— बदलाव की छोटी शुरुआत: विश्व पर्यावरण दिवस पर अणुव्रत समिति गंगाशहर ने ऊर्जा संरक्षण के लिए लोगों को 'एसी बंद' रखने के संकल्प से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
— खेजड़ी के संरक्षण पर जोर: मुनिश्री अमृत कुमार जी और मुनिश्री उपशम कुमार जी के पावन सान्निध्य में बोथरा भवन में आयोजित हुआ विशेष जागरूकता कार्यक्रम।
— प्लास्टिक मुक्त अभियान: आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान परिसर में किया गया सघन पौधरोपण; आमजन को बांटे गए कपड़े के थैले।
बीकानेर/गंगाशहर, 5 जून (शुक्रवार)। विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के तत्वावधान में अणुव्रत समिति गंगाशहर द्वारा बोथरा भवन के प्रांगण में एक भव्य एवं प्रेरणास्पद "पर्यावरण जागरूकता अभियान कार्यक्रम" का आयोजन किया गया। इस वर्ष भीषण गर्मी और बिजली संकट को देखते हुए समिति ने एक बेहद अनूठी और सराहनीय पहल की शुरुआत की है। कार्यक्रम के माध्यम से प्रकृति और ऊर्जा के संरक्षण हेतु आमजन से दोपहर 2:00 बजे से लेकर 4:00 बजे तक अपने घरों व प्रतिष्ठानों के एसी (AC) बंद रखने का विशेष आह्वान करते हुए संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सह-मंत्री मनोज छाजेड़ द्वारा पर्यावरण चेतना पर आधारित एक सुमधुर गीतिका की प्रस्तुति के साथ हुआ। इसके बाद गंगाशहर अणुव्रत समिति के अध्यक्ष करणीदान रांका ने स्वागत उद्बोधन देते हुए सभी आगंतुकों और पर्यावरण प्रेमियों का अभिनंदन किया।
संतों का पाथेय: "खेजड़ी राजस्थान का कल्पवृक्ष, अनावश्यक बिजली व वाहनों पर लगे रोक"
समारोह में संतों के पावन संदेशों ने उपस्थित जनमेदिनी को पर्यावरण के प्रति कर्तव्यों का बोध कराया:
- मुनिश्री अमृत कुमार जी का संदेश: अध्यक्ष करणीदान रांका ने मुनिश्री के पावन 'मंगलपाथेय' को साझा करते हुए कहा कि अणुव्रत असल में मानव को सच्चा मानव बनाने की एक विधिक प्रक्रिया है। अणुव्रत के संकल्प सूत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए जो तीन विशेष संकल्प दिए गए हैं, उन्हें हर व्यक्ति को स्वयं से शुरू कर समाज में फैलाना चाहिए। मुनिश्री ने चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान में राजस्थान के गौरव और कल्पवृक्ष माने जाने वाले 'खेजड़ी' वृक्ष को बहुतायत से काटा जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।
- मुनिश्री उपशम कुमार जी का वक्तव्य: समिति के मंत्री कन्हैयालाल बोथरा ने मुनिश्री के वक्तव्य को रेखांकित किया, जिसमें उन्होंने कहा कि हमें समस्या के मूल को पकड़ना होगा। वर्तमान में अनावश्यक बिजली के उपयोग और विलासिता के लिए बढ़ रहे वाहनों के प्रयोग को सीमित करना बेहद जरूरी है। जीवन की छोटी-छोटी आदतों को सुधारकर हम धरती को सुरक्षित रख सकते हैं।
आचार्य तुलसी की दूरदर्शिता थी अणुव्रत संकल्प सूत्र: डॉ. नीलिमा
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता एवं पर्यावरण जागरूकता अभियान की राष्ट्रीय संयोजक डॉ. नीलिमा जैन ने वर्तमान वैश्विक पर्यावरण संकट पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसंत आचार्य श्री तुलसी अत्यंत दूरदर्शी थे, जिन्होंने दशकों पहले ही अणुव्रत के नियमों में प्रकृति और जीव रक्षा की बातें समाहित कर दी थीं। उन्होंने आह्वान किया कि पर्यावरण को बचाने के लिए हमें व्यक्ति से व्यक्ति को जोड़कर एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा करना होगा।
पर्यावरण प्रेमियों का हुआ सम्मान, विचारकों ने रखे मत
समारोह के दौरान पर्यावरण के क्षेत्र में विशिष्ट और अनुकरणीय कार्य करने के लिए पर्यावरण प्रेमी मूलचंद सामसूखा का अणुव्रत पताका, अणुव्रत पट और साहित्य भेंट कर भावभीना सम्मान किया गया। इसके साथ ही मुख्य वक्ता डॉ. नीलिमा जैन का भी महिला विंग द्वारा साहित्य व प्रतीक चिह्न देकर अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष किशन बैद, तेरापंथ न्यास के महामंत्री जतन दूगड़, अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद से ललित राखेचा, तेरापंथी सभा गंगाशहर से प्रकाश भंसाली, महिला मंडल की पूर्व अध्यक्ष संजू लालाणी और तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष देवेंद्र डागा ने भी पर्यावरण चेतना पर अपने ओजस्वी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में अणुव्रत विश्व भारती के पूर्व प्रचार-प्रसार मंत्री धर्मेंद्र डाकलिया और महावीर इंटरनेशनल के अध्यक्ष तिलोकचंद बाफना की गरिमामयी उपस्थिति रही।
शांति प्रतिष्ठान परिसर में 100 पौधों का रोपण व थैला वितरण
केवल गोष्ठी तक सीमित न रहकर समिति ने जमीनी स्तर पर भी कार्य किया। कार्यक्रम के अगले चरण में आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान परिसर में 100 छायादार व फलदार पौधे लगाए गए। इसके साथ ही सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर रोक लगाने के उद्देश्य से आमजन को कपड़े के थैलों का निःशुल्क वितरण किया गया। इस सेवा कार्य में डॉ. नीलिमा जैन, मूलचंद सामसूखा, धर्मेंद्र डाकलिया सहित अणुव्रत समिति की पूरी टीम ने सक्रिय योगदान दिया।
कार्यक्रम का अत्यंत कुशल संचालन समिति के उपाध्यक्ष मनीष बाफना द्वारा किया गया, जबकि सभी का आभार ज्ञापन उपाध्यक्ष मनोज सेठिया ने ज्ञापित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कन्हैयालाल बोथरा, मनोज पारख, शशि रांका, हेमा पारख, श्रेया गुलगुलिया, बुलबुल बुच्चा, कुशल बाफना, हेमराज गुलगुलिया, ताराचंद गुलगुलिया, डालचंद बुच्चा, बच्छराज गुलगुलिया, पुखराज दुगड़, जतन बैद और नवरतन रांका सहित अनेक कार्यकर्ताओं की सराहनीय भूमिका रही।


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