— जनता के दबाव के आगे झुका निगम: महीनों से बंद पड़े सेटेलाइट कार्यालय को पूरी तरह समेटने की योजना पर जनता और जनप्रतिनिधियों ने पानी फेरा।
— नए सरकारी भवन की तलाश पूरी: अधिकारियों की उच्चस्तरीय टीम ने किया सघन निरीक्षण; सुजानदेसर के पास स्थित सामुदायिक केंद्र पर बनी सैद्धांतिक सहमति।
— एक लाख से अधिक की आबादी को राहत: दोबारा कार्यालय खुलने से गंगाशहर, भीनासर और सुजानदेसर के निवासियों को नहीं लगाने पड़ेंगे मुख्य कार्यालय के चक्कर।
— आयुक्त की अंतिम मुहर का इंतजार: एक्सईएन पवन बंसल और उपायुक्त दयमंती कंवर की रिपोर्ट के बाद आयुक्त स्तर से जारी होगी अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति।
बीकानेर/गंगाशहर, 9 जुलाई (गुरुवार)। गंगाशहर, भीनासर, सुजानदेसर और आस-पास के बड़े इलाके की जनता के लिए एक बड़ी और बेहद राहत भरी खबर है। पिछले कई महीनों से बंद पड़े नगर निगम के गंगाशहर सेटेलाइट कार्यालय को दोबारा शुरू करने के रास्ते आखिरकार साफ हो गए हैं। नगर निगम प्रशासन ने व्यापक तलाश के बाद अब नए सरकारी भवन को शॉर्टलिस्ट कर लिया है। बुधवार को निगम अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय टीम ने गंगाशहर इलाके के विभिन्न सरकारी भवनों का सघन निरीक्षण किया, जिसके बाद सुजानदेसर के पास स्थित एक सामुदायिक केंद्र में निगम कार्यालय खोलने का सैद्धांतिक निर्णय लिया गया है।
एक्सईएन पवन बंसल और उपायुक्त दयमंती कंवर ने किया निरीक्षण
मिली जानकारी के अनुसार, इस नए भवन पर अंतिम मुहर निगम आयुक्त के स्तर से लगनी अभी बाकी है, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर इसे हरी झंडी दे दी गई है। बुधवार को हुए इस विशेष निरीक्षण और फैसले के दौरान नगर निगम के एक्सईएन पवन बंसल और उपायुक्त दयमंती कंवर खुद मौके पर मौजूद थे। दोनों ही अधिकारियों ने भवन की उपयोगिता और क्षेत्र का मौका-मुआयना करने के बाद सहमति जताई कि प्रशासनिक और जनहित के दृष्टिकोण से यह सामुदायिक केंद्र सबसे उपयुक्त जगह है।
पारिवारिक विवाद और कोर्ट के आदेश के बाद खाली करना पड़ा था पुराना भवन
दरअसल, गंगाशहर में नगर निगम का यह कार्यालय कोई नया नहीं है। पिछले कई दशकों से यह कार्यालय एक तय भवन में सुचारू रूप से चल रहा था, जिससे स्थानीय निवासियों को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, सफाई व्यवस्था की शिकायत, पट्टों की फाइल जमा कराने जैसे रोजमर्रा के निगम संबंधी कार्यों के लिए बीकानेर मुख्य कार्यालय की दौड़ नहीं लगानी पड़ती थी।
लेकिन, जिस भवन में यह दफ्तर संचालित था, वह एक पारिवारिक विवाद के दायरे में आ गया और मामला न्यायालय तक पहुंच गया। इस कानूनी लड़ाई में नगर निगम को अदालत में लगातार हार का सामना करना पड़ा और आखिरकार न्यायालय के सख्त आदेशों के बाद निगम को वह जगह खाली करनी पड़ी। भवन हाथ से जाने के बाद निगम प्रशासन ने इस कार्यालय को वैकल्पिक जगह पर चलाने के बजाय पूरी तरह समेटने और बंद करने का मन बना लिया था।
जनता के चौतरफा दबाव के आगे झुका निगम प्रशासन
निगम द्वारा इस कार्यालय को हमेशा के लिए बंद करने की योजना से गंगाशहर के स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया था। छोटे-छोटे कामों के लिए मुख्य शहर भागने की मजबूरी के खिलाफ स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया। जनता और जनप्रतिनिधियों के चौतरफा राजनीतिक दबाव के आगे आखिरकार निगम प्रशासन को घुटने टेकने पड़े और अपना पुराना फैसला बदलते हुए गंगाशहर में दोबारा कार्यालय खोलने की कवायद शुरू करनी पड़ी।
एक्सईएन पवन बंसल और उपायुक्त दयमंती कंवर द्वारा तैयार की गई यह निरीक्षण रिपोर्ट अब अंतिम स्वीकृति के लिए आयुक्त के समक्ष रखी जाएगी। आयुक्त की अंतिम हरी झंडी मिलते ही सुजानदेसर के पास स्थित इस सामुदायिक केंद्र में निगम का पूरा अमला, कंप्यूटर और संबंधित विंग के पटल सज जाएंगे। इस कार्यालय के दोबारा शुरू होने से गंगाशहर जोन की करीब 1 लाख से अधिक की आबादी को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।

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