— आर्थिक गतिविधियों को मिलेगी नई रफ्तार: श्रम विभाग ने 'राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक संस्थान अधिनियम' के तहत जारी किया आदेश; रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे।
— शर्तों के साथ मिली पूर्ण आजादी: महिला कर्मचारियों की सुरक्षा, सीसीटीवी कैमरों की अनिवार्यता और रोटेशन के आधार पर 8 घंटे की ड्यूटी के नियम लागू रहेंगे।
— नाइट लाइफ और पर्यटन को बढ़ावा: बीकानेर, जयपुर, जोधपुर सहित बड़े शहरों के बाजार, रेस्टोरेंट और शॉपिंग मॉल्स अब रात में भी गुलजार रह सकेंगे।
बीकानेर, 22 जून (सोमवार)। राजस्थान के व्यापार जगत, उद्यमियों और आम उपभोक्ताओं के लिए सरकार की ओर से एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ी राहत की खबर सामने आई है। प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को वैश्विक स्तर पर गति देने और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। अब राजस्थान में होटल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल्स और अन्य तमाम व्यावसायिक दुकानें व प्रतिष्ठान 24 घंटे (दिन-रात) खुले रह सकेंगे।
श्रम विभाग की ओर से इस संबंध में बाकायदा राजपत्र (गजट) अधिसूचना जारी कर दी गई है। सरकार के इस कदम से व्यापारियों में भारी उत्साह है, वहीं प्रदेश में 'नाइट लाइफ' और पर्यटन को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
अधिसूचना जारी: दुकानों को समय के बंधन से मिली मुक्ति
राज्य सरकार के श्रम विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, 'राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक संस्थान अधिनियम, 1958' की धारा 3 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह छूट प्रदान की गई है।
अब तक प्रदेश के विभिन्न जिलों और नगर पालिकाओं व नगर निगम क्षेत्रों में दुकानों के खुलने और बंद होने का समय (जैसे रात 8 या 10 बजे तक) स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा तय किया जाता था। समय सीमा का उल्लंघन करने पर चालान और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता था। लेकिन नई राजपत्र अधिसूचना के लागू होने के बाद, अब कोई भी दुकानदार अपनी मर्जी और सुविधानुसार अपनी दुकान या प्रतिष्ठान को चौबीसों घंटे खुला रख सकता है। इसके लिए उन्हें किसी अतिरिक्त विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
कर्मचारियों के हित और सुरक्षा को लेकर लागू रहेंगी ये 5 कड़ी शर्तें
सरकार ने प्रतिष्ठानों को 24 घंटे खोलने की अनुमति तो दी है, लेकिन इसके साथ ही श्रमिकों के शोषण को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिसूचना में कुछ अनिवार्य शर्तें और नियम भी जोड़े हैं, जिनका पालन करना हर व्यापारी के लिए बेहद जरूरी होगा:
- 8 घंटे की शिफ्ट का नियम: किसी भी कर्मचारी या श्रमिक से एक दिन में 8 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकेगा। यदि कोई संस्थान 24 घंटे चलता है, तो उसे रोटेशन के आधार पर तीन अलग-अलग शिफ्टों में कर्मचारियों की नियुक्ति करनी होगी।
- ओवरटाइम का दोहरा भुगतान: यदि किसी कर्मचारी से अनिवार्य परिस्थिति में तय घंटों से अधिक काम करवाया जाता है, तो उसे सामान्य मजदूरी दर से दोगुना ओवरटाइम भुगतान करना होगा।
- साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य: प्रत्येक कर्मचारी को सप्ताह में एक दिन का पूर्ण सवेतन (Paid) अवकाश देना अनिवार्य होगा। लगातार काम कराने पर संस्थान के खिलाफ कार्रवाई होगी।
- महिला सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध: यदि किसी संस्थान में रात की शिफ्ट (शाम 8 बजे से सुबह 6 बजे के बीच) में महिला कर्मचारी काम करती हैं, तो उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी नियोक्ता की होगी। उनकी सहमति के बिना उन्हें नाइट शिफ्ट में नहीं बुलाया जा सकेगा और काम पूरा होने पर सुरक्षित होम-ड्रॉप (घर पहुंचाने) की व्यवस्था करनी होगी।
- सीसीटीवी और सुरक्षा गार्ड: रात में खुलने वाले सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पर्याप्त रोशनी, सुरक्षा गार्ड और हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों का वर्किंग कंडीशन में होना अनिवार्य किया गया है, ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।
व्यापार और पर्यटन को पंख; बीकानेर के भुजिया-रसगुल्ला उद्योग को सीधा लाभ
इस फैसले का सबसे बड़ा सकारात्मक असर राजस्थान के पर्यटन और स्थानीय उद्योगों पर देखने को मिलेगा। बीकानेर जैसे सांस्कृतिक और पर्यटन प्रधान शहर के लिए यह निर्णय बेहद फायदेमंद साबित होगा:
- पर्यटकों को सुविधा: देर रात रेलवे स्टेशनों या बस स्टैंड पर उतरने वाले यात्रियों और विदेशी पर्यटकों को अब भोजन, कैब और जरूरी सामान के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
- स्थानीय उद्योगों को रफ्तार: बीकानेर का विश्वप्रसिद्ध भुजिया, रसगुल्ला और नमकीन उद्योग जो देर रात तक उत्पादन और पैकेजिंग के काम में जुटा रहता है, उन्हें अब अपने आउटलेट्स और रिटेल काउंटर्स को रात में भी चालू रखने की विधिक आजादी मिल गई है। इससे टर्नओवर और बिक्री में भारी इजाफा होगा।
- रोजगार के नए मौके: दुकानों के 24 घंटे संचालित होने से लॉजिस्टिक्स, डिलीवरी पार्टनर्स, सिक्योरिटी गार्ड्स और रिटेल सेक्टर्स में युवाओं के लिए नौकरियों के हजारों नए अवसर सृजित होंगे।

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