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बीकानेर: बड़े ब्रांड्स पर बैक-टू-बैक एक्शन, अब 'रेड बुल' पर चला स्वास्थ्य विभाग का हंटर; बोथरा एंड संस पर छापा, 608 कैन सीज

India-1stNews



​— बड़े ब्रांड्स पर बैक-टू-बैक एक्शन: स्टिंग और एड्रीनलीन रश के बाद अब बीकानेर में रेड बुल (Red Bull) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई।

रानी बाजार औद्योगिक क्षेत्र में दबिश: मैसर्स बोथरा एंड संस के प्रतिष्ठान और गोदाम से लिया सैंपल, जांच रिपोर्ट आने तक स्टॉक सीज।

भ्रामक दावों पर सख्त रोक: सीएमएचओ डॉ. पुखराज साध बोले— लेबल पर "एनर्जी ड्रिंक", "बॉडी एनर्जाइज" या "माइन्ड स्टिम्युलेट" लिखना नियमों के विरुद्ध।

देरी से जागी पुलिस/प्रशासन, उठे सवाल: लंबे समय से बाजार में बिक रहे इन पेय पदार्थों पर केवल शिकायत या टारगेट पूरे करने के लिए कार्रवाई करने पर जनता में आक्रोश।

बीकानेर, 8 जुलाई (बुधवार)। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) द्वारा देश के प्रमुख एनर्जी ड्रिंक ब्रांड्स को नोटिस जारी किए जाने के बाद बीकानेर का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। खारा रोड पर हुई बड़ी जब्ती के बाद अब खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने शहर के भीतर रानी बाजार औद्योगिक क्षेत्र में स्थित मैसर्स बोथरा एंड संस के प्रतिष्ठान एवं गोदाम पर औचक निरीक्षण और नमूनीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया है। टीम ने मौके से नामी ब्रांड 'रेड बुल' के सैकड़ों कैन जब्त किए हैं।

सीएमएचओ डॉ. पुखराज साध के निर्देश पर सीज किए 608 कैन

​मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. पुखराज साध ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला के निर्देशन में जिले भर में विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है।

​इसी के तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने रानी बाजार स्थित बोथरा एंड संस के गोदाम पर छापा मारा। टीम ने वहां खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कैफिनेटेड बेवरेज रेड बुल (Red Bull) का कानूनी नमूना (सैंपल) लिया। इसके साथ ही, लैब की अंतिम जांच रिपोर्ट प्राप्त होने तक सुरक्षा के लिहाज से मौके पर मौजूद रेड बुल के 608 कैन तुरंत प्रभाव से सीज कर दिए गए।

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक; भ्रामक दावों पर FSSAI का कड़ा रुख

​डॉ. पुखराज साध ने स्पष्ट किया कि FSSAI के नियमों के मुताबिक कैफीनेटेड पेय पदार्थों के डिब्बों या विज्ञापनों पर "स्टिम्युलेट्स माइंड" (दिमाग सक्रिय करना), "एनर्जाइज बॉडी" (शरीर को ऊर्जा देना), "एनर्जी ड्रिंक" अथवा "स्पोर्ट्स ड्रिंक" जैसे लुभावने और चमत्कारी शब्दों का इस्तेमाल करना पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसे 'भ्रामक प्रचार' माना जाता है।

​चिकित्सकों के अनुसार, इन ड्रिंक्स में कैफीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बच्चों और कैफीन के प्रति संवेदनशील (सेंसिटिव) व्यक्तियों के स्वास्थ्य पर बेहद प्रतिकूल और खतरनाक प्रभाव डाल सकती है। लिए गए सैंपल को जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला, बीकानेर भेजा जा रहा है, जहां से रिपोर्ट आने के बाद कोर्ट में विधिक अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

नियमित मॉनिटरिंग नहीं होने से जनता में नाराजगी, देर से की गई कार्रवाई पर उठाए सवाल

​इस बड़ी कार्रवाई के बीच स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि ये तथाकथित एनर्जी ड्रिंक्स सालों से खुलेआम बाजार में बिक रहे हैं और शहर की युवा पीढ़ी व छात्र इन्हें बड़े चाव से पीकर अपनी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।

​लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग हमेशा किसी बड़ी शिकायत या दिल्ली से आदेश आने के बाद ही अपनी 'कुंभकर्णी नींद' से जागता है। विभाग नियमित रूप से ऐसे हानिकारक उत्पादों की जांच करने के बजाय केवल त्योहारी सीजन में या फिर सरकारी आंकड़ों और कागजी टारगेट को पूरा करने के लिए ही ऐसे अभियानों की 'इतिश्री' (खानापूर्ति) करता रहा है, जिससे नशा और मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं।




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