— 2 दिन की और मिली कस्टडी: 5 दिन की प्रारंभिक पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद एसीबी ने कोर्ट में किया पेश; 'उगाही तंत्र' और नकली बीज नेटवर्क खंगालने के लिए रविवार तक बढ़ी रिमांड।
— सर्विलांस से खुला राज: शुरुआत में अनजान बने डायरेक्टर जुगल किशोर के सामने जब एसीबी ने रखीं कॉल रिकॉर्डिंग्स, तो कबूला पूरा गुनाह; भांजे स्वतंत्र और सुनील के जरिए फर्म मालिक से लेता था घूस।
— अधिकारियों के नाम आए सामने: हनुमानगढ़ के कृषि अधिकारी सुरजीत पर ₹20 लाख लेने का आरोप; बीकानेर जोन के ज्वाइंट डायरेक्टर सतीश कुमार की जुगल किशोर से बातचीत का विधिक टेप आया सामने।
— पूछताछ में रोने लगा विधायक का पीए: एएसपी की कड़ाई के आगे जब विधायक पब्बाराम के पीए गणपत से ₹60 लाख के लेनदेन पर पूछा गया, तो आंखों से बहे आंसू; स्वतंत्र के मोबाइल पर लगातार आ रहे थे वीडियो कॉल।
बीकानेर, 12 जून (शुक्रवार)। राजस्थान राज्य बीज निगम से जुड़े करीब ढाई करोड़ रुपए के मेगा रिश्वतखोरी और उगाही कांड में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन विंग को एक और बड़ी विधिक सफलता हाथ लगी है। पांच दिन की प्रारंभिक कस्टडी रिमांड समाप्त होने पर शुक्रवार को एसीबी की टीम ने बीज निगम के नामित निदेशक जुगल किशोर बिश्नोई सहित सभी छह आरोपियों को कोर्ट के समक्ष पेश किया।
जांच एजेंसी द्वारा सिंडिकेट के वित्तीय लेन-देन, बेनामी संपत्तियों और नकली बीज कारोबार की कड़ियों को पूरी तरह जोड़ने के लिए और समय मांगे जाने पर माननीय न्यायालय ने सभी आरोपियों की विधिक पुलिस रिमांड को 2 दिन के लिए और बढ़ा दिया है। अब आरोपियों को रविवार को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा।
डिजिटल एविडेंस के आगे टूटे डायरेक्टर, भांजे के जरिए चलती थी उगाही
एसीबी सूत्रों से मिली विधिक जानकारी के अनुसार, रिमांड के शुरुआती दौर में मुख्य आरोपी जुगल किशोर विश्नोई बेहद शातिराना रवैया अपनाते हुए किसी भी सह-आरोपी या दलाल को पहचानने से साफ इनकार कर रहा था। लेकिन जब एसीबी के तकनीकी विंग ने सर्विलांस पर लिए गए मोबाइल नंबरों की वॉयस रिकॉर्डिंग, विधिक लोकेशन और व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट सामने रखे, तो डायरेक्टर का पूरा रसूख धरा रह गया।
- कबूलनामे का सच: जुगल किशोर ने कबूला कि वह बीज निगम की आधिकारिक सीज और ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई में जानबूझकर खुद बड़े अफसरों के साथ शामिल रहता था। इसके बाद वह फर्मों में खौफ पैदा करता था।
- भांजों का नेटवर्क: कार्रवाई के बाद मामले को पूरी तरह रफा-दफा करने और विधिक क्लीनचिट दिलाने की एवज में जुगल किशोर अपने सगे भांजे स्वतंत्र ज्याणी और दलाल सुनील सेतिया के जरिए संबंधित बीज व पेस्टीसाइड कंपनी के मालिकों से करोड़ों रुपए की डील फाइनल करता था।
हनुमानगढ़ और बीकानेर के आला अधिकारियों के विधिक कनेक्शन बेकाब
एसीबी की इस कस्टडी सर्विलांस रिपोर्ट ने कृषि विभाग के भीतर चल रहे एक बहुत बड़े रैकेट का पर्दाफाश कर दिया है। जांच में मुख्य रूप से दो बड़े प्रशासनिक नाम सामने आए हैं:
- सुरजीत (कृषि अधिकारी, हनुमानगढ़): जुगल किशोर और उसके भांजे स्वतंत्र के बीच गत 6 जून को हुई विधिक बातचीत के सर्विलांस इनपुट से खुलासा हुआ है कि कृषि विभाग हनुमानगढ़ के अधिकारी सुरजीत ने इस नेटवर्क को संरक्षण देने की एवज में 20 लाख रुपए की मोटी घूस ली थी।
- सतीश कुमार (ज्वाइंट डायरेक्टर, बीकानेर जोन): एसीबी द्वारा टैप किए गए मोबाइल विधिक नंबरों में सतीश कुमार (ज्वाइंट डायरेक्टर, कृषि विभाग, बीकानेर) का सीधा जिक्र आया है। टेप में सतीश कुमार सीधे डायरेक्टर जुगल किशोर से बातचीत करते हुए कह रहे हैं कि— "मैं मंडे (सोमवार) तक उनको बुलाता हूं।" एसीबी अब सतीश कुमार की भूमिका की भी विधिक पड़ताल कर रही है।
