— हादसे में मरने वालों की संख्या हुई 7: मुकाम धाम धोक लगाकर लौट रहे फतेहाबाद के सुथार परिवार का कोई चिराग नहीं बचा; 10वीं-12वीं की परीक्षाओं जैसी उम्र वाले बच्चों संग पूरा कुनबा साफ।
— रिटायरमेंट के 15 दिन बाद ही पसरा मातम: 31 मई को डीडीपीओ ऑफिस से सीनियर अकाउंटेंट पद से सेवानिवृत्त हुए थे ओमप्रकाश; अमावस्या पर परिवार को साथ लेकर आए थे बीकानेर।
— कटर से काटकर निकाले गए थे शव: हेमासर और सिजराल होटल के पास डंपर ने कार को मारी थी टक्कर; स्टेयरिंग और सीट के बीच फंस गया था ओमप्रकाश का शव।
बीकानेर, 16 जून (मंगलवार)। बीकानेर-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-11) पर श्रीडूंगरगढ़ थाना क्षेत्र के हेमासर गांव के पास सोमवार दोपहर को हुए भीषण कार-डंपर हादसे में मंगलवार सुबह एक और अत्यंत दुखद खबर सामने आई है। इस रूह कंपा देने वाले हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई दो वर्षीय मासूम बच्ची तन्वी ने भी मंगलवार अलसुबह बीकानेर के पीबीएम अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
इस दर्दनाक मौत के साथ ही दुर्घटनाग्रस्त स्विफ्ट डिजायर कार में सवार सभी 7 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे ने हरियाणा के फतेहाबाद जिले के एक हंसते-खेलते प्रतिष्ठित परिवार को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब इस भरे-पूरे परिवार में पीछे रोने के लिए केवल एक बेटा और बहू ही बचे हैं।
31 मई को ही हुए थे रिटायर, मन्नत पूरी करने पहली बार पूरे परिवार को लाए थे मुकाम
पुलिस अनुसंधान और पारिवारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरियाणा के फतेहाबाद जिले के मताना गांव निवासी ओमप्रकाश सुथार (उम्र 60 वर्ष) फतेहाबाद के डीडीपीओ (DDPO) कार्यालय में सीनियर अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत थे। वे इसी वर्ष 31 मई को सेवामुक्त (रिटायर) हुए थे।
ओमप्रकाश सुथार की भगवान गुरु जम्भेश्वर में गहरी आस्था थी और वे हर महीने अमावस्या पर अकेले मुकाम धाम दर्शन के लिए बीकानेर आते थे। रिटायरमेंट के 15 दिन बाद उन्होंने मन्नत पूरी होने की खुशी में पहली बार अपने पूरे परिवार को साथ लिया और शनिवार को फतेहाबाद से मुकाम धाम के लिए रवाना हुए थे। शनिवार देर रात मुकाम पहुंचकर रविवार को पूरे परिवार ने दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की थी।
सोमवार सुबह 11 बजे निकले और ढाई बजे काल बन कर सामने आया डंपर
सोमवार सुबह करीब 11:00 बजे पूरा परिवार बेहद खुशहाली के साथ मुकाम धाम से वापस हरियाणा अपने घर लौटने के लिए रवाना हुआ था। पूरे रास्ते कार खुद ओमप्रकाश सुथार ही ड्राइव कर रहे थे।
दोपहर करीब 2:30 बजे जैसे ही उनकी कार श्रीडूंगरगढ़ थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-11 पर होटल नजद सिजराल और हेमासर गांव के पास पहुंची, सामने से आ रहे एक भारी लोडेड डंपर ने कार को भीषण टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि नेशनल हाईवे पर कई फीट तक टायरों के घिसटने के निशान बन गए और कार का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक कर मलबे में तब्दील हो गया।
कटर से काटे गए गाड़ी के शीशे और चद्दरें, ओमप्रकाश का शव स्टेयरिंग में फंसा
हादसे के तुरंत बाद श्रीडूंगरगढ़ थाना पुलिस और हाईवे गश्त टीम मौके पर पहुंची। कार के भीतर का मंजर इतना भयावह था कि ओमप्रकाश सुथार का शव स्टेयरिंग और ड्राइवर सीट के बीच बुरी तरह लॉक हो गया था। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से गैस कटर और क्रेन बुलवाई और गाड़ी की लोहे की चद्दरों को काटकर शवों को बाहर निकाला।
सोमवार को ही हादसे के दौरान कार चालक ओमप्रकाश सुथार (60), उनकी पत्नी सोरमा देवी (55), बेटी प्रमिला (30), दोहिती यशवी (10), दोहिती खुशी (8) और इकलौते पोते रोनित (4) की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी।
मासूम तन्वी ने पीबीएम में तोड़ा दम, फतेहाबाद से पहुंचे रोते-बिलखते परिजन
इस भीषण टक्कर में ओमप्रकाश की सबसे छोटी दोहिती तन्वी (2 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गई थी, जिसकी सांसें चलती देख पुलिस ने उसे तुरंत श्रीडूंगरगढ़ सीएचसी भिजवाया था। वहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम के साथ बीकानेर के पीबीएम अस्पताल रैफर किया गया था। पीबीएम के डॉक्टरों ने तन्वी को बचाने के लिए क्रिटिकल केयर यूनिट में अथक प्रयास किए, लेकिन आंतरिक रक्तस्राव और गहरी चोटों के कारण मंगलवार सुबह उसने भी दम तोड़ दिया।
हादसे की खबर सुनते ही फतेहाबाद के मताना गांव से सुथार समाज के सैकड़ों लोग और मृतका प्रमिला के ससुराल पक्ष के लोग श्रीडूंगरगढ़ पहुंच चुके हैं। एक साथ परिवार के 7 सदस्यों (माता-पिता, बेटी, पोता और तीन दोहितियों) के शव देखकर अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया। पुलिस ने सभी 7 शवों का पोस्टमार्टम करवाकर अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया है।

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