के बाद मंत्री ने मीडिया के सामने जो आधिकारिक 'हेल्थ बुलेटिन' जारी किया था, उसमें उन्होंने शारदा का नाम लेकर दावा किया था कि वह अब पूरी तरह 'डेंजर जोन' से बाहर है। अब महज 48 घंटे के भीतर प्रसूता के वेंटिलेटर पर पहुंचने और अंधापन (आंखों की रोशनी जाने) की पुष्टि होने से कांग्रेस और स्थानीय सामाजिक संगठनों का गुस्सा भड़क गया है। परिजनों का आरोप है कि मंत्री और अस्पताल प्रशासन विधिक रूप से अपनी गर्दन बचाने के लिए प्रसूताओं की गंभीर स्थिति को लगातार छुपा रहे थे।
सूरतगढ़ की प्रीति की भी जा चुकी है रोशनी, 'बैच नंबर' पर गहराया शक
शारदा अकेली ऐसी प्रसूता नहीं है जिसके साथ यह अमानवीय त्रासदी हुई है। इससे पहले पीबीएम के इसी आईसीयू वॉर्ड में वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही सूरतगढ़ निवासी 20 वर्षीय प्रीति की भी आंखों की रोशनी पूरी तरह जाने की विधिक पुष्टि डॉक्टर्स पहले ही कर चुके हैं।
एक ही वॉर्ड और एक ही समय अंतराल (10 से 15 दिन) के भीतर दो अलग-अलग प्रसूताओं की किडनी फेल होना और फिर दोनों की आंखों की रोशनी का चले जाना, यह साफ तौर पर किसी एक ही विशेष बैच नंबर के घटिया/दूषित इंजेक्शन (ऑक्सीटोसिन या एनेस्थीसिया ड्रग) या फिर ऑपरेशन थिएटर के भीतर किसी बेहद घातक और जानलेवा बैक्टीरियल इन्फेक्शन की तरफ विधिक रूप से इशारा कर रहा है।
सिस्टम मौन: जांच समितियों की अंतिम विधिक रिपोर्ट का इंतजार
बीकानेर पीबीएम के इस महा-लापरवाही कांड को लेकर वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा विभाग अलर्ट पर है। जोधपुर एम्स की ड्रग्स और क्लिनिकल विंग, राजस्थान ड्रग कंट्रोलर विभाग और पीबीएम अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया द्वारा गठित दो पृथक-पृथक विशेषज्ञ विधिक समितियां मामले के अनुसंधान में जुटी हुई हैं।
अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर के स्वैब सैंपल्स, नागौर से बदली गई दवाओं के पुराने सैंपल्स और प्रसूताओं के ब्लड कल्चर की अंतिम फॉरेंसिक व विधिक रिपोर्ट का अभी भी इंतजार किया जा रहा है। आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने में हो रही इस प्रशासनिक देरी को लेकर बीकानेर कलेक्ट्रेट और पीबीएम के बाहर कांग्रेस का अनिश्चितकालीन धरना व महापड़ाव और उग्र हो गया है। प्रबुद्ध नागरिकों ने मांग की है कि जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दोषियों पर तुरंत गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।

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