विधायक के पीए से ₹60 लाख का हिसाब पूछा तो फूट-फूट कर रोया
इन्वेस्टिगेशन के दौरान एक और हाई-वोल्टेज ड्रामा सामने आया। जब एसीबी के एएसपी आशीष कुमार ने मामले में गिरफ्तार विधायक पब्बाराम के पीए गणपत को सामने बैठाकर विधिक सख्ती से पूछा कि तुमने 60 लाख रुपए का प्रवाह किसे और कहां किया? तो आरोपी गणपत कोई जवाब नहीं दे पाया और दफ्तर में ही फूट-फूट कर रोने लगा।
इधर, गिरफ्तार आरोपी स्वतंत्र ज्याणी से जो दो स्मार्टफोन जब्त किए गए हैं, उसने उनका पासवर्ड (डिक्रिप्शन कोड) बताने से विधिक रूप से इनकार कर दिया है। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि जब स्वतंत्र को पहली बार पकड़ा गया था, तब भी उसके मोबाइल स्क्रीन पर लगातार मुख्य आरोपी जुगल किशोर, सुनीता और एफसीओ विजय की तरफ से लगातार इंटरनेट वीडियो कॉल आ रहे थे, जिससे साफ है कि यह पूरी चेन एक-दूसरे से डिजिटल रूप से जुड़ी हुई थी।
दूध की डेयरी चलाने वाला कैसे बना सीधे करोड़पति डायरेक्टर?
एसीबी की विधिक जांच में मुख्य सूत्रधार जुगल किशोर विश्नोई के साधारण शुरुआत से लेकर शीर्ष कुर्सी तक पहुंचने के सफर का जो कच्चा चिट्ठा सामने आया है, वह हैरान करने वाला है:
- साल 2007: जुगल किशोर श्रीगंगानगर के एक सुदूर गांव 13 डीओएल में एक बेहद साधारण और छोटी सी दूध की डेयरी का संचालन करता था।
- साल 2008: बीएससी (B.Sc) तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद वह गंगानगर से बीकानेर आ गया और यहां उसने एक निजी खाद, बीज और पेस्टीसाइड (कीटनाशक) कंपनी में मामूली वेतन पर नौकरी शुरू की।
- लूपहोल्स का फायदा: इस निजी नौकरी के दौरान उसने सरकारी टेंडरों, कृषि विभाग की सीज प्रणालियों और नियमों की कमियों (लूपहोल्स) को बारीकी से समझा और राजनीतिक आकाओं व प्रशासनिक अधिकारियों से अपनी विधिक साठगांठ मजबूत की।
- जनवरी 2026 में लॉटरी: अपनी इसी तगड़ी साठगांठ के रसूख के चलते जनवरी 2026 में उसे नियमों को ताक पर रखकर सीधे 'राजस्थान राज्य बीज निगम' का मनोनीत डायरेक्टर नियुक्त करवा दिया गया, जिसके बाद उसने रिश्वतखोरी का यह करोड़ों का खेल शुरू कर दिया।
6 आरोपी सलाखों के पीछे, अब तक ₹2.44 करोड़ का काला धन जब्त
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस पूरे महाघोटाले में अब तक डायरेक्टर जुगल किशोर बिश्नोई सहित कुल 6 मुख्य आरोपियों को विधिक रूप से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए सिंडिकेट के सदस्यों की सूची इस प्रकार है:
- जुगल किशोर बिश्नोई (नामित निदेशक, राजस्थान बीज निगम)
- स्वतंत्र ज्याणी (निदेशक का सगा भांजा व मुख्य रिकवरी एजेंट)
- किरण भाई कपाड़िए (गुजरात बेस्ड बीज कंपनी का मालिक/घूसदाता)
- सुनील कुमार सेतिया (निजी दलाल, सेतिया इंटरप्राइजेज, सिटी सेंटर, जयपुर)
- गणपत (विधायक पब्बाराम का निजी सहायक - PA)
- सतपाल सिंह जाज (सिंडिकेट का सक्रिय विधिक सदस्य)
एसीबी के महानिदेशक (DG) के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन के तहत अलग-अलग ठिकानों और बसों से की गई विधिक सर्च और छापेमारी के दौरान अब तक कुल 2 करोड़ 44 लाख रुपए की अकूत नकद राशि (Black Money) और करोड़ों की बेनामी संपत्तियों के विधिक कागजात बरामद किए जा चुके हैं। अब रविवार को दोबारा कोर्ट में पेशी के दौरान कई और बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरों के बेकाब होने की विधिक संभावना जताई जा रही है।

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